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चीन पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात होंगे नए सैन्य वाहन जानिए BvS10 सिंधु की खासियत

Ratna Netam
28 Oct 2026 6:27 PM IST
चीन पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात होंगे नए सैन्य वाहन जानिए BvS10 सिंधु की खासियत
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नई दिल्ली : 28 अक्टूबर 2026। भारतीय सेना की सामरिक और परिचालन क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। देश की प्रमुख इंजीनियरिंग और रक्षा उपकरण निर्माता कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) भारतीय सेना के लिए अत्याधुनिक BvS10 सिंधु ऑल-टेरेन बख्तरबंद वाहनों का निर्माण करेगी। ये विशेष वाहन बर्फीले पहाड़ों, रेगिस्तानी इलाकों, दलदली जमीन और पानी से भरे क्षेत्रों में भी काम करने में सक्षम हैं। इनकी संभावित तैनाती चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर की जा सकती है। इससे दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों की आवाजाही, रसद आपूर्ति और आपातकालीन अभियानों में मदद मिलेगी।L&T और ब्रिटेन की रक्षा कंपनी BAE Systems ने इस परियोजना के लिए साझेदारी की है। भारतीय सेना के साथ खरीद समझौते की घोषणा 19 नवंबर 2025 को हुई थी। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक घोषणाओं में उत्पादन शुरू होने की सटीक तारीख की पुष्टि नहीं मिली है।
गुजरात के हजीरा में बनाए जाएंगे अत्याधुनिक सैन्य वाहन
BvS10 सिंधु वाहनों का निर्माण गुजरात के हजीरा स्थित L&T के आर्मर्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स में किया जाना है। इस परियोजना में BAE Systems Hägglunds तकनीकी सहायता, डिजाइन और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।BvS10 सिंधु मूल रूप से स्वीडन में विकसित BvS10 सैन्य वाहन का भारतीय संस्करण है। इसे भारतीय सेना की जरूरतों और देश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार विकसित किया गया है।कंपनी के अनुसार, इन वाहनों को ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों, रेगिस्तानी इलाकों और कठिन मौसम में काम करने के लिए तैयार किया गया है।
चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर तैनाती की तैयारी
भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर सेना को अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ, अत्यधिक ठंड और दुर्गम रास्ते चुनौती पैदा करते हैं। वहीं राजस्थान और गुजरात से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में रेतीली जमीन और दलदली इलाकों के कारण सैन्य वाहनों की आवाजाही कठिन हो सकती है।रक्षा क्षेत्र की विशेषज्ञ पत्रिका Janes के अनुसार, BvS10 सिंधु वाहनों को भारतीय सेना के उत्तरी और पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात किए जाने की संभावना है।इन वाहनों की सहायता से सैनिकों और आवश्यक सैन्य सामग्री को कठिन क्षेत्रों तक पहुंचाना अपेक्षाकृत आसान हो सकेगा। हालांकि, सेना की ओर से इनकी वास्तविक तैनाती के सभी स्थानों की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है।
बर्फ, पहाड़ और पानी में भी चलने की क्षमता
BvS10 सिंधु एक विशेष प्रकार का आर्टिकुलेटेड ऑल-टेरेन व्हीकल है। इसकी संरचना सामान्य सैन्य वाहनों से अलग है।इसमें दो आपस में जुड़े हिस्से होते हैं, जिनकी सहायता से वाहन ऊबड़-खाबड़ जमीन और संकरे रास्तों पर बेहतर ढंग से मुड़ सकता है। पहियों के बजाय इसमें ट्रैक सिस्टम का इस्तेमाल होता है, जिससे कठिन सतहों पर पकड़ बनाए रखने में मदद मिलती है।इसकी प्रमुख विशेषता यह भी है कि यह बर्फ, कीचड़, रेतीले क्षेत्रों और ऊंचे पर्वतीय रास्तों में आवाजाही कर सकता है।वाहन में पानी में चलने की क्षमता भी मौजूद है। इससे बाढ़ प्रभावित इलाकों या पानी से भरे रास्तों में इसकी उपयोगिता बढ़ जाती है।
