
नैनीताल। कैंची धाम में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या और गंभीर होती यातायात जाम की समस्या को देखते हुए प्रशासन ने अब नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। धाम में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्री-रजिस्ट्रेशन यानी पूर्व पंजीकरण व्यवस्था शुरू करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।
कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने अधिकारियों और पर्यटन कारोबारियों के साथ बैठक कर कैंची धाम की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। बैठक में श्रद्धालुओं की संख्या, यातायात दबाव, पार्किंग, होटल-होमस्टे संचालन और स्थानीय व्यापार से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। आयुक्त ने जिला अधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्री-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू करने के संबंध में तत्काल शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए।
प्रशासन का मानना है कि यदि धाम में आने वाले श्रद्धालुओं का पहले से पंजीकरण किया जाए तो रोजाना आने वाले लोगों की संख्या का अनुमान पहले से लगाया जा सकेगा। इससे पार्किंग, यातायात, पुलिस बल और अन्य सुविधाओं की बेहतर योजना बनाई जा सकती है। खासतौर पर वीकेंड और छुट्टियों के दौरान कैंची धाम में अचानक बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
कैंची धाम पिछले कुछ वर्षों में देश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में तेजी से उभरा है। यहां उत्तराखंड के साथ-साथ देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सप्ताहांत और विशेष धार्मिक अवसरों पर भीड़ कई गुना बढ़ जाती है, जिससे भवाली-अल्मोड़ा मार्ग सहित आसपास के क्षेत्रों में लंबा जाम लग जाता है।
यातायात दबाव का असर केवल श्रद्धालुओं पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों और व्यापारियों पर भी पड़ता है। कई बार वाहनों की लंबी कतारें लगने से स्थानीय लोगों को अपने दैनिक कार्यों के लिए आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से प्रशासन अब भीड़ प्रबंधन के लिए स्थायी समाधान तैयार करने की कोशिश कर रहा है।
बैठक में कुमाऊं आयुक्त ने क्षेत्र में संचालित होटल और होमस्टे की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को होटल और होमस्टे का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी प्रतिष्ठान निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित हों और श्रद्धालुओं व पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी न हो।
उन्होंने रेस्टोरेंट संचालकों के लिए दर-सूची लगाना भी अनिवार्य करने के निर्देश दिए। प्रशासन का कहना है कि खाने-पीने की वस्तुओं की स्पष्ट रेट लिस्ट प्रदर्शित होने से पर्यटकों और श्रद्धालुओं से मनमानी कीमत वसूले जाने की शिकायतों को रोका जा सकेगा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि इस व्यवस्था की नियमित जांच की जाए।
वीकेंड पर विशेष निगरानी की भी योजना बनाई गई है। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीमें कैंची धाम और आसपास के क्षेत्रों में तैनात रहेंगी। ये टीमें होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, पार्किंग और यातायात व्यवस्था पर नजर रखेंगी। जरूरत पड़ने पर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
कैंची धाम में यातायात व्यवस्था लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। संकरी सड़क, सीमित पार्किंग और बड़ी संख्या में आने वाले वाहनों की वजह से कई बार घंटों जाम की स्थिति बन जाती है। श्रद्धालुओं के वाहनों के अलावा स्थानीय टैक्सी और पर्यटन वाहनों का दबाव भी काफी अधिक रहता है।
प्री-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू होने पर प्रशासन श्रद्धालुओं की संख्या को स्लॉट या समय के अनुसार व्यवस्थित कर सकता है। हालांकि अंतिम व्यवस्था शासन की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल जिला प्रशासन को प्रस्ताव तैयार कर जल्द भेजने के लिए कहा गया है।
बैठक में पर्यटन कारोबारियों से भी सुझाव लिए गए। स्थानीय कारोबारियों ने भीड़ बढ़ने से कारोबार में वृद्धि होने की बात कही, लेकिन साथ ही ट्रैफिक जाम और अव्यवस्थित पार्किंग से होने वाली समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने ऐसी व्यवस्था की मांग की जिससे श्रद्धालुओं की सुविधा और स्थानीय व्यापार दोनों प्रभावित न हों।
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि धार्मिक पर्यटन को व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा दिया जाए। इसके लिए पार्किंग, ट्रैफिक मैनेजमेंट, साफ-सफाई, आवास व्यवस्था और खाद्य सेवाओं को बेहतर बनाना जरूरी माना गया है।
कुमाऊं आयुक्त ने अधिकारियों से कहा कि कैंची धाम में आने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के सामान्य जीवन पर भी भीड़ का अधिक असर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए।
धाम में भीड़ बढ़ने के कारण प्रशासन पहले भी ट्रैफिक डायवर्जन, पार्किंग और शटल सेवा जैसी व्यवस्थाओं का सहारा लेता रहा है। अब प्री-रजिस्ट्रेशन को भीड़ नियंत्रण की नई व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले पंजीकरण कराना पड़ सकता है। इससे प्रशासन को यह जानकारी पहले से मिल सकेगी कि किसी विशेष दिन कितने श्रद्धालु पहुंचने वाले हैं। उसी हिसाब से पुलिस और यातायात व्यवस्था तैयार की जा सकेगी।
फिलहाल डीएम और एसएसपी को शासन के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही होटल, होमस्टे और रेस्टोरेंट की नियमित जांच तथा वीकेंड पर संयुक्त निगरानी तुरंत प्रभाव से मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
कैंची धाम में बढ़ती लोकप्रियता के बीच प्रशासन की यह पहल भीड़ और जाम की समस्या को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब यह देखना होगा कि प्री-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था को शासन से कब मंजूरी मिलती है और इसे किस स्वरूप में लागू किया जाता है।





