पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की चर्चा तेज पश्चिम बंग पर जोर

Ratna Netam
7 Oct 2026 2:27 PM IST
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की चर्चा तेज पश्चिम बंग  पर जोर
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल के नाम को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बुधवार को संकेत दिया कि राज्य का नाम बदलकर **‘पश्चिम बंग’ (Paschim Banga)** किया जा सकता है। उनका कहना है कि इस नाम के जरिए राज्य की ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखने की कोशिश की जाएगी।पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब उनसे राज्य के नाम को लेकर सवाल किया गया तो समिक भट्टाचार्य ने कहा, **“नाम ‘पश्चिम बंग’ ही होगा।”** इससे पहले सोमवार को भी उन्होंने कहा था कि ‘बांग्ला’ या ‘वेस्ट बंगाल’ जैसे वैकल्पिक नामों के इस्तेमाल को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा और ‘पश्चिम बंग’ नाम को आधिकारिक रूप देने के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा था कि राज्य सरकार विधानसभा में इस संबंध में एक विधेयक ला सकती है। उन्होंने इस प्रस्ताव को राज्य के इतिहास और पहचान से जोड़ते हुए कहा था कि नाम बदलने की पहल का उद्देश्य बंगाल की ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखना है। रिपोर्टों के अनुसार, इस संबंध में विधानसभा सत्र में प्रस्ताव पेश किए जाने की संभावना जताई गई है।राज्य के नाम परिवर्तन को लेकर पश्चिम बंगाल में लंबे समय से बहस होती रही है। अलग-अलग समय पर ‘बांग्ला’, ‘बंगाल’ और ‘पश्चिम बंग’ जैसे नामों पर चर्चा सामने आती रही है। अब समिक भट्टाचार्य के ताजा बयान के बाद ‘पश्चिम बंग’ नाम एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
भट्टाचार्य के मुताबिक, नए नाम को राज्य की ऐतिहासिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आगे चलकर सभी भाषाओं में राज्य के लिए ‘पश्चिम बंग’ नाम इस्तेमाल किए जाने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इससे अंग्रेजी में इस्तेमाल होने वाले ‘West Bengal’ नाम और अन्य वैकल्पिक रूपों की जगह एक समान नाम अपनाने का रास्ता तैयार हो सकता है।यह मुद्दा उस समय भी चर्चा में आया जब वाराणसी में प्रस्तावित ‘पश्चिम बंग भवन’ से जुड़े सवाल पर भट्टाचार्य ने प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए ‘पश्चिम बंग’ नाम को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रस्तावित भवन को बंगाल की संस्कृति से जुड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की भी योजना बताई गई है।
राज्य का नाम बदलने के लिए केवल राजनीतिक घोषणा पर्याप्त नहीं होती। इसके लिए संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया से गुजरना होता है। पहले राज्य स्तर पर प्रस्ताव या विधेयक को आगे बढ़ाया जाता है और उसके बाद केंद्र स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाती है। ऐसे में समिक भट्टाचार्य के बयान के बाद अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि राज्य सरकार कब औपचारिक रूप से इससे संबंधित विधेयक विधानसभा में पेश करती है।नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को ऐतिहासिक पहचान से जोड़ते हुए भाजपा की ओर से कहा जा रहा है कि ‘पश्चिम बंग’ नाम राज्य की पारंपरिक और सांस्कृतिक पहचान को बेहतर ढंग से दर्शाता है। भट्टाचार्य पहले भी इस मुद्दे को सार्वजनिक मंचों पर उठा चुके हैं। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने राज्य का नाम सभी भाषाओं में एक समान रखने की बात भी कही है।
पश्चिम बंगाल के नाम को लेकर इससे पहले भी कई प्रस्ताव सामने आ चुके हैं। पूर्ववर्ती सरकार के समय भी राज्य का नाम बदलने की कोशिश हुई थी। उस समय अलग-अलग भाषाओं के लिए अलग नामों तथा बाद में ‘बांग्ला’ नाम का प्रस्ताव चर्चा में रहा था। लेकिन यह प्रक्रिया अंतिम मंजूरी तक नहीं पहुंच सकी थी। अब भाजपा नेतृत्व की ओर से ‘पश्चिम बंग’ नाम को आगे बढ़ाने की बात कही जा रही है।समिक भट्टाचार्य के बुधवार के बयान से साफ संकेत मिला है कि ‘पश्चिम बंग’ नाम को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट है। हालांकि राज्य का नाम आधिकारिक रूप से तभी बदलेगा जब इससे जुड़ी पूरी संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया पूरी होगी।फिलहाल यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में है। अब सबसे महत्वपूर्ण कदम विधानसभा में प्रस्तावित विधेयक का पेश होना होगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ‘पश्चिम बंगाल’ से ‘पश्चिम बंग’ तक नाम परिवर्तन की प्रक्रिया किस रूप में आगे बढ़ती है।
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