उत्तराखंड

110 वर्षों बाद भी कायम है थर्ड गढ़वाल राइफल्स का जज्बा और जुनून

nidhi
21 Aug 2026 12:14 PM IST
110 वर्षों बाद भी कायम है थर्ड गढ़वाल राइफल्स का जज्बा और जुनून
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देश सेवा में समर्पित थर्ड गढ़वाल राइफल्स की वीर गाथा जारी
नई दिल्ली: भारतीय सेना की गौरवशाली रेजिमेंटों में शामिल थर्ड गढ़वाल राइफल्स ने अपने 110 वर्ष पूरे कर लिए हैं। एक सदी से अधिक लंबे सफर में इस बटालियन ने वीरता, अनुशासन और देश सेवा की ऐसी मिसालें कायम की हैं, जो आज भी सैनिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
थर्ड गढ़वाल राइफल्स का इतिहास साहस और बलिदान से भरा हुआ है। इस रेजिमेंट के जवानों ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए कई युद्धों और सैन्य अभियानों में अदम्य साहस का परिचय दिया है। उनके शौर्य और समर्पण ने भारतीय सेना की प्रतिष्ठा को मजबूत किया है।
गढ़वाल राइफल्स की स्थापना वर्ष 1915 में हुई थी। तब से लेकर आज तक इस रेजिमेंट ने बदलते समय के साथ खुद को मजबूत बनाया और सेना के हर मोर्चे पर अपनी क्षमता साबित की। पहाड़ी क्षेत्र से आने वाले सैनिकों की बहादुरी और कठिन परिस्थितियों में काम करने की क्षमता इसकी पहचान रही है।
थर्ड गढ़वाल राइफल्स के जवानों ने प्रथम विश्व युद्ध से लेकर स्वतंत्र भारत के विभिन्न सैन्य अभियानों तक अपनी वीरता दिखाई है। दुर्गम इलाकों में तैनाती, कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद सैनिकों ने हमेशा अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा।
रेजिमेंट की परंपरा में अनुशासन, साहस और राष्ट्र सेवा को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। यही कारण है कि गढ़वाल राइफल्स का नाम भारतीय सेना की सबसे सम्मानित इकाइयों में लिया जाता है।
110 वर्ष पूरे होने के अवसर पर रेजिमेंट से जुड़े पूर्व सैनिकों और वर्तमान जवानों ने गौरव के इस पल को याद किया। इस दौरान शहीद सैनिकों के बलिदान को नमन किया गया और आने वाली पीढ़ियों को सेना की परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।
रेजिमेंट के अधिकारियों का कहना है कि समय बदलने के साथ युद्ध की तकनीक और चुनौतियां बदली हैं, लेकिन सैनिकों का जज्बा और देश के प्रति समर्पण आज भी पहले जैसा ही है।
गढ़वाल राइफल्स केवल एक सैन्य इकाई नहीं बल्कि उत्तराखंड और पूरे देश के लिए गर्व का प्रतीक है। इस रेजिमेंट के अनेक जवानों ने वीरता पुरस्कार प्राप्त किए हैं और देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
110 वर्षों की यह यात्रा बलिदान, सम्मान और उपलब्धियों की कहानी है। थर्ड गढ़वाल राइफल्स आज भी उसी गौरव, जज्बे और जुनून के साथ देश सेवा में तैनात है, जिसने इसे भारतीय सेना में एक अलग पहचान दिलाई है।
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