
उत्तराखंड | उत्तराखंड में कैंपा (प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण) के कार्यों की निगरानी अब बाहरी एजेंसियों के जरिए होगी। यह फैसला कैग (CAG) की रिपोर्ट सामने आने के बाद लिया गया है, जिसमें कई अनियमितताओं का खुलासा हुआ। इससे वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
कैग रिपोर्ट में क्या सामने आया?
कैग की रिपोर्ट के अनुसार, कैंपा के तहत हुए कई कार्यों में धांधली और वित्तीय गड़बड़ियां पाई गईं। इसमें खासतौर पर वनीकरण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों में लापरवाही उजागर हुई।
बाहरी एजेंसी क्यों जरूरी?
वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए
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कार्यों की गुणवत्ता को परखने के लिए
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वन एवं पर्यावरण संरक्षण के सही क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए
क्या होगा अब?
वन विभाग ने तय किया है कि आगे से बाहरी निगरानी एजेंसियां कैंपा के कामों का ऑडिट और मूल्यांकन करेंगी। इसके तहत स्थल निरीक्षण, वित्तीय रिकॉर्ड की जांच और परियोजनाओं का विश्लेषण किया जाएगा।
वन विभाग की सफाई
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कैग की रिपोर्ट का गहराई से अध्ययन किया जा रहा है और जल्द ही इस पर ठोस कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
उत्तराखंड सरकार अब कैंपा के तहत हो रहे कार्यों को पारदर्शिता और जवाबदेही के दायरे में लाने के प्रयास कर रही है। बाहरी निगरानी एजेंसी की नियुक्ति से उम्मीद है कि आगे किसी तरह की वित्तीय गड़बड़ी पर रोक लगाई जा सकेगी।





