पश्चिम बंगाल

बंगाल में SIR पर सियासी घमासान, 7 शहरों के निकाय चुनाव अटके

Rajeshwari Nishad
28 Oct 2026 2:42 PM IST
बंगाल में SIR पर सियासी घमासान, 7 शहरों के निकाय चुनाव अटके
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West Bengal : पश्चिम बंगाल में कोलकाता और हावड़ा समेत सात प्रमुख शहरी निकायों के चुनाव का इंतजार कर रहे मतदाताओं और राजनीतिक दलों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। राज्य चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, वार्डवार मतदाता सूची के पुनर्गठन और परिसीमन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण चुनाव लगभग एक महीने आगे खिसक सकते हैं। पहले इन निकायों में नवंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में मतदान कराने और दिसंबर के पहले सप्ताह में नतीजे घोषित करने की तैयारी थी। हालांकि, अब कई वार्डों में मतदाताओं के पुनर्वितरण का काम अधूरा होने से चुनाव कार्यक्रम पर अनिश्चितता बढ़ गई है। दूसरी तरफ मतदाता सूची से हटाए गए नामों और लंबित अपीलों को लेकर भी राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए हैं। फिलहाल राज्य चुनाव आयोग ने मतदान की नई तारीखों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
नवंबर के आखिरी सप्ताह में होने थे चुनाव, अब देरी की आशंका
पश्चिम बंगाल में नगर निकाय चुनावों की तैयारियां पिछले कई सप्ताह से चल रही हैं। शुरुआती योजना के अनुसार, सात शहरी निकायों में 27 से 29 नवंबर के बीच मतदान कराया जाना था।मतगणना और नई निर्वाचित परिषदों के गठन की प्रक्रिया दिसंबर के पहले सप्ताह तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया था।हालांकि, राज्य चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वार्डों के परिसीमन के बाद मतदाताओं को नए वार्डों और मतदान केंद्रों से जोड़ने का काम कई स्थानों पर पूरा नहीं हुआ है।इस कारण चुनाव की अधिसूचना जारी करने और मतदान की तारीख तय करने में देरी हो सकती है।सूत्रों के अनुसार, चुनाव लगभग एक महीने आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि, यह फिलहाल संभावित बदलाव है, आयोग का अंतिम निर्णय नहीं।
कोलकाता-हावड़ा समेत इन सात निकायों में होंगे चुनाव
राज्य चुनाव आयोग जिन सात शहरी निकायों के चुनाव की तैयारी कर रहा है, उनमें कोलकाता नगर निगम, हावड़ा नगर निगम, बाली, हल्दिया, धूपगुड़ी, कालिम्पोंग और कुर्सियांग शामिल हैं।इनमें कोलकाता और हावड़ा राजनीतिक तथा प्रशासनिक दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं।कोलकाता पश्चिम बंगाल की राजधानी और राज्य की प्रमुख आर्थिक गतिविधियों का केंद्र है। वहीं, हावड़ा एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और शहरी क्षेत्र है।इन शहरों में नगर निकाय चुनावों का असर स्थानीय प्रशासन, बुनियादी सुविधाओं और शहरी विकास योजनाओं पर पड़ेगा।चुनाव के बाद निर्वाचित प्रतिनिधियों को सड़क, जलापूर्ति, सफाई व्यवस्था, जलनिकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालनी होंगी।इसलिए चुनाव में संभावित देरी को लेकर स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक दलों की दिलचस्पी बढ़ गई है।
कोलकाता में 144 से बढ़कर 209 हुए वार्ड
कोलकाता नगर निगम में परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 कर दी गई है।वार्डों की सीमाओं में हुए बदलाव के कारण मतदाताओं को नए वार्डों में समायोजित करना पड़ रहा है।26 अक्टूबर को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची के अनुसार, कोलकाता नगर निगम के 209 वार्डों में 32 लाख से अधिक मतदाता दर्ज हैं।नए परिसीमन के तहत अधिकांश वार्डों में मतदाताओं की संख्या लगभग 12 हजार से 18 हजार के बीच रखने का प्रयास किया गया है।कई मतदान केंद्रों पर करीब 900 से 1,200 मतदाता रखे जाने की व्यवस्था बनाई गई है।नए वार्डों और मतदान केंद्रों की जानकारी राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि वे मतदाता सूची की जांच कर सकें।हालांकि, सूची में नामों के पुनर्वितरण और कुछ लंबित मामलों को लेकर सवाल बने हुए हैं।
