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पश्चिम बंगाल
बंगाल की हालत बेहद खराब उबरने में लगेगा वक्त शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान
Ratna Netam
7 Sept 2026 2:58 PM IST

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान कथित भ्रष्टाचार, राजस्व की हानि और सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याओं के कारण पश्चिम बंगाल की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई थी। मुख्यमंत्री ने राज्य की हालत को ‘दिवालिया जैसी’ बताते हुए कहा कि इसे पटरी पर लाने में समय लगेगा। उनके मुताबिक, आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए कम से कम एक साल का वक्त लग सकता है।
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब उनकी सरकार राज्य की वित्तीय स्थिति और लंबित देनदारियों को लेकर लगातार चर्चा में है। अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और राजस्व से जुड़े नुकसान ने राज्य की वित्तीय स्थिति को कमजोर किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार की कई योजनाओं से राज्य के पहले जुड़े नहीं होने के कारण भी आर्थिक संसाधनों पर असर पड़ा।
केंद्र की योजनाओं से जुड़ने का दावा
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार बनने के बाद पश्चिम बंगाल को केंद्र की सभी प्रमुख योजनाओं से जोड़ने की दिशा में काम किया गया है। उनका दावा है कि इससे राज्य को मिलने वाली राशि में वृद्धि होगी और आने वाले समय में आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार की प्राथमिकता राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ सरकारी खर्च को व्यवस्थित करना और लंबित भुगतान की समस्या से निपटना है।
उन्होंने संकेत दिया कि राज्य की वित्तीय स्थिति को तुरंत बदलना संभव नहीं है। इसके लिए प्रशासनिक सुधार, राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी और खर्च पर नियंत्रण जैसे कदमों को लगातार लागू करना होगा। सरकार का मानना है कि इन उपायों के परिणाम सामने आने में कुछ समय लगेगा।
हजारों करोड़ रुपये की देनदारियां
राज्य सरकार पर लंबित भुगतान और बकाया राशि को लेकर भी मुख्यमंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षकों, गैर-शिक्षक कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़े बकाया भत्तों के भुगतान के लिए करीब 12 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है। सरकार ने संकेत दिया है कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान एक साथ करना आसान नहीं होगा। इसके लिए चरणबद्ध तरीके और संबंधित समितियों के साथ समन्वय की जरूरत होगी।
सरकार के सामने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और कर्मचारियों से जुड़े भुगतान की जिम्मेदारी भी है। हाल में वृद्धावस्था पेंशन की बढ़ी हुई राशि लाभार्थियों को वितरित किए जाने के दौरान मुख्यमंत्री ने वित्तीय चुनौतियों के बीच कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने की बात कही।
मिलावट के खिलाफ भी सख्ती
मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक स्थिति के साथ-साथ खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर भी सरकार के रुख पर बात की। उन्होंने कहा कि खाने-पीने की वस्तुओं और मिठाइयों में मिलावट तथा गैर-खाद्य-ग्रेड रंगों के इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सरकार का जोर कारोबार में पारदर्शिता और खाद्य सुरक्षा के नियमों के पालन पर है।
शुभेंदु अधिकारी के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य केवल वित्तीय स्थिति को सुधारना नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव लाना है। उनका कहना है कि राज्य में सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा है।
बयान पर सियासी बहस तेज होने के आसार
मुख्यमंत्री के ‘दिवालिया जैसी स्थिति’ वाले बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बहस तेज होने की संभावना है। विपक्षी दल सरकार के दावों पर सवाल उठा सकते हैं, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा इसे पिछली सरकार की वित्तीय नीतियों का परिणाम बता सकती है।
इससे पहले भी नई सरकार ने पिछली व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार, कट मनी और सिंडिकेट संस्कृति के खिलाफ कार्रवाई को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। केंद्र सरकार की ओर से भी पश्चिम बंगाल में नई सरकार द्वारा योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों को लागू किए जाने का समर्थन किया गया है।
फिलहाल मुख्यमंत्री के बयान ने राज्य की आर्थिक स्थिति को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। सरकार के सामने राजस्व बढ़ाने, लंबित देनदारियों का भुगतान करने और कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की चुनौती है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सुधार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन पश्चिम बंगाल को आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति में पहुंचने में कम से कम एक साल या उससे अधिक समय लग सकता है।
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