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TMC में कलह तेज, कल्याण बनर्जी ने अभिषेक पर हमला; ममता करें निर्णायक निर्णय

West Bengal वेस्ट बंगाल: पिछले 15 सालों से पश्चिम बंगाल की राजनीति में अजेय रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुरुवार को अंदरूनी कलह का सामना कर रही है। लगातार तीन विधानसभा चुनावों में जीत और चार लोकसभा चुनावों में TMC को सबसे बड़ी पार्टी बनाने की उपलब्धियों के बावजूद, पार्टी के भीतर तनाव और विवाद गहराने लगे हैं।
पार्टी की सीनियर नेता ममता बनर्जी के सामने गुरुवार को एक चुनौती खड़ी हुई जब पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने सांसद अभिषेक बनर्जी पर तीखे आरोप लगाए। कल्याण ने कहा कि अभिषेक का अहंकारी व्यवहार पार्टी के लिए खतरनाक साबित हो रहा है और इस कारण TMC के अस्तित्व पर संकट बढ़ गया है।
ममता बनर्जी ने इस विवाद पर बयान जारी करते हुए कहा, "यह मेरे लिए बहुत शर्म की बात है। उनके अहंकारी व्यवहार ने पार्टी को बर्बाद कर दिया है। उन्हें यह समझना चाहिए कि वे हर दिन राजा की तरह व्यवहार नहीं कर सकते।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभिषेक के व्यवहार के कारण पार्टी के कई कार्यों में बाधा आ रही है।
कल्याण बनर्जी ने पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी के वकील के पद से हटाए जाने की खबर पर गहरी नाराजगी जताई। सूत्रों के अनुसार, अभिषेक पर फर्जी हस्ताक्षरों के मामले में आपराधिक जांच भी चल रही है। यह मामला पार्टी में अंदरूनी असंतोष और विवाद को और बढ़ा रहा है।
ममता बनर्जी ने साफ़ कर दिया है कि अब उन्हें यह तय करना होगा कि पार्टी की कमान कल्याण बनर्जी संभालेंगे या अभिषेक बनर्जी। उन्होंने कल्याण और अभिषेक दोनों के बीच निर्णय लेने की ज़रूरत पर जोर दिया। ममता ने चेतावनी दी है कि अगर अभिषेक के बिना पार्टी नहीं चल सकती, तो वे खुद इसमें नहीं रहेंगी।
पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद TMC की मजबूती और ममता बनर्जी की पकड़ के लिए चुनौती साबित हो सकता है। पिछले लंबे समय तक पार्टी की असाधारण सफलता ने ममता की सत्ता को अडिग रखा, लेकिन अब अंदरूनी कलह ने पार्टी की छवि पर सवाल खड़ा कर दिया है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कल्याण बनर्जी का इस तरह सामने आना और अभिषेक पर आरोप लगाना संकेत है कि TMC के भीतर सत्ता संघर्ष और प्राथमिकताओं को लेकर गंभीर मतभेद हैं। इसके साथ ही, पार्टी के चुनावी रणनीति और भविष्य की योजनाओं पर भी असर पड़ने की संभावना है।
वर्तमान विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC के लिए एक और चुनौती सामने आ गई है। ममता बनर्जी की अगुवाई और पार्टी की एकजुटता अब यह तय करेगी कि आगामी राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी अपनी स्थिति बनाए रखेगी या अंदरूनी कलह के कारण कमजोर पड़ जाएगी।





