उत्तराखंड

Uttarakhand: महाशिवरात्रि का उत्सव, टपकेश्वर मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, गूंजे 'हर-हर महादेव' के नारे

Sarita
27 Feb 2025 12:23 PM IST
Uttarakhand: महाशिवरात्रि का उत्सव, टपकेश्वर मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, गूंजे हर-हर महादेव के नारे
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Uttarakhand: शिवरात्रि के पावन पर्व पर देश के सभी शिव मंदिरों में शिव भक्तों की भीड़ उमड़ रही है. वहीं देहरादून के टपकेश्वर मंदिर में देर रात 12:00 बजे से ही शिव भक्त जलाभिषेक करने के लिए कई किलोमीटर लंबी लाइन में खड़े नजर आए. इस दौरान मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा. टपकेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी का कहना है कि पौराणिक मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में भोले शंकर यहां देवेश्वर के रूप में प्रकट हुए थे. टपकेश्वर मंदिर की एक पौराणिक कथा के अनुसार इस गुफा को द्रोणाचार्य का निवास स्थान माना जाता है. इसी गुफा में उनके पुत्र अश्वत्थामा का जन्म हुआ था. पुत्र के जन्म के बाद उनकी मां उन्हें दूध नहीं पिला पा रही थीं. उन्होंने (अश्वत्थामा ने) भोलेनाथ से प्रार्थना की|
इसके बाद भगवान शिव ने गुफा की छत पर थन बनाए और शिवलिंग पर दूध की धारा बहने लगी. जिसके कारण भगवान शिव का नाम दूधेश्वर पड़ा. कलियुग के समय में इस धारा ने जल का रूप ले लिया। इस मंदिर के शिवलिंग पर एक चट्टान से पानी की बूंदें गिरती रहती हैं। इसी कारण मंदिर को टपकेश्वर कहा जाता है। गुरु द्रोणाचार्य ने यहां 12 वर्षों तक भगवान शिव की तपस्या की थी। ऐसी भी मान्यता है कि कौरवों और पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य भगवान शिव की तपस्या करने इस गुफा में आए थे। उन्होंने 12 वर्षों तक भोलेनाथ की तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव उनके सामने प्रकट हुए थे। उनके अनुरोध पर भगवान शिव ने लिंग के रूप में यहां खुद को स्थापित किया था। प्रचलित मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने गुरु द्रोणाचार्य को इसी स्थान पर अस्त्र-शस्त्र और धनुर्विद्या का ज्ञान दिया था। इस घटना का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है।
कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने टपकेश्वर मंदिर में किया जलाभिषेक कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने टपकेश्वर मंदिर में जलाभिषेक किया और प्रदेश की समरसता के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाईचारा बना रहे। इसके लिए उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान टपकेश्वर में उनकी अटूट आस्था है और वे हर साल यहां दर्शन के लिए आते हैं। भगवान टपकेश्वर के दर्शन के लिए श्रद्धालु कई घंटों तक लाइन में खड़े रहे। उन्होंने अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना भी की।
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