पश्चिम बंगाल

उपचुनाव में हासीरानी रथ और शाखारव सरकार पर BJP का भरोसा

Ratna Netam
15 Sept 2026 4:27 PM IST
उपचुनाव में हासीरानी रथ और शाखारव सरकार पर BJP का भरोसा
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण **नंदीग्राम विधानसभा सीट से भाजपा ने हासीरानी रथ को चुनाव मैदान में उतारा है।** हासीरानी रथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं। वहीं मुर्शिदाबाद जिले की **रेजीनगर विधानसभा सीट से शाखारव सरकार** को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
भाजपा की उम्मीदवार सूची में सबसे ज्यादा चर्चा नंदीग्राम से हासीरानी रथ के नाम को लेकर हो रही है। उनके बेटे चंद्रनाथ रथ लंबे समय तक शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी और निजी सहायक रहे थे। मई 2026 में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के कुछ समय बाद उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI कर रही है। ऐसे में उनकी मां को उसी नंदीग्राम से चुनाव मैदान में उतारने के फैसले को भाजपा का भावनात्मक और रणनीतिक दोनों तरह का दांव माना जा रहा है।
कौन हैं हासीरानी रथ?
हासीरानी रथ दिवंगत चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगियों में शामिल थे। विधानसभा चुनाव के बाद उनकी हत्या ने नंदीग्राम सहित पूरे राज्य में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी थी।
अब भाजपा ने उनकी मां हासीरानी को नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव का टिकट दिया है। उम्मीदवार घोषित होने से पहले ही उनका नाम संभावित दावेदारों में चल रहा था। भाजपा के स्थानीय नेता मेघनाथ पाल समेत कुछ अन्य नाम भी टिकट की दौड़ में बताए जा रहे थे, लेकिन आखिरकार पार्टी नेतृत्व ने हासीरानी रथ पर भरोसा जताया।
उम्मीदवारी की औपचारिक घोषणा से पहले हासीरानी ने स्थानीय मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना भी की। उन्होंने नंदीग्राम के लोगों के कल्याण के लिए काम करने की बात कही और शुभेंदु अधिकारी द्वारा क्षेत्र में किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया।
चंद्रनाथ रथ की हत्या बनी बड़ा मुद्दा
नंदीग्राम उपचुनाव में चंद्रनाथ रथ की हत्या भी चुनावी विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। वह शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक और करीबी सहयोगी थे।
रिपोर्टों के मुताबिक विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद मई में चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की जांच CBI कर रही है।
भाजपा ने अब उनकी मां को चुनाव मैदान में उतारकर इस घटना को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि हत्या के मामले की जांच जारी है, इसलिए इसके पीछे किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की भूमिका को जांच पूरी होने से पहले स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
हासीरानी की उम्मीदवारी को राजनीतिक विश्लेषणों में सहानुभूति और न्याय के मुद्दे से जोड़कर देखा जा रहा है।
नंदीग्राम क्यों है इतनी महत्वपूर्ण सीट?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में नंदीग्राम का नाम लंबे समय से बेहद महत्वपूर्ण रहा है। भूमि आंदोलन से लेकर पिछले कई विधानसभा चुनावों तक यह सीट राज्य की राजनीति का केंद्र रही है।
शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक पहचान भी नंदीग्राम से गहराई से जुड़ी हुई है। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह क्षेत्र भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की सीट बन चुका है।
2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से जीत हासिल की थी। इसके साथ उन्होंने एक और विधानसभा सीट से भी चुनाव जीता। नियमों के मुताबिक उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ी और इसी वजह से नंदीग्राम में उपचुनाव की जरूरत पड़ी।
अब भाजपा ने यहां किसी पुराने स्थापित नेता के बजाय दिवंगत सहयोगी की मां को टिकट देकर मुकाबले को अलग राजनीतिक रंग दे दिया है।
रेजीनगर से शाखारव सरकार पर भरोसा
नंदीग्राम के साथ भाजपा ने मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट के लिए भी उम्मीदवार घोषित किया है।
पार्टी ने यहां **शाखारव सरकार** पर भरोसा जताया है। रिपोर्टों के मुताबिक वह भाजपा के पूर्व मुर्शिदाबाद जिला अध्यक्ष रह चुके हैं और पार्टी संगठन में जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
रेजीनगर का चुनावी समीकरण नंदीग्राम से अलग है। यहां भाजपा को दूसरे राजनीतिक दलों और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मुकाबला करना होगा।
इस सीट पर भी बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।
दोनों सीटों पर क्यों हो रहे उपचुनाव?
नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव मौजूदा विधायकों द्वारा सीट छोड़ने के कारण हो रहे हैं।
2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी और हुमायूं कबीर ने दो-दो विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। संवैधानिक नियमों के मुताबिक कोई व्यक्ति एक समय में दो विधानसभा सीटों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। इसलिए दोनों नेताओं को एक-एक सीट छोड़नी पड़ी।
इसी वजह से नंदीग्राम और रेजीनगर की सीट खाली हुई और अब यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक **6 अक्टूबर 2026 को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना** होगी।
नंदीग्राम में भाजपा को बड़ी जीत का भरोसा
भाजपा की ओर से नंदीग्राम को लेकर काफी आत्मविश्वास दिखाया जा रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को दावा किया कि भाजपा इस उपचुनाव में बड़े अंतर से जीत हासिल करेगी।
उन्होंने 50 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत का दावा किया है। हालांकि यह भाजपा और मुख्यमंत्री का चुनावी दावा है, वास्तविक नतीजा मतगणना के बाद ही सामने आएगा।
हासीरानी रथ की उम्मीदवारी घोषित होने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं की नजर अब चुनाव प्रचार पर होगी। शुभेंदु अधिकारी के खुद प्रचार में प्रमुख भूमिका निभाने की संभावना है।
TMC में भी दिलचस्प राजनीतिक स्थिति
इस उपचुनाव को दिलचस्प बनाने वाला एक और बड़ा पहलू तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा विवाद है।
रिपोर्टों के मुताबिक ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दो अलग-अलग गुट खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं। दोनों पक्षों ने नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के लिए अपने-अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं। पार्टी के आरक्षित 'जोड़ाफूल' चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर भी विवाद है।
चुनाव आयोग से इस मामले में 17 सितंबर को अंतरिम फैसला आने की संभावना है। आयोग का निर्णय यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि आधिकारिक तौर पर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल कौन कर सकेगा।
इस विवाद का दोनों उपचुनावों के चुनावी समीकरण पर भी असर पड़ सकता है।
कांग्रेस के साथ समझौते की कोशिश भी चर्चा में
उपचुनाव से पहले विपक्षी दलों के बीच संभावित तालमेल को लेकर भी गतिविधियां तेज हुई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस की तरफ से कांग्रेस के सामने सीटों को लेकर एक प्रस्ताव रखा गया था। इसके तहत नंदीग्राम में कांग्रेस के समर्थन के बदले रेजीनगर में कांग्रेस से समर्थन की उम्मीद की गई थी।
लेकिन कांग्रेस ने इस तरह के समझौते में रुचि नहीं दिखाई।
इससे दोनों सीटों पर मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो सकता है। अलग-अलग दल अपने उम्मीदवारों के साथ मैदान में उतरते हैं तो वोटों का बंटवारा चुनाव परिणाम में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
हासीरानी के जरिए भाजपा का क्या है दांव?
हासीरानी रथ को टिकट देने के पीछे भाजपा की आधिकारिक वजह उम्मीदवार चयन है, लेकिन राजनीतिक तौर पर इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं।
पहला, हासीरानी का परिवार शुभेंदु अधिकारी से लंबे समय से जुड़ा रहा है। दूसरा, उनके बेटे चंद्रनाथ की हत्या का मामला अभी CBI जांच में है। तीसरा, नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक प्रभाव भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है।
ऐसे में पार्टी एक ऐसे चेहरे के साथ मैदान में उतरी है, जिसका स्थानीय और भावनात्मक दोनों तरह का जुड़ाव है।
लेकिन यह रणनीति मतदाताओं को कितना प्रभावित करती है, इसका जवाब चुनाव परिणाम से ही मिलेगा। उम्मीदवार के प्रति सहानुभूति, भाजपा का संगठन, विपक्ष की रणनीति और स्थानीय मुद्दे सभी मतदान पर असर डाल सकते हैं।
6 अक्टूबर को होगी बड़ी चुनावी परीक्षा
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के कुछ ही महीनों बाद हो रहे ये दोनों उपचुनाव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। खास तौर पर नंदीग्राम का परिणाम भाजपा और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के लिए प्रतिष्ठा से जुड़ा होगा।
भाजपा ने यहां **दिवंगत चंद्रनाथ रथ की मां हासीरानी रथ** को उम्मीदवार बनाकर बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। वहीं रेजीनगर में पार्टी ने संगठन से जुड़े पुराने चेहरे **शाखारव सरकार** को मैदान में उतारा है।
अब दोनों उम्मीदवार प्रचार अभियान में उतरेंगे। नंदीग्राम में चंद्रनाथ रथ की हत्या, स्थानीय विकास और राजनीतिक वर्चस्व जैसे मुद्दे चर्चा में रह सकते हैं, जबकि रेजीनगर में स्थानीय और दलगत समीकरण महत्वपूर्ण होंगे।
**6 अक्टूबर को मतदाता अपना फैसला ईवीएम में दर्ज करेंगे और 9 अक्टूबर को नतीजे बताएंगे कि भाजपा का हासीरानी रथ और शाखारव सरकार पर लगाया गया दांव कितना सफल रहा।
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