उत्तराखंड

सोमनाथ भारत की सनातन शक्ति का प्रतीक: CM Dhami

Gulabi Jagat
7 Aug 2026 4:35 PM IST
सोमनाथ भारत की सनातन शक्ति का प्रतीक: CM Dhami
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Dehradun, देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सोमनाथ मंदिर भारत की सनातन संस्कृति, आस्था और अदम्य आत्मबल का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों के इतिहास और अनेक आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ आज भी विश्व को यह संदेश देता है कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की शक्ति अटूट, अमर और अविनाशी है।

मुख्यमंत्री धामी ने 8 से 11 मई के बीच सोमनाथ मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले "विरासत वर्ष के 75 वर्ष" कार्यक्रम को भारत की सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक विरासत का महोत्सव बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की प्राचीन परंपराओं, सनातन मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। इससे भारत की गौरवशाली विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और पुनरोद्धार का कार्य अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक, केदारनाथ और बद्रीनाथ सहित अनेक धार्मिक स्थलों का भव्य विकास भारत की सांस्कृतिक पुनर्जागरण यात्रा का सशक्त उदाहरण है। इन परियोजनाओं ने न केवल श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ाई हैं, बल्कि धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दी है।

धामी ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक धरोहर केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय चेतना की आधारशिला भी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों, परंपराओं और भारतीय सभ्यता के मूल्यों से जुड़ रही है। इससे राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक चेतना को भी नई ऊर्जा मिल रही है।

उन्होंने विश्वास जताया कि सोमनाथ मंदिर में आयोजित होने वाला "विरासत वर्ष के 75 वर्ष" कार्यक्रम भारत की सनातन परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक मूल्यों को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति ही उसकी सबसे बड़ी पहचान है और आने वाली पीढ़ियों तक इस विरासत को सुरक्षित पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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