
x
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव बीते बुधवार को लंकादहन के साथ संपन्न हुआ है। वहीं, भगवान रघुनाथ जी सहित अधिकतर देवी-देवता लंका दहन के बाद देवालय लौटे हैं। कुछेक देवी-देवता लंका दहन से पहले देवालय लौटे। लेकिन कुछ देवी-देवता लंका दहन के बाद भी ठारा करडू की सौह ढालपुर में अपने अस्थायी शिविर में विराजमान रहेे। जिनके साथ उनके देवलु भी साथ रहे। वहीं, दशहरा उत्सव संपन्न होने के दूसरे दिन यानी गुरुवार को ढालपुर मैदान से देवी-देवता भी हारियानों संग अपने देवालय की ओर रवाना हुए। ढोल-नगाड़ों की थाप और सुंदर लाव लश्कर के साथ ढालपुर से देवी-देवता देवालय लौटे। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को देवता आदिब्रह्मा, देवता श्रृंगाऋषि, देवता जमलु पीज, देवता बालूनाग, देवता छमाणी नारायण, माता भटंती नग्गर, माता चामुंडा, माता पंचालिका,देवता अजय पाल, वीरनाथ गौहरी शोगी, वीरनाथ गौहरी जनाहल, वीरनाथ गौहरी खोखण, देवता कैला वीर, देवता गणपति, देवता सप्तऋषि श्रीपाल, देवता छोई महाराज, देवता दईंत महाराज, सहित 33 के करीब देवी-देवता ढालपुर से रवाना हो गए। अब ढालपुर सुनसान हो गए। एक साथ देवी-देवताओं के दर्शन अब अगले वर्ष श्रद्धालुओं को होंगे। दशहरा उत्सव संपन्न होने के बाद दूसरे दिन यानि गुरुवार को ढालपुर से 33 के करीब देवी-देवता अपने-अपने देवालय रवाना हुए।
हालांकि बाकी देवी-देवता बुधवार को ही रवाना हो गए थे। सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का बुधवार को समापन हो गया। सात दिनों तक एक ही मैदान में हुए भव्य देव महामिलन के बाद देवी-देवता अपने देवालय लौट गए। ढालपुर सुनसान हो गया। लिहाजा एक साल के लिए देवी-देवता जुदा हो गए। अपनी अनूठी देव परंपरा के लिए मशहूर सात दिनों तक मनाया जाने वाला कुल्लू दशहरा उत्सव भगवान रघुनाथ जी के उनके स्थायी मंदिर रघुनाथपुर पहुंचते ही संपन्न हो गया। देवी-देवता भगवान रघुनाथ जी से शक्तियां अर्जित के देवालय की ओर रवाना हुए। ढालपुर मैदान में सात दिनों के लिए बनाए गए भगवान रघुनाथ जी के अस्थायी शिविर से बुधवार को रथयात्रा आरंभ हुई और देवताओं के भारी समूह व अपार श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच रथ को मैदान के अंतिम छोर तक ले जाया गया। उसके बाद जैसे ही रघुनाथ अपने देवालय लौटे, उत्सव का समापन हो गया। इसके साथ ही सभी देवी-देवता भी अपने-अपने देवालय लौट गए। कुछ देवी-देवता लंका दहन से पहले सुबह ही अपने-अपने देवालयों की ओर प्रस्थान कर चुके थे, लेकिन अधिकतर देवी-देवता भगवान रघुनाथ जी को उनके देवालय रघुनाथपुर पहुंचाने के बाद ही अपने-अपने देवालय की ओर निकले। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर का कहना है कि अब भक्तों द्वारा अराध्यों को घर बुलाया जा रहा है। दशहरा संपन्न होते ही देवी-देवता भक्तों के घर गए।
Tagsहिमाचल प्रदेश न्यूज हिंदीहिमाचल प्रदेश न्यूजहिमाचल प्रदेश की खबरहिमाचल प्रदेश लेटेस्ट न्यूजहिमाचल प्रदेश न्यूज अपडेटहिमाचल प्रदेश हिंदी न्यूज टुडेहिमाचल प्रदेश हिंदीन्यूज हिंदी न्यूज हिमाचल प्रदेशहिमाचल प्रदेश हिंदी खबरHimachal Pradesh News HindiHimachal Pradesh NewsHimachal Pradesh Latest NewsHimachal Pradesh News UpdateHimachal Pradesh Hindi News TodayHimachal Pradesh HindiNews Hindi News Himachal PradeshHimachal Pradesh Hindi News
Next Story





