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अहमदाबाद पटाखा फैक्ट्री धमाका: अवैध रूप से चल रही थी फैक्ट्री, तीन गिरफ्तार

गुजरात: अहमदाबाद शहर से एक बेहद दर्दनाक और प्रशासनिक मुस्तैदी पर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के रामोल इलाके में स्थित एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में शनिवार को हुए भीषण धमाके और उसके बाद लगी आग में नौ निर्दोष लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि छह अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद हरकत में आई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री मालिक महिला, उसके बेटे और बिजनेस पार्टनर को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपितों की पहचान रमीलाबेन डोडिया, उनके बेटे मेहुल डोडिया और उनके बिजनेस पार्टनर सादिक सैयद के रूप में हुई है। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि फैक्ट्री का लाइसेंस महीनों पहले खत्म हो चुका था और अधिकारियों के बंद करने के आदेश के बावजूद इसे अवैध रूप से चलाया जा रहा था।
मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह भीषण धमाका रामोल पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) कैंप के ठीक पीछे एक खेत में बने अस्थाई टिन शेड में हुआ। इसी जगह पर नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से भारी मात्रा में पटाखे बनाने और उन्हें स्टोर करने का काम चल रहा था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस साल मार्च महीने में ही इस पटाखा यूनिट के लाइसेंस की मियाद (वैधता) खत्म हो चुकी थी, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों ने इस यूनिट को तुरंत प्रभाव से बंद करने का लिखित आदेश जारी किया था। इसके बावजूद, मुनाफा कमाने के चक्कर में आरोपितों ने कानून की धज्जियां उड़ा दीं।
जांच में यह भी सामने आया है कि हाल ही में अहमदाबाद में आयोजित हुई प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था और बंदोबस्त में पूरी पुलिस फोर्स व्यस्त थी। आरोपितों ने पुलिस और प्रशासन की इसी व्यस्तता का फायदा उठाया और करीब 20 दिन पहले ही इस बंद पड़ी फैक्ट्री को पूरी तरह गैर-कानूनी और गुपचुप तरीके से दोबारा शुरू कर दिया। शनिवार को जब फैक्ट्री में काम चल रहा था, तभी अचानक बारूद में भीषण धमाका हो गया। धमाका इतना जबरदस्त था कि पूरा टिन शेड उड़ गया और वहां काम कर रहे मजदूरों को भागने तक का मौका नहीं मिला। इस हादसे के वक्त मुख्य आरोपित मेहुल और उसकी मां रमीलाबेन भी मौके पर ही मौजूद थे। धमाके के कारण मेहुल को मामूली चोटें आईं, जबकि उसकी मां रमीलाबेन के कान के पर्दे फट गए।
हादसे के बाद मुख्य आरोपित मेहुल डोडिया इंसानियत को शर्मसार करते हुए मौके से घायलों की मदद करने के बजाय भाग खड़ा हुआ। उसने खुद भागकर अपनी मां को अस्पताल ले जाने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को वापस घटनास्थल पर भेजा। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटना के तुरंत बाद रमीलाबेन डोडिया और उसके बिजनेस पार्टनर सादिक सैयद को दबोच लिया, जबकि फरार मेहुल को पुलिस की एक विशेष टीम ने बाद में साबरमती इलाके से घेराबंदी कर गिरफ्तार किया। पुलिस ने तीनों मुख्य आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।
पुलिस कमिश्नर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोपित परिवार के आपराधिक इतिहास का भी पर्दाफाश किया। उन्होंने बताया कि मुख्य महिला आरोपित रमीलाबेन डोडिया का सुरक्षा मानकों की अनदेखी का पुराना इतिहास रहा है। साल 2014 में भी रमीलाबेन ने इसी जगह पर पटाखों की एक ऐसी ही फैक्ट्री चलाई थी। उस दौरान भी फैक्ट्री में भीषण आग लग गई थी, जिसमें एक मजदूर की जलकर मौत हो गई थी। उस मामले में भी रमीलाबेन को पुलिस ने गिरफ्तार किया था और प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए उसका पटाखा लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया था। इसके बाद, कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए साल 2020 में उसने अपने बेटे मेहुल के नाम पर एक नया लाइसेंस हासिल कर लिया और दोबारा मौत का यह कारोबार शुरू कर दिया। फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है कि इस घोर लापरवाही में और कौन-कौन से लोग शामिल थे।





