पश्चिम बंगाल

सेना की गतिविधियों पर नजर रखने का शक पाकिस्तानी संदिग्ध गिरफ्तार

Ratna Netam
12 Aug 2026 7:32 PM IST
सेना की गतिविधियों पर नजर रखने का शक पाकिस्तानी संदिग्ध गिरफ्तार
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने भारत-बांग्लादेश सीमा के पास बड़ी कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक व्यक्ति के पाकिस्तानी नागरिक होने का संदेह जताया गया है। दोनों पर कथित तौर पर जासूसी से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने भारत में रहते हुए किन-किन स्थानों से जानकारियां जुटाईं और उन्हें देश से बाहर भेजने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गोपनीय सूचना मिलने के बाद बुधवार को उत्तर 24 परगना जिले के बनगांव इलाके में कार्रवाई की गई। यहां से राणा रऊफ खालिद उर्फ वहाब आलम नाम के एक व्यक्ति को पकड़ा गया। जांच एजेंसियों को संदेह है कि वह पाकिस्तान के फैसलाबाद का रहने वाला है। उससे पूछताछ के बाद मोहम्मद अजीज नाम के एक अन्य व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया।
मामले से जुड़े वकील के मुताबिक, रऊफ को उस समय पकड़ा गया, जब वह कथित रूप से बांग्लादेश में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि वह बांग्लादेश के रास्ते नेपाल जाने की फिराक में था। अदालत ने दोनों आरोपियों को फिलहाल 26 अगस्त तक पुलिस रिमांड में भेज दिया है। अब STF दोनों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
जांच के दौरान सबसे अहम बात आरोपियों के पास भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेज मिलने की बताई जा रही है। वकील के मुताबिक, आरोपियों के पास से आधार कार्ड और वोटर कार्ड बरामद किए गए हैं। पूछताछ के दौरान रऊफ ने कथित तौर पर बताया कि इन दस्तावेजों को बनवाने में कोलकाता निवासी मोहम्मद अजीज ने उसकी मदद की थी। हालांकि इन आरोपों और दस्तावेजों की वास्तविकता की विस्तृत जांच अभी जारी है।
STF की ओर से अदालत में दी गई जानकारी के अनुसार, संदिग्ध पाकिस्तानी नागरिक वर्ष 2012 में नेपाल के रास्ते भारत में दाखिल हुआ था। इसके बाद वह लंबे समय तक भारत में रहा। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान वह सेना और रेलवे से जुड़े अधिकारियों तथा प्रतिष्ठानों के बारे में संवेदनशील जानकारियां जुटा रहा था। जांच पूरी होने के बाद ही इन आरोपों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
मामले में डिजिटल सबूत भी जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। अधिकारियों को संदेह है कि गिरफ्तारी से पहले दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से कुछ डेटा डिलीट किया था। अब जांचकर्ता उस डेटा को रिकवर करने की कोशिश कर रहे हैं। फोन से मिलने वाली जानकारी से यह पता चल सकता है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में थे और कथित तौर पर जुटाई गई सूचनाओं को किसके साथ साझा किया गया।
STF के अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर सूचनाएं भारत से बाहर भेजी गईं तो उसके लिए किस संचार माध्यम या डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया। मोहम्मद अजीज से विशेष रूप से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने संदिग्ध पाकिस्तानी नागरिक की किस तरह मदद की और दोनों के बीच संपर्क कब तथा कैसे स्थापित हुआ।
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि आरोपियों ने कथित रूप से किन-किन क्षेत्रों में गतिविधियां संचालित कीं। सुरक्षा एजेंसियां इनके पुराने संपर्कों, यात्रा इतिहास, बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल कम्युनिकेशन की पड़ताल कर सकती हैं। भारतीय पहचान दस्तावेज कैसे हासिल किए गए, इसकी जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि दस्तावेज फर्जी तरीके से बनवाए गए थे तो इसमें शामिल अन्य लोगों तक जांच पहुंच सकती है।
भारत-बांग्लादेश सीमा लंबे समय से सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील मानी जाती है। पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) इस क्षेत्र में तस्करी, अवैध घुसपैठ और अन्य सीमा पार गतिविधियों को रोकने के लिए निगरानी करता है। मौजूदा मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और बढ़ने की संभावना है।
फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है। उनके खिलाफ लगाए गए जासूसी संबंधी आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। STF के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों के कथित नेटवर्क और उनके संपर्कों की पूरी कड़ी का पता लगाना है। डिजिटल डेटा की रिकवरी और जब्त दस्तावेजों की जांच से मामले में आगे महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
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