मतदाता सूची से नाम कटने पर राजनीतिक दलों ने उठाए सवाल
नगर निकाय चुनावों से पहले मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया है।तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, माकपा और अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने राज्य चुनाव आयोग से मांग की है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मतदान कराया जाए।इन दलों ने आशंका जताई है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान जिन पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें मतदान का अवसर नहीं मिल पाएगा।चुनाव आयोग के हलफनामे का हवाला देते हुए विपक्षी प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में लगभग 1.2 लाख और हावड़ा नगर निगम क्षेत्र में करीब 39 हजार अपीलें लंबित हैं।इन अपीलों पर अंतिम निर्णय आने से पहले चुनाव कराने को लेकर संबंधित दलों ने आपत्ति जताई है।उनकी मांग है कि सभी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का पर्याप्त अवसर दिया जाए।
4 जनवरी 2027 को आएगी अंतिम मतदाता सूची
पश्चिम बंगाल में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी SSR की प्रक्रिया भी चल रही है।इसके अंतर्गत 1 जनवरी 2027 को पात्रता तिथि मानते हुए मतदाता सूची तैयार की जा रही है।निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, प्रारूप सूची 12 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को जारी होगी।चुनाव टालने की मांग करने वाले दलों का कहना है कि इस प्रक्रिया के पूरा होने से पात्र मतदाताओं को अपने नाम दोबारा दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।हालांकि, इस मांग पर सभी राजनीतिक दल एकमत नहीं हैं।भाजपा ने चुनाव टालने की मांग का विरोध किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मतदान की तारीख तय करना राज्य चुनाव आयोग का अधिकार है और पार्टी चुनाव लड़ने के लिए तैयार है।इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद साफ दिखाई दे रहे हैं।
राज्य चुनाव आयोग के सामने बड़ी चुनौती
राज्य चुनाव आयोग को परिसीमन, मतदाता सूची, मतदान केंद्रों की व्यवस्था और चुनावी अधिसूचना से जुड़े कई प्रशासनिक कार्य पूरे करने हैं।आयोग ने चुनाव की तैयारियों को लेकर जिला अधिकारियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें भी शुरू कर दी हैं।27 अक्टूबर को दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने कोलकाता नगर निगम चुनावों की तैयारियों के संबंध में राजनीतिक दलों के साथ बैठक आयोजित की।इस दौरान प्रारूप मतदाता सूची और प्रस्तावित मतदान केंद्रों से संबंधित जानकारी साझा की गई।चुनावी प्रक्रिया में नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच, उम्मीदवारों की नाम वापसी और मतदान के बीच निर्धारित समय देना आवश्यक है।इसी कारण अधिसूचना जारी करने में देरी होने पर मतदान कार्यक्रम भी प्रभावित हो सकता है।
अब कब होंगे चुनाव? आधिकारिक घोषणा का इंतजार
कोलकाता और हावड़ा समेत सात निकायों के चुनाव की संभावित देरी ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।एक तरफ राजनीतिक दल मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों पर जोर दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन के सामने समय पर चुनाव कराने की चुनौती है।
राज्य चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, अधूरी परिसीमन संबंधी प्रक्रियाओं के कारण चुनाव करीब एक महीने आगे बढ़ सकते हैं।हालांकि, 26 अक्टूबर तक की प्रशासनिक तैयारियों में नवंबर के अंतिम सप्ताह में मतदान कराने की संभावना भी बनी हुई थी।
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