पश्चिम बंगाल

शुभेंदु अधिकारी ने की योजना की घोषणा

Saba Naaz
5 July 2026 3:49 PM IST
शुभेंदु अधिकारी ने की योजना की घोषणा
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उत्तर बंगाल: चाय बागान श्रमिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए राज्य सरकार ने 313.30 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना (PMCSPY) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास पर बड़ा निवेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को इस योजना के क्रियान्वयन की घोषणा की। यह निर्णय राज्य स्तरीय समिति (SLC) की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने की। बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना को अंतिम मंजूरी दी गई और अब इसे टी बोर्ड ऑफ इंडिया के माध्यम से भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय की स्टीयरिंग कमेटी को भेजा जाएगा।

इस योजना के तहत कुल 313.30 करोड़ रुपये को विभिन्न हिस्सों में बांटा गया है। सबसे बड़ा हिस्सा 177 करोड़ रुपये शिक्षा क्षेत्र के लिए रखा गया है, जिसके तहत चाय बागानों के स्कूलों की स्थिति, कक्षाओं और शिक्षा गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 72 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत किया जाएगा और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा 63 करोड़ रुपये से 321 आधुनिक रेस्टिंग शेड बनाए जाएंगे। इनमें से 88 शेड पहाड़ी क्षेत्रों में और 233 मैदानी इलाकों में बनाए जाएंगे। इन शेड्स में सिरेमिक फर्श, शौचालय, बिजली, पंखे, भोजन कक्ष और सोलर सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी।

मैदानी क्षेत्रों में सोलर वाटर पंप और बोरिंग की सुविधा होगी, जबकि पहाड़ी इलाकों में झरनों के पानी को टैंकों के जरिए सप्लाई किया जाएगा। इससे श्रमिकों को बेहतर आराम और बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। योजना के क्रियान्वयन के लिए उत्तर बंगाल विकास विभाग (NBDD) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। यह विभाग एक विशेष प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) के जरिए टी बोर्ड के साथ समन्वय करेगा। इसके साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग भी इस योजना में सहयोग करेंगे।

जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी परियोजनाओं की नियमित निगरानी करें ताकि योजना समय पर और प्रभावी तरीके से लागू हो सके। इस योजना को चाय बागान श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थल की स्थिति में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

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