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क्रिप्टो और चिटफंड घोटाले पर ED सख्त, 5 जिलों में छापे

कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार सुबह पश्चिम बंगाल के पांच जिलों में एक साथ बड़ी कार्रवाई की। यह छापेमारी करोड़ों रुपये की निवेश धोखाधड़ी, क्रिप्टोकरेंसी निवेश, चिटफंड और फर्जी शेयर बाजार प्रशिक्षण के जरिए कथित ठगी के मामले में की गई। जांच एजेंसी को आशंका है कि ठगी से जुटाई गई रकम को विदेश भेजा गया हो सकता है। ED की अलग-अलग टीमों ने पश्चिम बर्धमान के अंडाल, हावड़ा और नदिया जिले के कालीनारायणपुर समेत कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान भी तैनात रहे। एजेंसी की जांच निवेशकों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की रकम जुटाने वाली कंपनियों और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ चल रही है।
मामला कोलकाता के फेयरली प्लेस इलाके में स्थित जराडोबिट एंड जराडोबिट ई-शॉपर्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी से जुड़ा बताया जा रहा है। पिछले वर्ष मई में कालीघाट निवासी एक महिला ने हेयर स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंपनी ने निवेशकों को हर महीने चार प्रतिशत मुनाफे का लालच देकर करीब 22 करोड़ रुपये जुटाए। शिकायत के अनुसार, कंपनी ने 25 महीने के निवेश पर आकर्षक रिटर्न देने का वादा किया था, लेकिन बाद में निवेशकों को कथित रूप से नुकसान उठाना पड़ा। इस मामले में कंपनी के दो निदेशकों के नाम भी सामने आए थे। इसी शिकायत और आगे की जांच के आधार पर ED ने कार्रवाई शुरू की।
जांच के दौरान ED की टीम दुर्गापुर के अंडाल स्थित श्रीपल्ली सुभाषनगर रिक्शाडांगा इलाके में ईसीएल के सेवानिवृत्त कर्मचारी दिलीप मल्लिक के घर पहुंची। आरोप है कि दिलीप मल्लिक और उनके बेटे दिगंत मल्लिक ने फेयरली प्लेस में कार्यालय खोलकर क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की। जांच एजेंसी को यह भी जानकारी मिली है कि दिगंत मल्लिक सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए आकर्षित करता था। कथित तौर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर अधिक मुनाफे का लालच देकर निवेशकों से संपर्क किया जाता था।
ED अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में ठगी की रकम विदेश भेजे जाने की भी जांच की जा रही है। एजेंसी को संदेह है कि आरोपियों के संबंध दुबई के कुछ कारोबारियों से हो सकते हैं। दिगंत मल्लिक पहले भी गिरफ्तार हो चुका है और बाद में उसे जमानत मिल गई थी। हाल में उसके बैंक खातों में बड़े पैमाने पर लेनदेन की जानकारी मिलने के बाद ED ने फिर से कार्रवाई की। इसके अलावा हावड़ा के कुचिल सरकार लेन इलाके में रहने वाले सौरभ चट्टोपाध्याय के घर भी ED की टीम ने तलाशी ली। जांच एजेंसी के मुताबिक, सौरभ का नाम कई चिटफंड कंपनियों से जुड़ा हुआ है और वह शेयर बाजार से भी संबंधित गतिविधियों में शामिल रहा है। प्रारंभिक जांच में उसका नाम फेयरली प्लेस स्थित कंपनी के निदेशकों से भी जुड़ा होने की बात सामने आई है।
नदिया जिले के रनाघाट के पास कालीनारायणपुर में कारोबारी शुभ्रकांति नाग उर्फ बाबाई नाग के ठिकाने पर भी ED ने छापेमारी की। आरोप है कि शुभ्रकांति नाग ने ‘स्टॉक गुरुकुल’ नाम से शेयर बाजार प्रशिक्षण और निवेश के नाम पर फर्जी योजना चलाकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की। स्थानीय लोगों के अनुसार, शुभ्रकांति पिछले डेढ़ साल से इलाके में नजर नहीं आया है। ED की टीम जब उसके घर पहुंची तो मकान बंद मिला। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और निवेशकों से जुटाई गई रकम कहां-कहां भेजी गई।
फिलहाल ED ने छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों या अन्य सामानों की आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। एजेंसी सभी ठिकानों से मिले रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।





