भारत
SIR विवाद: राहुल-अखिलेश समेत 11 विपक्षी नेताओं की याचिका में 14 खामियां, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने मांगे जरूरी दस्तावेज
jantaserishta.com
13 Oct 2026 12:40 PM IST

x
नई दिल्ली: वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर दायर विपक्षी नेताओं की याचिका में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने करीब 14 खामियां बताई हैं। राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव समेत 11 नेताओं की ओर से दायर इस याचिका में मतदाता सूची से नाम हटाने और गड़बड़ियों की जांच की मांग की गई है। रजिस्ट्री ने दस्तावेजों की कमियों, सहमति और कोर्ट फीस से जुड़ी आपत्तियां दर्ज की हैं। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के मामले में दिल्ली पुलिस ने दो FIR दर्ज की हैं और विपक्ष आगे की रणनीति बनाने की तैयारी में है।
विपक्ष की याचिका में रजिस्ट्री ने बताईं करीब 14 खामियां
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी नेताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कई तकनीकी और दस्तावेजी कमियां सामने आई हैं। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका में करीब 14 खामियां बताई हैं।
समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, रजिस्ट्री ने याचिका दाखिल करने वाले वकील से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट कॉपी जमा करने को कहा है। इसके अलावा, याचिका दाखिल करने वाले 11 नेताओं में से नौ की ओर से इसे दायर करने की लिखित सहमति नहीं दी गई थी।
रजिस्ट्री ने दस्तावेजों को लेकर भी आपत्ति जताई। उसके मुताबिक, याचिका के साथ लगाए गए कुछ कागजात के पन्ने साफ नहीं हैं, जबकि कुछ पन्ने गायब हैं। इसके अलावा, निर्धारित कोर्ट फीस से 220 रुपये कम जमा किए गए हैं। यह याचिका 12 अक्टूबर को दाखिल की गई थी। इसमें भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है।
SIR के दौरान हटाए गए नामों की स्वतंत्र जांच की मांग
विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर अदालत का रुख किया है। सोमवार को राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेता याचिका दाखिल करने के लिए मार्च करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।
याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों को भी शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़े इन बदलावों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों और मांगों पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के मामले में दो FIR दर्ज
विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने के मामले में दिल्ली पुलिस ने दो प्राथमिकी दर्ज की हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये मामले बाराखंभा रोड और तिलक मार्ग थानों में दर्ज किए गए हैं। यह मार्च सोमवार को उस समय निकाला गया था, जब विपक्षी नेता SIR से जुड़े मुद्दे पर अपनी याचिका दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। इससे पहले विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी शिकायतें उठाई थीं।
राहुल गांधी ने मंगलवार शाम को विपक्षी सांसदों, सिविल सोसाइटी के सदस्यों और छात्र संगठनों को सुनहरी बाग रोड स्थित अपने आवास पर बैठक के लिए आमंत्रित किया है। इस बैठक को 'हाई टी' का नाम दिया गया है।
बैठक में मतदाता सूची से जुड़े विवाद और कथित वोट चोरी के आरोपों के खिलाफ साझा आंदोलन की आगे की योजना पर चर्चा होने की उम्मीद है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी चर्चा का हिस्सा हो सकती है।
इससे पहले मंगलवार दोपहर विपक्षी सांसद प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए विपक्ष अपनी आगे की रणनीति और मांगों को सामने रख सकता है।
राष्ट्रपति से मुलाकात से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
10 अक्टूबर: विपक्षी सांसदों ने संसद से राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च किया था। राहुल गांधी, ममता बनर्जी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत 10 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात की, जबकि अन्य सांसद विजय चौक पर धरने पर बैठे थे। मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने वोट चोरी के आरोप लगाए और कहा कि विपक्ष सोमवार को सुप्रीम कोर्ट जाएगा।
11 अक्टूबर: INDIA ब्लॉक के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखा था। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपनी मांगों पर ज्ञापन सौंपने के लिए समय मांगा था। हालांकि, CJI ने मिलने से इनकार करते हुए उन्हें अदालत में याचिका दाखिल करने का रास्ता बताया।
12 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और उस पर लगी पाबंदियों को लेकर CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह उनका मुद्दा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम नागरिक और निर्वाचित जनप्रतिनिधि, दोनों सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं। साथ ही, उन्होंने विचाराधीन मामलों पर चर्चा को न्यायिक मर्यादा के खिलाफ बताया।
अब विपक्ष की याचिका में सामने आई खामियों को दूर करना और जरूरी दस्तावेज जमा करना आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।
jantaserishta.com
भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।
Next Story





