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Una. ऊना। शहर ऊना के पुराना होशियारपुर रोड पर लालसिंगी में शुक्रवार को एक बड़े अग्निकांड में प्रवासी मजदूरों की 29 झुग्गियां पूरी तरह जलकर राख हो गई। इस घटना में झुग्गियों के भीतर रखा सारा सामान नष्ट हो गया और पीडि़त परिवारों को करीब तीन लाख रुपए का नुकसान हुआ है। हालांकि पीडि़त परिवारों के लिए राहत की खबर यह है कि इस अग्निकांड में कोई भी जानी का नुकसान नहीं हुआ है। जानकारी के अनुसार दोपहर के समय अचानक एक झुग्गी में अचानक आग भडक़ उठी। कुछ ही मिनटों में आग ने तेज हवाओं के कारण आसपास की अन्य झुग्गियों को भी अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते पूरी झुग्गी बस्ती क्षेत्र आग की लपटों से घिर गया और चारों ओर अफरा-तफरी मच गई। घटना के समय अधिकांश प्रवासी मजदूर खेतों में गेहूं की कटाई के काम पर गए हुए थे। स्थानीय लोगों द्वारा सूचना देने पर अग्निशमन विभाग की तीन गाडिय़ां मौके पर पहुंचीं। फायर कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक अधिकांश झुग्गियां जल चुकी थीं। वहीं, पुलिस ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य कारण की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। राजस्व विभाग की टीम भी मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन कर रही है।
अग्निशमन केंद्र ऊना के फायर अफसर सुरेश कुमार ने बताया कि आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है और इसकी जांच की जा रही है। इस हादसे में पीडि़त परिवारों को 2.90 लाख रुपए का नुकसान हुआ है और विभाग ने करीब 15 लाख रुपए की संपति को जलने से बचाया है जिला ऊना के लालसिंगी क्षेत्र में शुक्रवार को लगी भीषण आग ने प्रवासी मजदूरों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी। पुराने होशियारपुर रोड पर स्थित झुग्गी बस्ती में आग ने कुछ ही मिनटों में 40 से अधिक झुग्गियों को अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते पूरा इलाका राख में तब्दील हो गया। इस हादसे में जहां लाखों रुपये का सामान जलकर खाक हो गया, वहीं अब सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि करीब 29 परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन जीने को मजबूर हैं। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि किसी को अपना सामान बचाने का मौका तक नहीं मिला। उस समय अधिकांश मजदूर खेतों में गेहूं की कटाई के काम पर गए हुए थे। जब उन्हें सूचना मिली और वे दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे, तब तक उनके सपनों के छोटे-छोटे आशियाने जलकर राख हो चुके थे। झुग्गियों में रखा कपड़ा, राशन, बर्तन, दस्तावेज और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी सामग्री सब कुछ नष्ट हो चुका था। अब स्थिति यह है कि इन परिवारों के पास न तो रहने की छत है और न ही दैनिक जरूरत का कोई सामान। दिन में तेज धूप और गर्म हवाएं उनके लिए नई मुसीबत बन गई हैं, जबकि रात में खुले में सोने की मजबूरी उन्हें भयभीत कर रही है। महिलाएं अपने छोटे बच्चों को लेकर पेड़ों की छांव या सडक़ किनारे अस्थायी आश्रय ढूंढने को मजबूर हैं। एक पीडि़त मजदूर ने बताया कि उन्होंने थोड़ी बहुत जमा-पूंजी बनाई थी, वह भी आग की भेंट चढ़ गई। अब उनके पास न कपड़े बचे हैं।
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