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फतेहाबाद जिले में किसानों ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मांग थी कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान के लिए उन्हें मुआवजा दिया जाए। 'पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति' के बैनर तले किसानों ने उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और तुरंत राहत की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा। जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश हसांगा के नेतृत्व में किसानों ने बताया कि बहबलपुर, भडोलावाली, सोट्टर भट्टू और थेरी समेत दर्जनों गांवों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने मांग की कि फसल के नुकसान का विशेष आकलन (सर्वे) किया जाए और प्रति एकड़ 1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, जो सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजा जाए।
राज्य अध्यक्ष मनदीप सिंह नाथवान ने आरोप लगाया कि प्रशासन राहत देने के बजाय केवल कागजी कार्रवाई पर ध्यान दे रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही नुकसान का सही आकलन नहीं किया गया और उचित मुआवजा नहीं मिला, तो 3 नवंबर को पूरे जिले के किसान उपायुक्त कार्यालय का घेराव करेंगे। रतिया में किसानों ने फसल के आकलन की मांग की
इस बीच, रतिया में किसानों ने 'किसान विश्राम गृह' में एक बैठक की। इसके बाद उन्होंने उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) को एक ज्ञापन सौंपकर ओलावृष्टि से प्रभावित धान के खेतों का तुरंत आकलन करने और उचित मुआवजा देने की मांग की। जिला अध्यक्ष निर्भय सिंह ने बताया कि धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, लेकिन घटना के चार दिन बाद भी अभी तक नुकसान का आकलन शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बुधवार तक आकलन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो किसान भाजपा नेताओं के घरों का घेराव करेंगे।
धान खरीद के नियमों पर सवाल
किसानों ने यह भी मांग की कि ओलावृष्टि से प्रभावित इलाकों में धान खरीद के लिए नमी की स्वीकार्य सीमा को 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 22 प्रतिशत किया जाए। उन्होंने प्रति एकड़ 28 क्विंटल धान खरीद की सीमा को हटाने और कुछ किसानों के रद्द किए गए पंजीकरणों को तुरंत बहाल करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के कारण पहले से ही आर्थिक नुकसान झेल रहे किसानों को राहत देने के लिए सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए। रतिया में हुई इस बैठक में गुरप्रीत सिंह दादूपुर, तरसेम सिंह भुंडरवास, सरदूल सिंह हुकमवाली और करमजीत सिंह मुद्री जैसे किसान मौजूद थे।
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