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पश्चिम बंगाल
सायोनी घोष वाले गुट में नया ट्विस्ट तीन सांसदों ने छोड़ा साथ
Ratna Netam
14 Sept 2026 4:54 PM IST

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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों को लेकर एक बार फिर बड़ी हलचल शुरू हो गई है। सायोनी घोष समेत 20 बागी सांसदों के गुट को लेकर अब दावा किया गया है कि इनमें से 17 सांसद सीधे भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। कूचबिहार से सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया है कि ये सांसद दुर्गा पूजा से पहले या उसके तुरंत बाद BJP का दामन थाम सकते हैं। हालांकि अभी BJP या संबंधित सभी सांसदों की तरफ से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सबसे दिलचस्प सवाल उन तीन सांसदों को लेकर है, जिनके कथित तौर पर 17 सांसदों के साथ BJP में जाने की बात नहीं कही जा रही। इससे यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस से अलग होने के बाद बने बागी खेमे के भीतर भी राजनीतिक रास्ते को लेकर मतभेद पैदा हो गए हैं।
20 सांसदों ने छोड़ा था TMC का साथ
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर बड़ी राजनीतिक टूट देखने को मिली थी। पार्टी के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने अलग रास्ता अपनाया और बाद में नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के साथ जुड़ गए।
इस समूह में सायोनी घोष समेत कई चर्चित चेहरे शामिल रहे हैं। बागी सांसदों ने बाद में BJP के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA के प्रति समर्थन जताया।
जुलाई में इन सांसदों ने NDA की संसदीय दल की बैठक में भी हिस्सा लिया था। उस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री मौजूद थे। सायोनी घोष ने बैठक को सकारात्मक बताते हुए इसमें हुई चर्चा की तारीफ भी की थी।
इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा था कि क्या ये सांसद भविष्य में सीधे BJP में शामिल हो सकते हैं।
अब 17 सांसदों के BJP में जाने का दावा
कूचबिहार सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया के ताजा बयान ने इन अटकलों को और तेज कर दिया है। उनका दावा है कि NCPI से जुड़े 20 सांसदों में से 17 ने BJP में शामिल होने का फैसला कर लिया है।
बसुनिया के मुताबिक यह राजनीतिक बदलाव दुर्गा पूजा से पहले या उसके बाद हो सकता है। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा अक्टूबर में होने वाली है। ऐसे में अगर उनका दावा सही साबित होता है तो अगले कुछ सप्ताह बंगाल की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
हालांकि अभी तक BJP नेतृत्व ने 17 सांसदों के पार्टी में शामिल होने की कोई औपचारिक सूची या तारीख जारी नहीं की है। इसलिए इस संभावित दल-बदल को फिलहाल राजनीतिक दावा ही माना जाना चाहिए।
आखिर तीन सांसदों ने क्यों नहीं दिया साथ?
20 में से केवल 17 सांसदों के BJP में जाने के दावे के बाद बाकी तीन सांसदों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या ये सांसद NCPI के साथ बने रहना चाहते हैं? क्या वे NDA का समर्थन तो करना चाहते हैं लेकिन BJP की सदस्यता नहीं लेना चाहते? या फिर उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अभी बातचीत जारी है?
