Haldwani में मजदूरों का गुस्सा फूटा, वेतन वृद्धि और बेहतर काम की मांग को लेकर प्रदर्शन, पुलिस पर मारपीट का आरोप

हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी में फैक्ट्री मजदूरों ने वेतन बढ़ोतरी और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर सोमवार को प्रदर्शन किया। नोएडा में शुरू हुए मजदूर आंदोलन की लहर अब हल्द्वानी तक पहुंच गई है। प्रदर्शनकारियों ने न्यूनतम 20,000 रुपये मासिक वेतन, 8 घंटे की शिफ्ट और नो ब्रेक सिस्टम खत्म करने की मांग की है। मामला गरमाने लगा जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर सख्ती, अभद्र व्यवहार और मारपीट का गंभीर आरोप लगाया। इससे पूरे घटनाक्रम में नया विवाद खड़ा हो गया है।क्या हैं मजदूरों की मांगें?प्रदर्शन में शामिल मजदूरों ने बताया कि वे लंबे समय से कम वेतन, लंबी शिफ्ट और बिना ब्रेक काम करने को मजबूर हैं। एक मजदूर ने कहा, “हम दिन में 12-14 घंटे काम करते हैं, लेकिन वेतन बहुत कम है। न्यूनतम 20,000 रुपये वेतन और 8 घंटे की ड्यूटी हमारी बुनियादी मांग है।”पुलिस पर गंभीर आरोपप्रदर्शन के दौरान पुलिस मौके पर पहुंची। इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। जोशी ने दावा किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन एक पुलिस अधिकारी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, गला पकड़कर मारपीट की और धमकियां दीं। पीयूष जोशी ने इसे मजदूरों के अधिकारों का दमन बताते हुए कहा कि कुछ शक्तिशाली लोगों के दबाव में उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने इसे अपने नशा-विरोधी अभियान से भी जोड़ा। प्रशासन का बयानहल्द्वानी के एसपी सिटी मनोज कत्याल ने बताया कि एक कंपनी के मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर धरना दिया था। उन्होंने कहा, “फिलहाल स्थिति शांत है। मजदूरों के प्रतिनिधियों ने फैक्ट्री प्रबंधन से वार्ता शुरू कर दी है। वार्ता का नतीजा आने के बाद मजदूरों को बताया जाएगा। सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।”नोएडा से शुरू हुआ सिलसिलापिछले कुछ दिनों से नोएडा के विभिन्न फैक्टरियों में मजदूरों ने इसी तरह के मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए हैं। अब यह आंदोलन उत्तराखंड के हल्द्वानी तक पहुंच गया है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि पूरे देश में फैक्ट्री मजदूरों की स्थिति एक समान है और उन्हें न्यूनतम मजदूरी, उचित काम के घंटे और सुरक्षा की जरूरत है।आंदोलन तेज करने की चेतावनीप्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं और उनके साथ हुई कथित मारपीट की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने आमरण अनशन, रेल रोको और बड़े स्तर पर प्रदर्शन जैसे कार्यक्रमों की भी तैयारी की बात कही है।स्थानीय व्यापार मंडल और अन्य संगठनों ने भी श्रमिकों की मांगों पर ध्यान देने की अपील की है। श्रम विभाग की भूमिकाहल्द्वानी के श्रम विभाग के अधिकारी घटना की जांच में जुट गए हैं। उन्होंने दोनों पक्षों से बातचीत शुरू कर दी है। मजदूरों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो वे नैनीताल हाईकोर्ट का रुख करेंगे।हल्द्वानी में यह पहला बड़ा श्रमिक आंदोलन नहीं है, लेकिन पुलिस पर लगे आरोपों ने इसे संवेदनशील बना दिया है। प्रशासन अब स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिश कर रहा है।





