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पश्चिम बंगाल: मुर्शिदाबाद जिले में शुक्रवार को हुए दर्दनाक रेल हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। इस हादसे में चार स्कूली बच्चों और एक साइकिल सवार की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। हादसे की भयावहता के बीच दूसरी कक्षा की छात्रा श्रेया दत्त की कहानी सामने आई है, जिसकी जान सिर्फ इसलिए बच गई क्योंकि उस दिन उसकी तबीयत खराब थी और वह स्कूल नहीं गई थी।
श्रेया रोजाना जिस पूल कार से स्कूल जाती थी, उसी वाहन को ट्रेन ने टक्कर मार दी थी। हादसे के वक्त पूल कार में सात स्कूली बच्चे सवार थे। अगर श्रेया उस दिन भी सामान्य दिनों की तरह स्कूल जाने के लिए घर से निकलती, तो वह भी इस दर्दनाक हादसे की शिकार हो सकती थी।
श्रेया की मां ने बताया कि घटना वाले दिन बेटी की तबीयत ठीक नहीं थी। उसे बुखार और कमजोरी महसूस हो रही थी, इसलिए उन्होंने उसे स्कूल भेजने का फैसला नहीं लिया। उस समय उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस पूल कार से उनकी बेटी रोजाना सफर करती है, वह कुछ ही समय बाद इतनी बड़ी दुर्घटना का शिकार हो जाएगी।
मां ने कहा कि बीमारी के कारण बेटी का घर पर रहना परिवार के लिए चिंता की बात थी, लेकिन वही बीमारी उसकी जिंदगी बचाने वाली साबित हुई। हादसे की खबर मिलने के बाद परिवार के लोगों को जब पता चला कि जिस पूल कार से श्रेया जाती थी, वह दुर्घटनाग्रस्त हो गई है तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
हादसे में मारे गए बच्चों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि स्कूल जाने वाले बच्चे रोज इसी रास्ते से गुजरते थे और पूल कार उनके लिए आम सफर का साधन थी। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और रेलवे की लापरवाही को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए गेटमैन अनूप कर्मकार ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए हादसे की जिम्मेदारी स्टेशन मास्टर पर डाली है। गेटमैन का कहना है कि करुणासुबर्ण स्टेशन के स्टेशन मास्टर ने डाउन लाइन से आने वाली ट्रेन की जानकारी उन्हें समय पर नहीं दी थी, जिसके कारण रेलवे फाटक बंद नहीं किया जा सका और दुर्घटना हो गई।
अनूप कर्मकार ने अपनी सफाई में कहा कि सामान्य तौर पर अप लाइन से ट्रेन गुजरने की सूचना स्टेशन मास्टर फोन के माध्यम से देते थे, ताकि वह समय रहते रेलवे फाटक बंद कर सकें। उनका दावा है कि घटना वाले दिन अप लाइन की ट्रेन की जानकारी तो दी गई, लेकिन डाउन लाइन से आने वाली ट्रेन के बारे में कोई सूचना नहीं मिली।
रेल हादसे के बाद रेलवे प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हादसे के पीछे वास्तविक कारण क्या था और किस स्तर पर लापरवाही हुई। स्थानीय लोगों ने भी रेलवे क्रॉसिंग की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।
मुर्शिदाबाद हादसे ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, श्रेया दत्त की कहानी यह दिखाती है कि कई बार छोटी सी परिस्थिति भी किसी की जिंदगी बचाने वाली साबित हो सकती है। एक दिन की बीमारी ने जहां परिवार को चिंता में डाला, वहीं उसी वजह से श्रेया एक बड़े हादसे से सुरक्षित बच गई।





