पश्चिम बंगाल

नंदीग्राम पर नजरें, BJP और TMC जल्द खोलेंगे पत्ते

Kavita2
8 Sept 2026 9:49 AM IST
नंदीग्राम पर नजरें, BJP और TMC जल्द खोलेंगे पत्ते
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की चर्चित नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हालांकि चुनाव कार्यक्रम सामने आने के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा उम्मीदवारों के नाम को लेकर हो रही है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) दोनों ने अभी तक अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए हैं, लेकिन संभावित दावेदारों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।

नंदीग्राम सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह वही सीट है, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया था। ऐसे में उपचुनाव को लेकर सभी की नजरें इस सीट पर टिकी हुई हैं।

नंदीग्राम बनी राजनीतिक प्रतिष्ठा की सीट

नंदीग्राम केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की सियासत का बड़ा केंद्र रहा है। इस सीट का नाम राज्य की राजनीति में कई बड़े घटनाक्रमों से जुड़ा रहा है।

पिछले विधानसभा चुनाव में यहां मुकाबला बेहद हाईप्रोफाइल रहा था। ममता बनर्जी ने खुद इस सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया था, जबकि भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतारा था। नतीजों में शुभेंदु अधिकारी की जीत ने राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश दिया था।

अब उपचुनाव में एक बार फिर नंदीग्राम राजनीतिक मुकाबले का केंद्र बन गया है।

BJP और TMC में उम्मीदवार को लेकर मंथन

उपचुनाव की घोषणा के बाद दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में उम्मीदवार चयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ही ऐसे चेहरे की तलाश में हैं, जो नंदीग्राम के राजनीतिक समीकरणों में मजबूत पकड़ रखता हो।

भाजपा के लिए यह सीट अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने की चुनौती है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के लिए यह सीट पुराने राजनीतिक झटके का जवाब देने का मौका मानी जा रही है।

हालांकि अभी तक दोनों दलों की ओर से आधिकारिक रूप से किसी नाम की घोषणा नहीं की गई है।

शुभेंदु अधिकारी की भूमिका पर नजर

नंदीग्राम सीट का नाम आते ही शुभेंदु अधिकारी का जिक्र होना स्वाभाविक है। शुभेंदु अधिकारी पहले तृणमूल कांग्रेस में थे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे।

उनकी नंदीग्राम में मजबूत राजनीतिक पकड़ मानी जाती है। पिछले चुनाव में उन्होंने ममता बनर्जी को हराकर भाजपा को बड़ी सफलता दिलाई थी।

ऐसे में उपचुनाव में भाजपा की रणनीति में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी उम्मीदवार चयन में स्थानीय समीकरण और शुभेंदु अधिकारी की राय को भी अहम माना जा सकता है।

TMC के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई

तृणमूल कांग्रेस के लिए नंदीग्राम उपचुनाव केवल एक सीट जीतने का मामला नहीं है, बल्कि राजनीतिक संदेश देने का अवसर भी है।

ममता बनर्जी की हार वाली सीट पर वापसी करना पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन सकता है। ऐसे में टीएमसी ऐसा उम्मीदवार उतारना चाहेगी, जो भाजपा के मजबूत संगठन और शुभेंदु अधिकारी के प्रभाव को चुनौती दे सके।

पार्टी के अंदर कई संभावित नामों को लेकर चर्चा चल रही है, लेकिन अंतिम फैसला नेतृत्व को करना है।

स्थानीय समीकरण निभाएंगे अहम भूमिका

नंदीग्राम चुनाव में स्थानीय मुद्दे और क्षेत्रीय समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। किसानों, ग्रामीण मतदाताओं और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।

इसके अलावा पिछले चुनाव में बने राजनीतिक समीकरणों का असर भी इस उपचुनाव पर देखने को मिल सकता है।

दोनों दल अपने-अपने स्तर पर मतदाताओं के बीच पहुंच बढ़ाने की तैयारी में जुट सकते हैं।

चुनावी मुकाबले पर पूरे राज्य की नजर

नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल की नजरें रहेंगी। इस सीट का परिणाम राज्य की राजनीति में एक बड़ा संदेश दे सकता है।

भाजपा जहां अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश करेगी, वहीं तृणमूल कांग्रेस वापसी कर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाना चाहेगी।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों पार्टियां किसे मैदान में उतारती हैं। उम्मीदवारों की घोषणा के बाद नंदीग्राम का चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होने की उम्मीद है।

नंदीग्राम की राजनीतिक अहमियत को देखते हुए यह उपचुनाव आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की सियासत का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है।

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