पश्चिम बंगाल

TMC टूट पर अभिषेक बनर्जी का पलटवार, बागियों से मांगा जवाब

Ratna Netam
18 July 2026 9:12 PM IST
TMC टूट पर अभिषेक बनर्जी का पलटवार, बागियों से मांगा जवाब
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Kolkata कोलकाता : पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने बागी नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि अगर वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में वापस लौट आते हैं तो वह अपने पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। अभिषेक बनर्जी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सांसद टीएमसी से अलग होकर दूसरे गुटों में शामिल हो चुके हैं।

अभिषेक बनर्जी ने बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग पार्टी छोड़कर अब उन पर संगठन को कमजोर करने का आरोप लगा रहे हैं, उन्हें पहले ममता बनर्जी के पास वापस आना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर बागी नेता वापस लौटते हैं और यह साबित हो जाता है कि पार्टी में चल रही टूट के पीछे उनकी भूमिका है, तो वह 24 घंटे के अंदर इस्तीफा देने को तैयार हैं।

अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि कई नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ समझौता कर लिया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पहले पार्टी छोड़ते हैं, फिर बागी गुट में शामिल होते हैं और उसके बाद अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों से बचने के लिए उन्हें निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं को जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

टीएमसी में बढ़ता बागी गुट

अभिषेक बनर्जी का यह बयान उस समय आया है, जब टीएमसी के कई विधायक और सांसद पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं। हाल के दिनों में कई बड़े नेताओं ने पार्टी से दूरी बना ली है और अलग-अलग राजनीतिक गुटों का समर्थन किया है।

टीएमसी से अलग होने वाले प्रमुख नेताओं में सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक का नाम शामिल है। इन नेताओं ने पार्टी के पदों से इस्तीफा देकर अलग राह पकड़ ली है। वहीं, कई अन्य सांसदों और नेताओं ने भी पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

बागी गुट में शामिल नेताओं का आरोप है कि पार्टी में फैसले लेने की प्रक्रिया केंद्रीकृत हो गई है और पुराने नेताओं की भूमिका लगातार कम होती जा रही है। कुछ नेताओं ने सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें पार्टी में बढ़ते असंतोष के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

मदन मित्रा ने भी उठाए सवाल

टीएमसी के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने भी हाल ही में संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने अभिषेक बनर्जी की नेतृत्व शैली को लेकर आलोचना की और आरोप लगाया कि पार्टी में फैसले कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया है।

इसके अलावा राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक जैसे नेताओं के पार्टी छोड़ने से टीएमसी को बड़ा झटका लगा है। इन नेताओं ने पार्टी से अलग होकर नई राजनीतिक दिशा चुनी है।

लोकसभा में भी बढ़ी मुश्किलें

टीएमसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती लोकसभा में बढ़ता बागी गुट है। काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले एक गुट ने कई सांसदों के समर्थन का दावा किया है। इस गुट के करीब 19 से 20 सांसदों के अलग होने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि यह गुट एनसीपीआई में विलय कर चुका है और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन कर सकता है।

इस घटनाक्रम ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के सामने बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। पार्टी जहां एक ओर संगठन को बचाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस टूट को लेकर लगातार हमला बोल रहा है।

अभिषेक बनर्जी के बयान से साफ है कि टीएमसी नेतृत्व अब बागियों के सामने झुकने के बजाय खुलकर मुकाबला करने की रणनीति अपना रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी से अलग हुए नेता वापस लौटते हैं या फिर बंगाल की राजनीति में एक नया समीकरण बनता है।

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