उत्तराखंड

पंतनगर कैंपस स्कूल के छात्र ने रचा इतिहास, अभिनव कुर्सी डिजाइन हुआ पेटेंट

Kavita2
19 Aug 2026 4:20 PM IST
पंतनगर कैंपस स्कूल के छात्र ने रचा इतिहास, अभिनव कुर्सी डिजाइन हुआ पेटेंट
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पंतनगर। पंतनगर कैंपस स्कूल के कक्षा छह के छात्र व्योम केसरवानी ने अपनी वैज्ञानिक सोच और रचनात्मक प्रतिभा से क्षेत्र का नाम रोशन किया है। कम उम्र में व्योम ने ऐसा डिजाइन तैयार किया है, जिससे बाएं हाथ से लिखने वाले विद्यार्थियों को होने वाली परेशानी दूर हो सकती है। उनकी इस अभिनव सोच को भारत सरकार से पेटेंट भी मिल गया है।

व्योम की इस उपलब्धि से विद्यालय और विश्वविद्यालय परिवार में खुशी का माहौल है। शिक्षकों, अभिभावकों और साथियों ने छात्र की इस सफलता पर गर्व व्यक्त किया है। इतनी कम उम्र में वैज्ञानिक नवाचार के क्षेत्र में मिली यह उपलब्धि व्योम के लिए बड़ी प्रेरणा मानी जा रही है।

व्योम ने एक ऐसी विशेष कुर्सी का डिजाइन तैयार किया है, जिसे कुछ ही समय में बाएं या दाएं हाथ से लिखने वाले विद्यार्थियों के अनुसार बदला जा सकता है। सामान्य तौर पर स्कूलों में इस्तेमाल होने वाली राइटिंग चेयर दाएं हाथ से लिखने वाले विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं।

इस कारण बाएं हाथ से लिखने वाले छात्रों को बैठने और लिखने में कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्हें कॉपी रखने, हाथ चलाने और सही मुद्रा में बैठने में असुविधा होती है। व्योम की डिजाइन की गई कुर्सी इस समस्या का समाधान प्रस्तुत करती है।

इस विशेष कुर्सी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे जरूरत के अनुसार एडजस्ट किया जा सकता है। विद्यार्थी अपनी सुविधा के मुताबिक इसे बाएं या दाएं हाथ से लिखने के लिए तैयार कर सकते हैं। इससे लिखने की स्थिति बेहतर होगी और छात्रों को आरामदायक अनुभव मिलेगा।

व्योम की इस उपलब्धि को शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में छोटी उम्र से ही वैज्ञानिक सोच और समस्याओं को समझने की क्षमता विकसित करना जरूरी है। व्योम का यह प्रयास इसी सोच का उदाहरण है।

जानकारी के अनुसार, व्योम के पिता के नाम से तीन पेटेंट दर्ज हैं। परिवार में पहले से ही नवाचार और नए विचारों को बढ़ावा देने का माहौल रहा है। इसी प्रेरणा से व्योम ने भी अपनी कल्पनाशक्ति को एक उपयोगी डिजाइन में बदला।

व्योम ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ आसपास की समस्याओं को समझने और उनके समाधान खोजने की कोशिश की। उन्होंने महसूस किया कि बाएं हाथ से लिखने वाले छात्रों को स्कूलों में इस्तेमाल होने वाली सामान्य कुर्सियों से परेशानी होती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इस खास कुर्सी का डिजाइन तैयार किया।

विद्यालय के शिक्षकों ने व्योम की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने आसपास की समस्याओं को पहचानकर समाधान खोजने की कोशिश करनी चाहिए।

विद्यालय प्रशासन का कहना है कि व्योम की सफलता से छात्रों में नई सोच और प्रयोग करने का उत्साह बढ़ेगा। उन्होंने छात्र को भविष्य में भी इसी तरह नए प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।

व्योम की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि उम्र नवाचार के रास्ते में बाधा नहीं होती। सही मार्गदर्शन और मेहनत से बच्चे भी बड़े बदलाव लाने वाले विचार सामने ला सकते हैं।

शिक्षा जगत में भी व्योम के इस प्रयास की चर्चा हो रही है। उनकी डिजाइन की गई कुर्सी यदि बड़े स्तर पर उपयोग में लाई जाती है तो इससे देशभर के लाखों बाएं हाथ से लिखने वाले विद्यार्थियों को लाभ मिल सकता है।

व्योम का सपना भविष्य में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ना है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और स्कूल के लिए गर्व का विषय है, बल्कि अन्य युवा छात्रों के लिए भी प्रेरणा है।

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