
रुड़की। देशभर में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षकों की मांगों को लेकर जेन अल्फा के प्रदर्शन के बीच शुक्रवार को रुड़की में भी बच्चों का अनोखा विरोध देखने को मिला। कृष्णा नगर स्थित स्काईवर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र-छात्राएं अपने शिक्षकों के साथ नगर निगम कार्यालय पहुंच गए। स्कूल के बाहर कई-कई फीट तक जलभराव होने से नाराज बच्चों और शिक्षकों ने नगर निगम के खिलाफ विरोध जताया।
अचानक एक के बाद एक तीन स्कूल बसों के नगर निगम परिसर में पहुंचने से वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए। बसों से उतरकर बच्चे अपने शिक्षकों के साथ निगम कार्यालय पहुंचे और स्कूल के आसपास जलभराव की समस्या को लेकर अधिकारियों के सामने अपनी परेशानी रखी।
स्कूल के बाहर कई फीट पानी से परेशानी
छात्रों और शिक्षकों के मुताबिक, बारिश के बाद स्कूल के बाहर सड़क पर भारी जलभराव हो गया है। कई स्थानों पर पानी कई-कई फीट तक जमा होने के कारण स्कूल आने-जाने में विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है। जलभराव के कारण बच्चों के कपड़े और जूते गंदे होने के साथ ही फिसलने और अन्य हादसों का खतरा भी बना रहता है।
शुक्रवार को भी जब बच्चे स्कूल पहुंचे तो बाहर जलभराव की स्थिति बनी हुई थी। लगातार ऐसी समस्या का सामना करने से परेशान छात्रों और शिक्षकों ने नगर निगम कार्यालय पहुंचकर अपनी बात रखने का फैसला किया।
तीन बसों में निगम पहुंचे छात्र
स्कूल के छात्रों को तीन स्कूल बसों में नगर निगम कार्यालय लाया गया। जैसे ही एक के बाद एक तीन बसें निगम परिसर में पहुंचीं, वहां मौजूद लोगों का ध्यान उनकी ओर गया। बच्चों के साथ स्कूल के शिक्षक भी मौजूद थे।
छात्रों का कहना था कि वे पढ़ाई करने के लिए स्कूल आते हैं, लेकिन स्कूल के बाहर जलभराव के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों ने भी नगर निगम के अधिकारियों के सामने समस्या उठाते हुए जलभराव का स्थायी समाधान कराने की मांग की।
नगर आयुक्त के कार्यालय में जताया विरोध
बच्चे और शिक्षक नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल के कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने स्कूल के बाहर जलभराव को लेकर अपनी नाराजगी जताई। शिक्षकों ने कहा कि जलभराव की समस्या केवल एक-दो दिन की नहीं है, बल्कि बारिश के दौरान बार-बार ऐसी स्थिति पैदा होती है।
शिक्षकों का कहना था कि बच्चों की सुरक्षा और नियमित पढ़ाई के लिए स्कूल के आसपास की सड़क और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाना जरूरी है। उनका आरोप था कि जलभराव के कारण स्कूल आने वाले बच्चों और कर्मचारियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
निगम कार्यालय में ही लगा दी बच्चों की कक्षा
इस विरोध प्रदर्शन का सबसे अलग पहलू यह रहा कि नगर निगम कार्यालय में ही शिक्षकों ने बच्चों की कक्षा शुरू कर दी। बच्चों को कार्यालय परिसर में बैठाया गया और शिक्षकों ने उन्हें पढ़ाना शुरू कर दिया।
इस तरह शिक्षकों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि जलभराव जैसी नागरिक समस्या के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। साथ ही, नगर निगम कार्यालय में कक्षा लगाकर उन्होंने प्रशासन का ध्यान स्कूल के बाहर की स्थिति की ओर आकर्षित किया।
बच्चे भी इस दौरान अपनी किताबों और कॉपियों के साथ नजर आए। कुछ समय के लिए निगम कार्यालय का माहौल सामान्य प्रशासनिक गतिविधियों से अलग दिखाई दिया।
शिक्षा के साथ नागरिक सुविधाओं का मुद्दा
स्कूल के बच्चों के इस विरोध ने शिक्षा के साथ-साथ शहर की नागरिक सुविधाओं से जुड़े सवाल को भी सामने ला दिया। विद्यार्थियों के लिए स्कूल तक सुरक्षित पहुंचना जरूरी है। यदि स्कूल के मुख्य मार्ग पर लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो इसका असर उनकी उपस्थिति और पढ़ाई पर पड़ सकता है।
शिक्षकों ने कहा कि बच्चों को प्रतिदिन जलभराव वाले रास्ते से स्कूल पहुंचना पड़ता है। इससे अभिभावकों की चिंता भी बढ़ती है। छोटे बच्चों को पानी से होकर स्कूल भेजना विशेष रूप से मुश्किल होता है।
जल निकासी व्यवस्था पर सवाल
स्कूल के बाहर जलभराव को लेकर सबसे बड़ा सवाल जल निकासी व्यवस्था पर उठ रहा है। बारिश का पानी यदि समय पर नहीं निकलता है तो सड़क पर लंबे समय तक जमा रहता है। इससे सड़क की स्थिति भी खराब हो सकती है और आसपास गंदगी फैलने की आशंका रहती है।
स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने नगर निगम से मांग की कि समस्या का केवल अस्थायी समाधान न किया जाए, बल्कि पानी की निकासी के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए।
बच्चों के विरोध ने खींचा ध्यान
आमतौर पर नागरिक समस्याओं को लेकर स्थानीय लोग या व्यापारी प्रशासन के सामने विरोध दर्ज कराते हैं, लेकिन इस बार स्कूली बच्चों का नगर निगम पहुंचना चर्चा का विषय बन गया। तीन बसों में बच्चों के पहुंचने से निगम परिसर में मौजूद लोगों का ध्यान इस ओर गया।
बच्चों ने अपने शिक्षकों के साथ समस्या रखी और जलभराव से निजात दिलाने की मांग की। शिक्षकों ने भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों की रोजमर्रा की परेशानी को जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाना है।
कार्रवाई का इंतजार
अब स्कूल प्रबंधन, शिक्षक, छात्र और अभिभावक नगर निगम की ओर से कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। उनकी मांग है कि स्कूल के बाहर जमा होने वाले पानी की समस्या का जल्द समाधान किया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सामान्य माहौल में स्कूल आने-जाने में परेशानी न हो।
शुक्रवार को हुए इस घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि शहर की नागरिक सुविधाओं का सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ता है। सड़क, नाली और जल निकासी जैसी व्यवस्थाएं ठीक न होने पर स्कूलों का सामान्य संचालन भी प्रभावित हो सकता है।
कुल मिलाकर, रुड़की के कृष्णा नगर में जलभराव से परेशान स्काईवर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल के बच्चों और शिक्षकों का नगर निगम पहुंचना अनोखे विरोध का रूप रहा। तीन स्कूल बसों में पहुंचे विद्यार्थियों ने स्कूल के बाहर भरे पानी की समस्या उठाई, जबकि शिक्षकों ने निगम कार्यालय में ही बच्चों की कक्षा लगाकर प्रशासन का ध्यान खींचा। अब देखना होगा कि नगर निगम इस समस्या के समाधान के लिए कितनी जल्दी कदम उठाता है।





