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बंगाल में पुचका बना जानलेवा, किशोरी की मौत; 20 से ज्यादा बीमार

पश्चिम बंगाल: बीरभूम जिले में पुचका खाने के बाद कथित रूप से खाद्य विषाक्तता का मामला सामने आया है। मल्लारपुर थाना क्षेत्र के दक्षिण ग्राम मोड़ इलाके में पुचका खाने के बाद एक किशोरी की मौत हो गई, जबकि 20 से 25 अन्य लोग बीमार पड़ गए। बीमार लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।
मृत किशोरी की पहचान हसीना खातून के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम दक्षिण ग्राम मोड़ स्थित सीएसपी बैंक के पास एक पुचका विक्रेता से परिवार के एक सदस्य ने करीब 100 रुपये का पुचका खरीदा था। इसके बाद परिवार के सभी लोगों ने उसे खाया। आरोप है कि कुछ ही घंटे बाद परिवार के सदस्यों की तबीयत बिगड़ने लगी।
परिजनों के मुताबिक, पुचका खाने के लगभग दो घंटे बाद लोगों को पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हुई। धीरे-धीरे परिवार के कई सदस्य बीमार हो गए। हालत खराब होने पर सभी को तुरंत रामपुरहाट गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान रविवार सुबह हसीना खातून की मौत हो गई।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। बताया जा रहा है कि सिर्फ एक परिवार ही नहीं, बल्कि इलाके के कई अन्य लोगों ने भी उसी स्थान से पुचका खाया था और इसके बाद उनकी तबीयत खराब हो गई। बीमार लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। विभाग की ओर से एक विशेष मेडिकल टीम गठित की गई है, जो गांव पहुंचकर पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बीमारी का कारण वास्तव में खाद्य विषाक्तता है या इसके पीछे कोई अन्य वजह है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम खाद्य सामग्री के नमूने भी जांच के लिए भेज सकती है। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि पुचका बनाने में इस्तेमाल किए गए पानी, मसाले और अन्य सामग्री की गुणवत्ता कैसी थी। अगर जांच में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
उधर, मल्लारपुर थाना पुलिस ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पुचका विक्रेता द्वारा खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इतने लोगों की तबीयत एक साथ कैसे बिगड़ी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और साफ-सफाई पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। गर्मी और बारिश के मौसम में खुले में रखे खाद्य पदार्थ जल्दी खराब हो सकते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करते समय सावधानी बरतें और किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि किशोरी की मौत और लोगों के बीमार पड़ने की असली वजह क्या थी।