सैनिकों के साथ हथियार और जरूरी सामान भी ले जा सकेंगे
BvS10 सिंधु वाहनों का इस्तेमाल केवल सैनिकों के परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा। इन्हें अलग-अलग सैन्य आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जा सकता है।इनका उपयोग सैनिकों की आवाजाही, संचार एवं कमांड सेंटर, एंबुलेंस, रसद आपूर्ति, मरम्मत और रिकवरी जैसे कार्यों में किया जा सकता है।L&T के अनुसार, वाहन के पिछले हिस्से को विभिन्न सैन्य जरूरतों के अनुसार बदला जा सकता है। इसमें काउंटर-ड्रोन और मोर्टार प्रणाली जैसे विकल्पों को भी शामिल किया जा सकता है।इससे भारतीय सेना को एक ही वाहन प्लेटफॉर्म का उपयोग कई अलग-अलग भूमिकाओं में करने की सुविधा मिलेगी।
शुरुआती चरण में 18 वाहनों की खरीद की जानकारी
आधिकारिक घोषणा में सौदे की कुल कीमत और वाहनों की संख्या सार्वजनिक नहीं की गई थी।हालांकि, रक्षा क्षेत्र की रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती अनुबंध में 18 BvS10 सिंधु वाहन शामिल होने की जानकारी है। इनमें से 12 वाहनों को लद्दाख और छह को गुजरात में तैनात करने की योजना बताई गई है।रिपोर्टों के अनुसार, समझौते में कम से कम 60 प्रतिशत भारतीय सामग्री के उपयोग की शर्त भी शामिल है।वाहनों की आपूर्ति शुरू करने के लिए अनुबंध के बाद लगभग 24 महीने की अवधि का उल्लेख किया गया है। वास्तविक आपूर्ति की स्थिति के संबंध में नई आधिकारिक पुष्टि आवश्यक होगी।
मेक इन इंडिया अभियान को मिलेगी मजबूती
BvS10 सिंधु परियोजना को भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है।इस समझौते के माध्यम से विदेशी तकनीक और भारतीय विनिर्माण क्षमताओं का संयुक्त उपयोग किया जाएगा।L&T के प्रिसिजन इंजीनियरिंग एंड सिस्टम्स विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरुण रामचंदानी ने नवंबर 2025 में कहा था कि यह समझौता मेक इन इंडिया पहल के तहत भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।कंपनी के अनुसार, इस परियोजना में वाहनों के निर्माण के साथ शुरुआती तैनाती, रखरखाव और उनके पूरे सेवा जीवन के दौरान तकनीकी सहायता की व्यवस्था भी शामिल है।
कई देशों की सेनाएं पहले से कर रही हैं इस्तेमाल
BvS10 प्लेटफॉर्म का उपयोग दुनिया के कई देशों की सेनाओं में पहले से किया जा रहा है।इनमें ब्रिटेन, फ्रांस, नीदरलैंड, स्वीडन, ऑस्ट्रिया और यूक्रेन शामिल हैं। जर्मनी की सेना ने भी इस श्रेणी के वाहन ऑर्डर किए हैं।भारत के लिए तैयार सिंधु संस्करण में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बदलाव किए गए हैं। कंपनी के अनुसार, इस वाहन ने समुद्र तल के आसपास और ऊंचाई वाले इलाकों में कठिन परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।
भारतीय सेना को मिलेगा रणनीतिक फायदा
भारत की सीमाओं पर सैन्य तैयारियों में तेज आवाजाही और समय पर रसद आपूर्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सामान्य वाहनों की सीमाएं कई बार सैन्य अभियानों को प्रभावित कर सकती हैं।BvS10 सिंधु जैसे विशेष वाहन ऐसे इलाकों में सैनिकों और उपकरणों को पहुंचाने के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।इनकी मॉड्यूलर बनावट से सेना जरूरत के अनुसार अलग-अलग कार्यों के लिए वाहनों का इस्तेमाल कर सकेगी।BvS10 सिंधु परियोजना भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इन वाहनों की आपूर्ति और तैनाती के बाद ही इनके वास्तविक परिचालन योगदान का आकलन किया जा सकेगा।
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