उत्तराखंड

अंकिता भंडारी केस में फिर गरमाई सियासत

Ratna Netam
16 Oct 2026 6:27 PM IST
अंकिता भंडारी केस में फिर गरमाई सियासत
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देहरादून। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति का विरोध करने पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित कांग्रेस के लगभग 30 नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई गुरुवार, 15 अक्टूबर को देहरादून स्थित लोक भवन के मुख्य द्वार के बाहर हुए विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में की गई है। कांग्रेस नेताओं ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग की थी।पुलिस ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह समेत अन्य नेताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 132 और 223 के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं का संबंध सरकारी कर्मचारी को कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए बल प्रयोग तथा लोक सेवक के विधिवत जारी आदेश की अवहेलना से है।
लोक भवन के बाहर कांग्रेस नेताओं ने किया प्रदर्शन
गुरुवार को देहरादून में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता लोक भवन के मुख्य गेट के बाहर एकत्र हुए। उन्होंने दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति का विरोध करते हुए नारेबाजी की।प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, हरक सिंह रावत और प्रीतम सिंह सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए।कांग्रेस नेताओं का कहना था कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सवालों का समाधान किए बिना दुष्यंत गौतम को संवैधानिक पद पर नियुक्त करना उचित नहीं है। पार्टी ने इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
पुलिस बैरिकेडिंग को लेकर बढ़ा तनाव
लोक भवन के बाहर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की थी।जानकारी के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेडिंग पार कर लोक भवन की ओर बढ़ने का प्रयास किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन गई।पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया और कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया।प्रदर्शन के बाद पुलिस ने संबंधित नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान निर्धारित प्रतिबंधों का उल्लंघन किया गया और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा पहुंचाई गई।
हिरासत में लिए गए थे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत
प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था।हिरासत में लिए जाने के बाद उन्होंने कहा कि पुलिस को ऐसा करने का अधिकार है और उसने अपनी कार्रवाई की है। उन्होंने यह भी कहा कि आगे की रणनीति पर कांग्रेस नेता विचार करेंगे।हरीश रावत ने अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग जारी रखने का संकेत दिया।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
दुष्यंत कुमार गौतम पहले भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी रह चुके हैं। उन्हें सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद कांग्रेस और अंकिता भंडारी के परिजनों की ओर से विरोध जताया गया है।कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि अंकिता भंडारी मामले से जुड़ी जांच और कथित वीआईपी की पहचान को लेकर अभी सवाल बने हुए हैं।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्यपाल नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए इसे अंकिता भंडारी के परिवार की भावनाओं से जुड़ा मामला बताया।हालांकि, कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप अपने आप में दुष्यंत गौतम की किसी आपराधिक संलिप्तता को साबित नहीं करते।
अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग तेज
सितंबर 2022 में उत्तराखंड की 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या का मामला सामने आया था। वह ऋषिकेश क्षेत्र के एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं।इस हत्याकांड के बाद पूरे प्रदेश में विरोध-प्रदर्शन हुए थे। मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर भी लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं।हाल के दिनों में अंकिता के परिजनों ने भी न्याय की मांग को लेकर विरोध तेज किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने परिवार की मांगों का समर्थन किया है।
FIR के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
हरीश रावत और अन्य कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज होने से उत्तराखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।कांग्रेस का कहना है कि वह अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग जारी रखेगी। वहीं, पुलिस ने लोक भवन के बाहर हुए प्रदर्शन के दौरान कथित कानून उल्लंघन को लेकर कार्रवाई की है।फिलहाल एफआईआर दर्ज होने का अर्थ आरोप साबित होना नहीं है। मामले में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी।
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