पश्चिम बंगाल

ममता बोलीं- पार्टी को कमजोर करने की कोशिश न करें

Saba Naaz
4 July 2026 8:30 PM IST
ममता बोलीं- पार्टी को कमजोर करने की कोशिश न करें
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पश्चिम बंगाल: राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे के बाद पार्टी में अंदरूनी तनाव और बढ़ गया है। इस घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने फेसबुक लाइव के जरिए सख्त प्रतिक्रिया दी और बागी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं वे जा सकते हैं, लेकिन टीएमसी को कमजोर करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा, “जिनको बीजेपी में जाना है, जाओ, लेकिन टीएमसी को तोड़ने की कोशिश मत करो।” उनका यह बयान पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और अंदरूनी बगावत को रोकने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी से इस्तीफा देते हुए आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के व्यवहार से उन्हें ठेस पहुंची है। इसके बाद टीएमसी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा। सूत्रों के अनुसार, 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को भारी नुकसान होने के बाद टीएमसी में विभाजन की स्थिति बन गई है। रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी के भीतर कई विधायक अलग गुट बनाकर सक्रिय हो गए हैं, जिससे संगठनात्मक संकट गहराता जा रहा है।

वहीं, चुनाव परिणामों के बाद पार्टी में बगावत की स्थिति और तेज हो गई है। एक गुट ने नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए खुद को असली टीएमसी बताना शुरू कर दिया है। इस गुट ने पार्टी संरचना और नेतृत्व पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच चुनाव आयोग ने टीएमसी के दोनों गुटों से जवाब मांगा है। आयोग ने 6 जुलाई तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि दोनों पक्ष पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और अन्य संसाधनों पर दावा कर रहे हैं।

इस राजनीतिक विवाद पर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे टीएमसी का आंतरिक मामला बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि इस मामले का समाधान कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बार फिर अस्थिर कर दिया है। पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष आने वाले समय में बड़े राजनीतिक बदलावों का संकेत दे सकता है।

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