उत्तराखंड

CM Dhami के आदेशों के बाद तैयारी शुरू, अब पूरे साल होगी आदि कैलास यात्रा

Gulabi Jagat
7 Aug 2026 4:21 PM IST
CM Dhami के आदेशों के बाद तैयारी शुरू, अब पूरे साल होगी आदि कैलास यात्रा
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पिथौरागढ़। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद अब प्रतिकूल मौसम और आपात परिस्थितियों को छोड़कर आदि कैलास यात्रा को वर्षभर संचालित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस संबंध में पिथौरागढ़ जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यात्रा को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम बनाना है।

जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप आदि कैलास यात्रा को केवल एक मौसमी धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे पूरे वर्ष संचालित करने के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचे का विकास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए यात्रा प्रबंधन को आधुनिक और व्यवस्थित बनाया जाएगा।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आदि कैलास यात्रा का संचालन इस प्रकार किया जाएगा कि पारंपरिक कैलास मानसरोवर यात्रा पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। दोनों यात्राओं के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। अधिकारियों का मानना है कि इससे पिथौरागढ़ जिले की पहचान धार्मिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में और मजबूत होगी।

यात्रा को वर्षभर संचालित करने के लिए जिला प्रशासन ने सड़क, पेयजल, बिजली, मोबाइल एवं संचार नेटवर्क, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग, स्वच्छता, भोजन, आवास, आपदा प्रबंधन और यात्री सहायता केंद्रों सहित सभी आवश्यक सुविधाओं का विस्तृत खाका तैयार करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित विभागों से कहा गया है कि वे समयबद्ध तरीके से योजनाओं को लागू करें और आपसी समन्वय के साथ कार्य करें ताकि यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं को निर्बाध सुविधाएं मिल सकें।

जिलाधिकारी ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को पूरे वर्ष सक्रिय बनाए रखने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। होटल व्यवसाय, होमस्टे, परिवहन, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प, धार्मिक पर्यटन, गाइड सेवाएं और छोटे व्यापारियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे, जिससे पलायन जैसी समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।

उत्तराखंड सरकार पिछले कुछ वर्षों से धार्मिक पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। चारधाम यात्रा, मानसखंड मंदिर माला मिशन, सीमांत पर्यटन और आध्यात्मिक स्थलों के विकास के बाद अब आदि कैलास यात्रा को पूरे वर्ष संचालित करने की पहल भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

आदि कैलास क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान तब मिली जब अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां का दौरा किया। प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद इस क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई। पर्यटन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि प्रधानमंत्री के दौरे से पहले यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या सीमित थी, लेकिन उनके दौरे के बाद देशभर से श्रद्धालुओं और पर्यटकों की रुचि तेजी से बढ़ी।

पर्यटन विभाग के उप निदेशक अतुल भंडारी के अनुसार वर्ष 2023 में आदि कैलास क्षेत्र में 17,408 पर्यटक पहुंचे थे। इसके बाद पर्यटन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई और 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,25,277 तक पहुंच गई। चालू वर्ष में भी पर्यटकों की संख्या 76,930 से अधिक हो चुकी है। विभाग का अनुमान है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहा तो वर्ष समाप्त होने तक यह आंकड़ा डेढ़ लाख से अधिक हो सकता है।

पर्यटकों की बढ़ती संख्या का सबसे अधिक लाभ स्थानीय निवासियों को मिला है। सरकार की होमस्टे नीति और पर्यटन को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के कारण सीमांत गांवों में बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घरों को होमस्टे में परिवर्तित किया है। वर्तमान में इस क्षेत्र में 550 से अधिक होमस्टे संचालित होने की जानकारी सामने आई है। इससे स्थानीय परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और पर्यटन आधारित आजीविका का एक मजबूत मॉडल विकसित हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यात्रा पूरे वर्ष संचालित होती है तो पिथौरागढ़ के साथ-साथ धारचूला, गुंजी, नाभीढांग और आसपास के सीमांत क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक हस्तशिल्प, ऊनी वस्त्र, जैविक कृषि उत्पाद और सांस्कृतिक पर्यटन को भी नया बाजार मिलेगा। इससे सीमांत क्षेत्रों का समग्र विकास संभव होगा।

हालांकि प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यात्रा का संचालन मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। भारी बर्फबारी, भूस्खलन, बादल फटना या अन्य प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर यात्रा को अस्थायी रूप से रोका जा सकेगा। इसके लिए आपदा प्रबंधन तंत्र को भी मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है।

धार्मिक पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि आदि कैलास को वर्षभर खुला रखने का निर्णय केवल पर्यटन नहीं बल्कि सीमांत विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे भारत-नेपाल-तिब्बत सीमा से जुड़े क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को गति मिलेगी और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। यदि सभी विभाग तय समय पर तैयारियां पूरी कर लेते हैं तो आने वाले समय में आदि कैलास यात्रा उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन का एक नया और स्थायी आकर्षण बन सकती है।

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