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Dehradun देहरादून : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि श्री केदारनाथ धाम यात्रा उत्तराखंड की आस्था और संस्कृति की धुरी बन गई है। सरकार का लक्ष्य न केवल तीर्थयात्रियों को सुविधाएं प्रदान करना है, बल्कि स्थानीय युवाओं, महिलाओं और व्यापारियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। सीएम धामी ने कहा, "हम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और समृद्ध बनाने की दिशा में हर संभव कदम उठाने का प्रयास कर रहे हैं। श्री केदारनाथ धाम यात्रा हर साल नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। एक ओर जहां देश-विदेश से बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है, वहीं बढ़ती यात्रा से स्थानीय लोगों के रोजगार को भी निरंतर लाभ मिल रहा है।"
उन्होंने कहा कि दूसरी ओर यात्रा पर पहुंच रहे श्रद्धालुओं को शासन प्रशासन की ओर से दी जा रही सुविधाओं से भी सरकार को भारी राजस्व प्राप्त हो रहा है। बाबा के कपाट खुले एक माह बीत चुका है और इस एक माह में सरकारी सुविधाओं से लेकर स्थानीय व्यापारियों ने दो अरब से अधिक का कारोबार किया है। जून माह की शुरूआत से ही श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार इजाफा होने लगा है, जिसका लाभ स्थानीय व्यापारियों और महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा। वर्ष 2025 के लिए बाबा केदारनाथ धाम के कपाट दो मई को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे। बाबा के कपाट खुले एक माह बीत चुका है।
रविवार एक जून को बाबा केदारनाथ धाम में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सात लाख को पार कर गई है। पिछले एक माह का औसत निकाला जाए तो प्रतिदिन 24 हजार श्रद्धालु बाबा के दर्शनों के लिए केदारपुरी पहुंचे हैं। श्री केदारनाथ धाम यात्रा देश की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में से एक है। करीब 20 किलोमीटर का कठिन पैदल मार्ग पार करने के बाद हिमालय पर्वत की गोद में स्थित 11वें ज्योतिलिंग के दर्शन होते हैं। पैदल इस कठिन धार्मिक यात्रा में घोड़े-खच्चर बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। असमर्थ और बुजुर्ग श्रद्धालु अक्सर इनके जरिए यात्रा करते हैं, जबकि खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुएं इन्हीं घोड़ों-खच्चरों से यात्रा मार्ग और केदारपुरी तक पहुंचाई जाती हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आशीष रावत ने बताया कि 31 मई तक 1,39,444 तीर्थयात्री घोड़ों और खच्चरों के जरिए दर्शनों के लिए पहुंच चुके हैं, जिनसे 40 करोड़ 50 लाख से अधिक की आय प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष संक्रामक रोग इक्वाइन इंफ्लूएंजा वायरस के चलते घोड़े-खच्चर संचालन भी कुछ दिनों के लिए प्रभावित रहा। श्री केदारनाथ धाम यात्रा में हेली सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। हेली सेवाओं के जरिए ऐसे श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन का मौका मिलता है जो किसी भी हालत में पैदल यात्रा करने में असमर्थ होते हैं। वहीं, रेस्क्यू ऑपरेशन में भी हेली सेवाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। प्रतिदिन दो से तीन मेडिकल इमरजेंसी का सामना कर रहे लोगों को हेली सेवाओं के माध्यम से समय रहते रेस्क्यू कर उच्च केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है।
जिला पर्यटन अधिकारी एवं नोडल हेली सेवा राहुल चौबे ने बताया कि इस वर्ष नौ हेलीपैडों से आठ हेली कंपनियां संचालित हो रही हैं। 31 मई तक करीब 33 हजार श्रद्धालु हेली सेवाओं के माध्यम से बाबा केदारनाथ धाम पहुंच चुके हैं, जिससे करीब 35 करोड़ रुपये की आय हुई है। चौबे ने श्रद्धालुओं से आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट से हेली बुकिंग कराने की अपील की है। श्री केदारनाथ धाम पैदल यात्रा मार्ग पर घोड़ों और खच्चरों के संचालन जितना ही डंडी-कंडी का संचालन भी महत्वपूर्ण है। कई श्रद्धालु जो पैदल चलने में असमर्थ होते हैं, वे डंडी-कंडी के बजाय डंडी-कंडी से यात्रा करना पसंद करते हैं। इसे छोटे बच्चों के लिए भी सुरक्षित माना जाता है।
इसके अलावा कई श्रद्धालु स्वयं पैदल यात्रा कर ऐसे ही डंडी-कंडी के सहारे केदारपुरी पहुंचते हैं। अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत रुद्रप्रयाग संजय कुमार ने बताया कि इस वर्ष यात्रा के लिए 7000 से अधिक डंडी-कंडी संचालक पंजीकृत हैं। 31 मई तक 29275 श्रद्धालुओं ने डंडी-कंडी के माध्यम से यात्रा की है, जिससे एक करोड़ 16 लाख, 89 हजार 100 रुपये की आय प्राप्त हुई है। वहीं गंदगी फैलाने व अन्य नियमों का उल्लंघन करने पर विभिन्न प्रतिष्ठानों का चालान कर 2,26,000 रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है। सहायक परिवहन अधिकारी रुद्रप्रयाग कुलवंत सिंह चौहान ने बताया कि इस वर्ष श्री केदारनाथ धाम यात्रा में शटल सेवा के लिए 225 वाहन पंजीकृत हैं। इन वाहनों से श्रद्धालु सोनप्रयाग से गौरीकुंड पहुंचते हैं।
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