उत्तराखंड

एक बैंक खाता, 18 राज्य और 65 साइबर ठगी की शिकायतें

Rajeshwari Nishad
13 Oct 2026 12:59 PM IST
एक बैंक खाता, 18 राज्य और 65 साइबर ठगी की शिकायतें
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रुद्रपुर। खालसा डिजिटल स्टूडियो फर्म से जुड़े एक बैंक खाते के खिलाफ देश के 18 राज्यों से साइबर धोखाधड़ी की 65 शिकायतें दर्ज होने का मामला सामने आया है। गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल और जेएमआइएस पर उपलब्ध विवरण के आधार पर पुलिस ने मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस बैंक खाते में हुए लेन-देन, धनराशि के स्रोत और उसके अंतिम गंतव्य की जानकारी जुटाएगी। इसके साथ ही फर्म के तीनों अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
मामले के सामने आने के बाद संबंधित बैंक खाते की गतिविधियां पुलिस जांच के दायरे में आ गई हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि खाते में अलग-अलग माध्यमों से कितनी धनराशि आई, उसका इस्तेमाल कहां किया गया और क्या इन लेन-देन का संबंध दर्ज साइबर अपराध की शिकायतों से है। हालांकि, शिकायतों की संख्या के आधार पर अभी किसी व्यक्ति या फर्म को दोषी नहीं माना जा सकता। पुलिस की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
गृह मंत्रालय के पोर्टल पर मिलीं 65 शिकायतें
ट्रांजिट कैंप कोतवाली में तैनात एएसआइ रमेश चंदोला के अनुसार, गृह मंत्रालय की ओर से संचालित समन्वय पोर्टल पर खालसा डिजिटल स्टूडियो फर्म से संबंधित बैंक खाते के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर कुल 65 शिकायतें दर्ज मिली हैं। ये शिकायतें देश के 18 राज्यों से संबंधित बताई जा रही हैं।
पोर्टल पर उपलब्ध विवरण के आधार पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की है। अलग-अलग राज्यों से शिकायतें सामने आने के कारण जांच में बैंकिंग रिकॉर्ड और साइबर अपराध से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रहने की संभावना है।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की जानकारी संबंधित एजेंसियों तक पहुंचती है। ऐसे मामलों में शिकायतों के आधार पर संदिग्ध बैंक खातों और धनराशि के लेन-देन की जांच की जाती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित धोखाधड़ी में किस प्रकार के बैंकिंग माध्यमों का इस्तेमाल हुआ।
बैंक खाते के लेन-देन की होगी जांच
पुलिस की प्राथमिक जांच में संबंधित बैंक खाते की गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जांच अधिकारी खाते में जमा हुई रकम, अलग-अलग खातों में भेजी गई धनराशि और लेन-देन की समयावधि से जुड़े रिकॉर्ड का परीक्षण कर सकते हैं।
इस दौरान बैंक से संबंधित दस्तावेज, खाते के संचालन का विवरण और उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड जुटाना महत्वपूर्ण होगा। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि खाते में आने वाली रकम किन स्रोतों से प्राप्त हुई और बाद में उसे किन खातों या माध्यमों से आगे भेजा गया।
यदि अलग-अलग राज्यों में दर्ज शिकायतों के लेन-देन का संबंध इसी बैंक खाते से मिलता है, तो जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, धनराशि के हस्तांतरण से जुड़े अन्य बैंक खातों और संबंधित व्यक्तियों की जानकारी भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
साइबर धोखाधड़ी के मामलों में कई बार धनराशि एक खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित की जाती है। ऐसे में पैसे के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना जांच की महत्वपूर्ण कड़ी होती है। हालांकि, इस मामले में धनराशि की कुल मात्रा और लेन-देन के वास्तविक स्वरूप की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
फर्म के तीन अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की भूमिका भी जांच के दायरे में
खालसा डिजिटल स्टूडियो फर्म के बैंक खाते से जुड़े तीनों अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की भूमिका की भी जांच की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि बैंक खाते का संचालन कौन करता था, लेन-देन के लिए किसकी अनुमति या हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया जाता था और खाते से संबंधित वित्तीय गतिविधियों की जानकारी किन लोगों को थी।
जांच के दौरान यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित व्यक्तियों की भूमिका केवल बैंक खाते के संचालन तक सीमित थी या उन्हें कथित धोखाधड़ी से जुड़े लेन-देन की जानकारी थी। इन सवालों के जवाब बैंकिंग दस्तावेजों, उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और संबंधित लोगों से पूछताछ के आधार पर तलाशे जा सकते हैं।
हालांकि, किसी बैंक खाते में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता होने मात्र से किसी व्यक्ति की साइबर धोखाधड़ी में संलिप्तता साबित नहीं होती। इसके लिए पुलिस को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर भूमिका स्पष्ट करनी होगी।
18 राज्यों से शिकायतें मिलने के बाद बढ़ा जांच का दायरा
एक ही बैंक खाते के खिलाफ 18 राज्यों से शिकायतें दर्ज होने का तथ्य इस मामले को महत्वपूर्ण बनाता है। अलग-अलग राज्यों से शिकायतें मिलने पर जांच एजेंसियों को शिकायतों के बीच संभावित संबंधों और बैंक खाते के इस्तेमाल के तरीके की पड़ताल करनी पड़ती है।
पुलिस शिकायतों में दर्ज विवरण का मिलान बैंक खाते के लेन-देन से कर सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि शिकायतें अलग-अलग घटनाओं से जुड़ी हैं या उनके पीछे कोई साझा वित्तीय कड़ी मौजूद है।
मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई जांच के दौरान मिलने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित बैंक से अतिरिक्त जानकारी जुटाने और अन्य संबंधित पक्षों से पूछताछ करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
जांच के बाद स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल पुलिस ने पोर्टल पर उपलब्ध शिकायतों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब बैंक खाते के संचालन, धनराशि के स्रोत और उसके गंतव्य के साथ-साथ फर्म के तीनों अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित खाते का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में हुआ और दर्ज शिकायतों के साथ उसका क्या संबंध है। पुलिस की जांच पूरी होने और पर्याप्त साक्ष्य सामने आने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी।
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