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पश्चिम बंगाल: भारत में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों और रोहिंग्याओं के खिलाफ देशव्यापी अभियान तेज कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से ‘डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट’ रणनीति लागू की है। इसके तहत सीमा सुरक्षा बल (BSF), राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने संयुक्त रूप से घुसपैठियों के नेटवर्क पर कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकार की इस 3डी नीति के तहत सबसे पहले अवैध प्रवासियों की पहचान (डिटेक्ट) की जा रही है। इसके लिए बायोमेट्रिक डेटा, आधुनिक तकनीक और खुफिया इनपुट का उपयोग किया जा रहा है। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बने रिकॉर्ड्स को सरकारी सिस्टम से हटाया (डिलीट) जा रहा है। अंतिम चरण में कानूनी प्रक्रिया पूरी कर अवैध प्रवासियों को उनके देश वापस भेजने (डिपोर्ट) की कार्रवाई की जा रही है।
इस अभियान का सबसे बड़ा असर पश्चिम बंगाल सहित सीमावर्ती राज्यों में देखा जा रहा है, जहां बांग्लादेश से लंबी सीमा लगती है। यहां विशेष होल्डिंग सेंटर्स बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन सेंटर्स में उन विदेशी नागरिकों को रखा जाएगा, जो अवैध रूप से भारत में पाए गए हैं या जेल की सजा पूरी कर चुके हैं और अपने देश लौटने की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। जिला प्रशासन को जमीन चिन्हित करने और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन घुसपैठ मामलों के पीछे कई मानव तस्करी रैकेट सक्रिय हैं, जो सीमावर्ती क्षेत्रों से अवैध प्रवेश करवाते हैं और फर्जी आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज तैयार कराते हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे कई एजेंटों को गिरफ्तार किया है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह केवल अवैध प्रवासन का मामला नहीं है, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। कई मामलों में इन अवैध प्रवासियों के असामाजिक और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के संकेत मिले हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घुसपैठ और अवैध निवास के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। किसी भी अवैध विदेशी नागरिक को बख्शा नहीं जाएगा और पूरी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।





