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पश्चिम बंगाल
दुर्गापूजा पास घोटाले में पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन गिरफ्तार, करोड़ों की हेराफेरी का आरोप
Rajeshwari Nishad
28 Oct 2026 6:43 PM IST

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के पास की बिक्री से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। राज्य के पूर्व सूचना एवं संस्कृति राज्य मंत्री और चंदननगर के पूर्व तृणमूल कांग्रेस विधायक इंद्रनील सेन को बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। सेन साल्टलेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कार्यालय में पूछताछ के लिए पहुंचे थे। पूछताछ के बाद जैसे ही वह कार्यालय से बाहर निकले, वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उन्हें अपनी गाड़ी में बैठा लिया। इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
इंद्रनील सेन पर दुर्गा पूजा के दौरान विशेष दर्शन और प्रिव्यू शो के नाम पर महंगे पास बेचकर वित्तीय अनियमितताएं करने के आरोप हैं। इस मामले की जांच कोलकाता पुलिस के साथ प्रवर्तन निदेशालय भी कर रहा है। पुलिस का दावा है कि बार-बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद सेन ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया।
ED कार्यालय के बाहर पहले से मौजूद थी पुलिस
जानकारी के मुताबिक, बुधवार दोपहर इंद्रनील सेन निर्धारित समय पर ईडी के कार्यालय पहुंचे थे। वह कथित दुर्गा पूजा पास घोटाले से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन के संबंध में पूछताछ का सामना कर रहे थे।इसी दौरान सीजीओ कॉम्प्लेक्स के बाहर कोलकाता पुलिस के कई अधिकारी मौजूद थे। परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई थी।जैसे ही सेन पूछताछ पूरी होने के बाद बाहर आए, पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया और अपनी गाड़ी में बैठाकर ले गए। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की खबर सामने आई।पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वह लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और ममता बनर्जी सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
क्या है दुर्गा पूजा पास घोटाला?
यह पूरा मामला कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान आयोजित होने वाले विशेष पंडाल दर्शन और प्रिव्यू कार्यक्रमों से जुड़ा है।आरोप है कि दुर्गा पूजा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान का इस्तेमाल कर विशेष प्रवेश पास बेचे गए। इन पास के जरिए लोगों को चुनिंदा पूजा पंडालों का विशेष दर्शन कराने की सुविधा देने का दावा किया गया था।जांच एजेंसियों के मुताबिक, इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी मधुचंदा सेन से जुड़ी संस्था 'मासआर्ट' (massArt) इस गतिविधि से संबंधित थी।संस्था पर आरोप है कि उसने यूनेस्को के नाम और लोगो का इस्तेमाल करते हुए अपने कार्यक्रमों को अंतरराष्ट्रीय संस्था से जुड़ा बताया।शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस तरह लोगों को भ्रमित करके महंगे पास बेचे गए और बड़ी रकम जुटाई गई। हालांकि, इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
50 से 60 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं की जांच
इस मामले में जांच एजेंसियों को करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी होने का संदेह है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईडी करीब 50 से 60 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रहा है।आरोप है कि दुर्गा पूजा के विशेष कार्यक्रमों और पास की बिक्री के माध्यम से बड़ी रकम जुटाई गई। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह पैसा किन खातों में जमा हुआ और बाद में कहां इस्तेमाल किया गया।ईडी उन लोगों और संस्थाओं की भूमिका भी जांच रहा है, जो पास की बिक्री, कार्यक्रमों के आयोजन और रकम के लेन-देन से जुड़े हुए थे।जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि क्या जुटाई गई राशि का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया गया था। फिलहाल ये जांच के विषय हैं और इन्हें प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
2,000 से 4,000 रुपये तक बेचे गए थे पास
जांच के दौरान सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, दुर्गा पूजा के प्रिव्यू कार्यक्रमों के लिए कई श्रेणियों में पास उपलब्ध कराए गए थे।इनमें प्लेटिनम फैमिली, प्लेटिनम कपल, प्लेटिनम सिंगल, गोल्ड कपल और गोल्ड सिंगल जैसी श्रेणियां शामिल थीं।कथित तौर पर इन पास की कीमत 2,000 रुपये से लेकर 4,000 रुपये तक रखी गई थी।प्लेटिनम फैमिली पास की कीमत 4,000 रुपये, प्लेटिनम कपल पास की 3,500 रुपये और प्लेटिनम सिंगल पास की कीमत 2,500 रुपये बताई गई थी।इसी तरह गोल्ड श्रेणी के पास भी अलग-अलग कीमतों पर उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कुल कितने पास बेचे गए और उनसे कितनी राशि एकत्र हुई।
सितंबर में भी ED ने कई ठिकानों पर मारे थे छापे
दुर्गा पूजा पास मामले में प्रवर्तन निदेशालय पहले भी बड़ी कार्रवाई कर चुका है।29 सितंबर 2026 को ईडी ने इंद्रनील सेन और उनसे जुड़े अन्य लोगों के कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था।इस दौरान जांच एजेंसी ने विभिन्न दस्तावेजों और वित्तीय गतिविधियों से संबंधित जानकारियां जुटाईं।इसके अगले दिन, 30 सितंबर को इंद्रनील सेन ईडी कार्यालय में पेश हुए थे, जहां उनसे कई घंटों तक पूछताछ की गई थी।जांच अधिकारियों ने उनसे मासआर्ट संस्था की गतिविधियों, दुर्गा पूजा के पास, यूनेस्को के नाम के इस्तेमाल और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सवाल पूछे थे।इसके बाद भी जांच एजेंसी लगातार मामले की पड़ताल कर रही थी।
यूनेस्को के नाम के इस्तेमाल पर उठे सवाल
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यूनेस्को के नाम और उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के कथित इस्तेमाल से जुड़ा है।दुर्गा पूजा को यूनेस्को द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की मान्यता मिलने के बाद इसकी लोकप्रियता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी थी।आरोप है कि इसी मान्यता का लाभ उठाते हुए मासआर्ट ने अपने कार्यक्रमों को यूनेस्को से जुड़ा हुआ दिखाया।जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या संस्था के पास यूनेस्को के नाम या लोगो का इस्तेमाल करने की आधिकारिक अनुमति थी।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संस्था ने आधिकारिक साझेदारी का भ्रामक दावा करके लोगों से पैसे वसूले।
तृणमूल कांग्रेस के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें
पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन की गिरफ्तारी को पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।सेन चंदननगर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने ममता बनर्जी सरकार में सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों से जुड़ी जिम्मेदारी भी संभाली थी।उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब राज्य में विभिन्न कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।इस मामले में पूर्व मंत्री सुजीत बोस का नाम भी सामने आ चुका है। ऐसे में सेन की गिरफ्तारी के बाद जांच के राजनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चा बढ़ गई है।
आगे की जांच पर टिकी निगाहें
इंद्रनील सेन की गिरफ्तारी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच एजेंसियों को कथित घोटाले में क्या नए सबूत मिलते हैं।पुलिस और ईडी की जांच में पास की बिक्री से जुटाई गई रकम, संबंधित संस्थाओं के बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।इस मामले में यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित अनियमितताओं में किन-किन लोगों की भूमिका थी।फिलहाल इंद्रनील सेन की गिरफ्तारी के साथ दुर्गा पूजा पास कांड एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
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