
Uttarakhand उत्तराखंड : शहर में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सीलबंद और पैक्ड खाद्य उत्पाद में गड़बड़ी मिलने से लोगों में दहशत फैल गई है। मामला रामपुर चुंगी के पास ग्रीन पार्क कॉलोनी का है, जहां एक पैक्ड जूस के अंदर मृत छिपकली का बच्चा मिलने का आरोप लगा है।
जानकारी के अनुसार, ग्रीन पार्क कॉलोनी निवासी अजहर खान ने सुबह नाश्ते के लिए एक किराना दुकान से जूस का पैक्ड पैकेट खरीदा था। उन्होंने बताया कि घर लाकर जब उन्होंने पैकेट खोला और चाय के साथ सेवन करने की तैयारी की, तभी उन्हें उसमें कुछ असामान्य दिखाई दिया।
अजहर खान के अनुसार, पैकेट खोलने पर पहले उसमें फंगस जैसा निशान नजर आया, जिससे उन्हें शक हुआ। इसके बाद जब उन्होंने ध्यान से देखा तो पैकेट के अंदर एक मृत छिपकली का बच्चा पाया गया। यह देखकर परिवार के लोगों में हड़कंप मच गया और सभी हैरान रह गए।
घटना के बाद ग्राहक ने तुरंत दुकानदार से संपर्क किया और इसकी शिकायत की। साथ ही उन्होंने खाद्य सुरक्षा विभाग को भी मामले की जानकारी दी। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू करने की बात कही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं बाजार में बिक रहे पैक्ड खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उनका मानना है कि यदि सीलबंद पैकेट में भी इस तरह की गड़बड़ी सामने आ रही है, तो यह उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।
वहीं खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और संबंधित उत्पाद के सैंपल को परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
दुकानदार का भी कहना है कि वह इस मामले से हैरान है और सप्लायर कंपनी से जानकारी मांगी जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि पैकेजिंग में कोई कमी या लापरवाही सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
घटना के बाद इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है और लोग पैक्ड खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। कई लोगों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
कुल मिलाकर, रुड़की में पैक्ड जूस के अंदर मृत छिपकली का बच्चा मिलने की घटना ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब सभी की नजरें खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।





