उत्तराखंड

भूस्खलन प्रबंधन में उत्तराखण्ड की बड़ी उपलब्धि, तकनीकी सेवाओं से कमाए 4.21 लाख रुपये

Kavita2
19 Aug 2026 5:59 PM IST
भूस्खलन प्रबंधन में उत्तराखण्ड की बड़ी उपलब्धि, तकनीकी सेवाओं से कमाए 4.21 लाख रुपये
x

देहरादून। उत्तराखण्ड की भूस्खलन विशेषज्ञता और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में विकसित तकनीकी क्षमता को अब देश के अन्य राज्यों में भी पहचान मिलने लगी है। उत्तराखण्ड भूस्खलन एवं न्यूनीकरण केन्द्र (यूएलएमएमसी) ने अपनी तकनीकी सेवाओं के माध्यम से राज्य के बाहर भी उपयोगिता साबित करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

केंद्र को पहली बार किसी बाहरी राज्य की परियोजना में तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराने के बदले 4 लाख 21 हजार रुपये की राजस्व प्राप्ति हुई है। यह राशि केंद्र द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और उपलब्ध कराई गई तकनीकी परामर्श सेवाओं के लिए मिली है।

यूएलएमएमसी की स्थापना के बाद तकनीकी सेवाओं के माध्यम से अर्जित यह पहली राजस्व राशि है। इसे केंद्र की बढ़ती तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

उत्तराखण्ड भूस्खलन प्रभावित राज्य रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार होने वाले भूस्खलन से जनजीवन, सड़क संपर्क और विकास परियोजनाएं प्रभावित होती रही हैं। ऐसे में भूस्खलन जोखिम को कम करने, संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और वैज्ञानिक समाधान विकसित करने के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

यूएलएमएमसी ने इसी दिशा में काम करते हुए भूस्खलन अध्ययन, जोखिम मूल्यांकन, रोकथाम उपायों और तकनीकी सलाह के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता विकसित की है। अब इसी अनुभव का लाभ दूसरे राज्यों की परियोजनाओं को भी मिलने लगा है।

अधिकारियों के अनुसार, केंद्र द्वारा तैयार की गई डीपीआर और तकनीकी परामर्श सेवाओं की गुणवत्ता के आधार पर बाहरी राज्य की परियोजना में इसकी सेवाओं को शामिल किया गया। इससे यह साबित हुआ है कि उत्तराखण्ड में विकसित भूस्खलन प्रबंधन की तकनीक और अनुभव अन्य क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी हैं।

इस उपलब्धि को राज्य के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे आपदा प्रबंधन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। अब तक कई तकनीकी कार्यों के लिए बाहरी संस्थाओं पर निर्भरता रहती थी, लेकिन यूएलएमएमसी जैसे संस्थान स्थानीय विशेषज्ञता के माध्यम से समाधान उपलब्ध करा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी राज्यों के लिए भूस्खलन प्रबंधन केवल आपदा नियंत्रण का विषय नहीं है, बल्कि सुरक्षित विकास और भविष्य की योजनाओं से भी जुड़ा हुआ है। वैज्ञानिक अध्ययन और तकनीकी उपायों के जरिए भूस्खलन के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

यूएलएमएमसी की यह उपलब्धि राज्य में मौजूद तकनीकी संसाधनों और विशेषज्ञों की क्षमता को दर्शाती है। केंद्र भविष्य में भी अन्य राज्यों और संस्थानों को तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

राज्य सरकार की ओर से भी आपदा प्रबंधन और वैज्ञानिक तकनीक के उपयोग पर लगातार जोर दिया जा रहा है। उत्तराखण्ड जैसे संवेदनशील हिमालयी राज्य में भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ सलाह की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

केंद्र की पहली राजस्व प्राप्ति को एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल संस्थान की आर्थिक क्षमता मजबूत होगी, बल्कि राज्य की तकनीकी विशेषज्ञता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

भविष्य में यूएलएमएमसी भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण, सुरक्षित निर्माण और आपदा प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं में अपनी भूमिका और विस्तार कर सकता है। इससे उत्तराखण्ड के अनुभव और तकनीकी ज्ञान का लाभ देश के अन्य पहाड़ी क्षेत्रों को भी मिल सकेगा।

यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि उत्तराखण्ड अब केवल आपदा प्रभावित राज्य नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन और भूस्खलन नियंत्रण के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाला राज्य बनकर उभर रहा है।

Next Story