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पुल तो बना, पर इटावा शहर को जाम और जलभराव से मुक्ति कब?

उत्तर प्रदेश: वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की आहट के बीच जनप्रतिनिधियों के कामकाज का लेखा-जोखा सामने आने लगा है। वर्ष 2022 में चुने गए विधायकों का कार्यकाल अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। ऐसे में इटावा सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक सरिता भदौरिया के पिछले चार वर्षों से अधिक के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड मिला-जुला नजर आता है। इस दौरान जहां क्षेत्र को यमुना नदी पर पुल और बसरेहर बाईपास जैसी बड़ी विकास परियोजनाओं की सौगात मिली है, वहीं शहर की दो सबसे बड़ी बुनियादी समस्याएं— भयंकर जलभराव और रोजाना का ट्रैफिक जाम, आज भी जनता के लिए जी का जंजाल बनी हुई हैं। विपक्ष जहाँ विकास के दावों को पूरी तरह खारिज कर रहा है, वहीं आम जनता में कुछ कार्यों को लेकर संतोष तो कुछ को लेकर भारी मायूसी है।
सदर विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों की बात करें तो विधायक सरिता भदौरिया के प्रयासों से कचौरा रोड पर पिलुआ महावीर मंदिर के पास यमुना नदी पर 135 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य पुल का निर्माण स्वीकृत हुआ है। इसके लिए शासन द्वारा 88 करोड़ रुपये की राशि जारी भी कर दी गई है और काम तेजी से चल रहा है। अगले दो वर्षों में इस पुल के तैयार होने से क्षेत्र के लगभग 80 गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा और आगरा जाने के लिए उनकी करीब 30 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। इसके अलावा, इटावा-बरेली मार्ग पर स्थित बसरेहर कस्बे को रोजाना के भीषण जाम से मुक्ति दिलाने के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से इटावा-सरसईनावर मार्ग का निर्माण कर बसरेहर बाईपास बनाया गया है। साथ ही कस्बे की तीन किलोमीटर लंबी जर्जर सड़क के जीर्णोद्धार के लिए लोक निर्माण विभाग को 8.5 करोड़ रुपये स्वीकृत कराए गए हैं। इसके अलावा गरीब वर्ग के सामाजिक आयोजनों के लिए उत्सव भवन का निर्माण भी विधायक की एक सराहनीय उपलब्धि माना जा रहा है।
इन तमाम बड़े विकास कार्यों के बावजूद, इटावा सदर की जनता को रोज़मर्रा की जिंदगी में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नगर पालिका क्षेत्र के आधे से अधिक हिस्से में जलभराव की समस्या नासूर बन चुकी है। विशेष रूप से लाइनपार क्षेत्र के 24 मुहल्लों में स्थिति इतनी भयावह है कि बारिश के मौसम में लोगों का घरों से निकलना दूभर हो जाता है और पालिका को पंपसेट लगाकर पानी खींचना पड़ता है। कई मुहल्लों में तो सालों भर पानी जमा रहता है। यही हाल इटावा-मैनपुरी मार्ग पर स्थित स्टेट हाईवे के अंडरपास का है, जहाँ बारिश होते ही भारी जलभराव हो जाता है, जिससे कई बार कार और बसें बीच में ही फंस जाती हैं और लोगों की जान पर बन आती है। इसके अलावा पुराने शहर के प्रमुख इलाकों जैसे नौरंगाबाद, साबितगंज, राजागंज, पक्की सराय, पुरबिया टोला और नगर पालिका चौराहा में दिनभर लगने वाले ट्रैफिक जाम से प्रशासन एक दशक बाद भी निजात नहीं दिला सका है, जिसमें बच्चे और बुजुर्ग रोज़ पिसते हैं।
इस पूरी स्थिति पर अपना पक्ष रखते हुए सदर विधायक सरिता भदौरिया का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। शहर के जलभराव से मुक्ति के लिए शासन को 90 करोड़ रुपये का एक बड़ा विजन प्लान भेजा गया था, लेकिन फिलहाल बजट नहीं मिल सका है। विधायक के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार के 'विकसित प्रदेश 2047 विजन प्लान' के तहत पहले चरण में नगर निगमों में काम हो रहा है और अगले चरण में नगर पालिका क्षेत्रों की जलभराव जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म किया जाएगा। अंडरपास की समस्या के लिए उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से पाइप डलवाए हैं और रेलवे के डीआरएम को टिन शेड निर्माण के लिए पत्र लिखा है। पुराने शहर की सड़कों के संकरे होने के कारण जाम की समस्या है, लेकिन राहत के लिए मुख्य बाजार को रविवार के दिन नुमाइश ग्राउंड पर स्थानांतरित कराया गया है।
दूसरी ओर, राजनीतिक गलियारों और जनता के बीच इस कार्यकाल को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं हैं। वर्ष 2022 के चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी सर्वेश शाक्य ने विधायक के दावों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में इटावा सदर में कोई वास्तविक कार्य नहीं हुआ है। लाइनपार क्षेत्र में जलभराव की समस्या घटने के बजाय और बढ़ गई है और सरकारी दफ्तरों में आम आदमी की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हालांकि, क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और व्यवसायियों का मिला-जुला रुख है। जहां कुछ लोग सड़क, बिजली, पेयजल और शिक्षा के क्षेत्र में हुए कार्यों तथा विधायक की जनता के बीच सक्रियता की प्रशंसा कर रहे हैं, वहीं व्यापारी वर्ग का स्पष्ट कहना है कि यदि शहर को जलभराव और जाम के पुराने दंश से मुक्ति मिल जाए, तभी इस कार्यकाल को पूरी तरह सफल माना जाएगा।