फिलहाल इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
यह भी संभव है कि बागी सांसदों के बीच BJP से राजनीतिक संबंध रखने के तरीके को लेकर अलग-अलग राय हो। NDA का समर्थन करना और सीधे BJP में शामिल होना दो अलग राजनीतिक फैसले हैं। कुछ सांसद गठबंधन के साथ रहते हुए अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाए रखना चाह सकते हैं।
जब तक संबंधित सांसद खुद अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करते तब तक उनके BJP में न जाने की वजह को लेकर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
सायोनी घोष पर भी नजर
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में सायोनी घोष का नाम खास तौर पर चर्चा में है। वह तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख युवा चेहरों में शामिल रही हैं और बाद में बागी सांसदों के खेमे से जुड़ीं।
अब अगर 17 सांसद BJP में शामिल होते हैं तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सायोनी घोष किस राजनीतिक रास्ते को चुनती हैं।
इससे पहले NCPI के सांसद NDA की बैठक में हिस्सा ले चुके हैं। ऐसे में BJP के साथ उनकी नजदीकी छिपी हुई नहीं है। लेकिन गठबंधन को समर्थन देने से आगे बढ़कर BJP की औपचारिक सदस्यता लेना एक बड़ा राजनीतिक कदम होगा।
बंगाल में BJP ने पहले दिया था झटका
इस घटनाक्रम का एक और महत्वपूर्ण पहलू पश्चिम बंगाल के आगामी निकाय चुनाव हैं। हाल ही में BJP ने संकेत दिया था कि वह कोलकाता और हावड़ा के निकाय चुनावों में अपने दम पर उतरना चाहती है।
राज्य BJP की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया कि दिल्ली में NDA के स्तर पर NCPI के साथ संबंध होने का मतलब यह नहीं है कि पश्चिम बंगाल में भी दोनों दलों के बीच चुनावी गठबंधन होगा।
NCPI से जुड़े नेता BJP के साथ चुनावी तालमेल की संभावना देख रहे थे, लेकिन प्रदेश BJP के रुख ने उन्हें झटका दिया।
ऐसे में अब 17 सांसदों के सीधे BJP में जाने का दावा नई राजनीतिक तस्वीर पेश कर रहा है। अगर सांसद NCPI में रहने के बजाय BJP में ही शामिल हो जाते हैं तो अलग गठबंधन की जरूरत का सवाल भी काफी हद तक खत्म हो सकता है।
दल-बदल कानून भी चर्चा में
सांसदों के इस राजनीतिक कदम के साथ दल-बदल विरोधी कानून का सवाल भी लगातार चर्चा में रहा है। तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों ने पहले पर्याप्त संख्या होने का दावा करते हुए अलग गुट बनाया था।
भारत में दल-बदल से संबंधित मामलों में संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधान महत्वपूर्ण होते हैं। किसी सांसद की सदस्यता पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका फैसला केवल राजनीतिक दावों से नहीं बल्कि संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया और लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय के आधार पर होता है।
इसलिए 17 सांसद BJP में शामिल होते हैं तो उनकी संसदीय स्थिति को लेकर भी राजनीतिक और कानूनी चर्चा तेज हो सकती है।
ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका
अगर 17 सांसदों के BJP में शामिल होने का दावा सही साबित होता है तो यह तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।
पहले सांसदों का पार्टी से अलग होना और उसके बाद उनमें से बड़ी संख्या का सीधे मुख्य प्रतिद्वंद्वी BJP में शामिल होना बंगाल के राजनीतिक समीकरण को प्रभावित कर सकता है।
दूसरी तरफ BJP के लिए इतने सांसदों का एक साथ पार्टी में आना संगठन और संसदीय ताकत के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा।
हालांकि BJP को यह भी देखना होगा कि तृणमूल कांग्रेस से आए नेताओं को लेकर उसके पुराने कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया कैसी रहती है। बंगाल की राजनीति में BJP और TMC के बीच लंबे समय से सीधा और तीखा मुकाबला रहा है।
दुर्गा पूजा के आसपास हो सकता है बड़ा खेल?
बसुनिया के दावे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसकी टाइमिंग है। उन्होंने सांसदों के BJP में शामिल होने के लिए दुर्गा पूजा से पहले या बाद की अवधि का संकेत दिया है।
इस कारण आने वाले दिनों में सभी की नजर 20 बागी सांसदों की गतिविधियों पर रहने वाली है। अगर 17 सांसद वास्तव में एक साथ BJP में जाते हैं तो बंगाल की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
वहीं बाकी तीन सांसदों का फैसला भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। वे NCPI के साथ रहते हैं, किसी अन्य राजनीतिक विकल्प की तरफ जाते हैं या बाद में BJP में शामिल होते हैं, इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों का खेमा एक बार फिर राजनीतिक सुर्खियों में है। **17 सांसदों के BJP में शामिल होने की बात अभी जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया का दावा है और इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि बाकी है।** ऐसे में दुर्गा पूजा के आसपास होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम से ही साफ होगा कि 20 सांसदों का यह समूह एकजुट रहता है या वास्तव में अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर आगे बढ़ता है।
17 सांसदों के BJP में जाने का दावा 14 सितंबर की रिपोर्ट में सामने आया है, जबकि तीन सांसदों के अलग रहने की ठोस वजह अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई है।
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