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पश्चिम बंगाल
यूनिवर्सिटी में बाहरी लोगों की नो-एंट्री: जनहित याचिका पर हाईकोर्ट से गुहार
Tara Tandi
14 Sept 2026 4:05 PM IST

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कोलकाता: सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच के सामने एक याचिका दायर की गई। इसमें एक जनहित याचिका (PIL) पर तुरंत सुनवाई की मांग की गई है, जिसमें पश्चिम बंगाल के सभी विश्वविद्यालयों के कैंपस में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई है।
इसी मुद्दे पर एक PIL पहले से ही कलकत्ता हाई कोर्ट में लंबित है। अब, जस्टिस अरिजीत बनर्जी और जस्टिस रीतोब्रतो कुमार मित्रा की डिवीज़न बेंच के सामने उसी PIL पर तुरंत सुनवाई के लिए एक नई याचिका दायर की गई है।
इस PIL में राज्य के अलग-अलग विश्वविद्यालयों के कैंपस में विभिन्न छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच हाल ही में हुई झड़पों की घटनाओं का ज़िक्र किया गया है।
कोर्ट के सूत्रों के अनुसार, यह PIL 16 सितंबर को चीफ जस्टिस रवींद्र विट्ठलराव घुगे और जस्टिस तापब्रत चक्रवर्ती की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आने वाली है।
यह घटनाक्रम दक्षिण कोलकाता की जादवपुर यूनिवर्सिटी में हाल ही में हुए तनाव के बाद सामने आया है, जहाँ CPI(M) के छात्र संगठन 'स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया' (SFI) और 'अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद' (ABVP) के कार्यकर्ताओं के बीच दो बार झड़पें हुई थीं।
PIL में याचिकाकर्ता ने न केवल जादवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस में, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल के सभी विश्वविद्यालयों के कैंपस में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका में तर्क दिया गया है कि बाहरी लोगों की मौजूदगी और गतिविधियाँ अक्सर शैक्षणिक माहौल को खराब करती हैं और शिक्षण संस्थानों के सामान्य कामकाज पर असर डालती हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि बाहरी लोगों का बेरोकटोक प्रवेश, खासकर जादवपुर यूनिवर्सिटी में, लंबे समय से चिंता का विषय रहा है और इससे अक्सर छात्रों को परेशानी होती है। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि PIL दायर होने के बाद भी अन्य विश्वविद्यालयों के कैंपस से विरोधी छात्र समूहों के बीच झड़पों की खबरें आती रही हैं।
इन घटनाओं का हवाला देते हुए, याचिकाकर्ता ने मामले पर तुरंत सुनवाई की मांग की है और तर्क दिया है कि राज्य भर के विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक माहौल को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप ज़रूरी है।
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