उत्तराखंड

उत्तराखंड में भाजपा को बड़ा झटका, पूर्व विधायक यशपाल बेनाम ने छोड़ी पार्टी

Kavita2
19 Oct 2026 9:36 AM IST
उत्तराखंड में भाजपा को बड़ा झटका, पूर्व विधायक यशपाल बेनाम ने छोड़ी पार्टी
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पौड़ी। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी को पौड़ी जिले में राजनीतिक झटका लगा है। पूर्व विधायक और पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष यशपाल बेनाम ने रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। करीब आठ वर्षों तक पार्टी से जुड़े रहने के बाद उन्होंने व्यक्तिगत कारणों और संगठन के भीतर असहज महसूस करने का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया। बेनाम ने कहा कि उन्होंने आठ वर्षों तक पार्टी के निर्देशों का पालन किया, लेकिन अब वह इस स्थिति में आगे नहीं रहना चाहते। उन्होंने जल्द ही अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर बड़ी घोषणा करने की बात भी कही है। उनके इस फैसले के बाद पौड़ी सहित उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

आठ साल बाद भाजपा से अलग हुए यशपाल बेनाम

यशपाल बेनाम ने पौड़ी में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान भाजपा छोड़ने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि ठीक आठ साल पहले 18 अक्टूबर 2018 को उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। संयोग से आठ साल बाद उसी तारीख को पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया।

बेनाम ने कहा कि भाजपा में रहते हुए उन्होंने संगठन के निर्देशों का पालन किया और अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। हालांकि, समय के साथ उन्हें महसूस होने लगा कि पार्टी के भीतर उनकी राजनीतिक भूमिका और विचारों को अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी छोड़ने का निर्णय उन्होंने अपने व्यक्तिगत कारणों से लिया है। उनके मुताबिक, यह फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि लंबे समय से बनी परिस्थितियों के बीच उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर विचार किया।

पार्टी में घुटन महसूस करने की कही बात

इस्तीफे के बाद यशपाल बेनाम ने भाजपा के भीतर अपने अनुभवों को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पार्टी में कई नेता उन्हें सही तरीके से समझ नहीं पाए। इसके कारण वह खुद को असहज महसूस कर रहे थे।

बेनाम के अनुसार, उन्होंने हमेशा अपनी राजनीतिक विचारधारा और सिद्धांतों के अनुसार काम किया है। उनका कहना था कि वह ऐसी परिस्थितियों में काम करने के अभ्यस्त नहीं हैं, जहां उन्हें अपनी भूमिका सीमित महसूस हो।

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा में आठ साल बिताने के बावजूद उनकी राजनीतिक क्षमताओं का पूरा उपयोग नहीं किया गया।

हालांकि, ये उनके व्यक्तिगत अनुभव और आरोप हैं। पार्टी नेतृत्व की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हुई है।

निर्दलीय विधायक रह चुके हैं यशपाल बेनाम

यशपाल बेनाम पौड़ी की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान केवल किसी एक दल के सहारे नहीं, बल्कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी बनाई है।

वर्ष 2007 में वह पौड़ी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक चुने गए थे। इसके अलावा वह नगर पालिका अध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं।

बेनाम दो बार निर्दलीय और एक बार भाजपा से नगर पालिका अध्यक्ष रहे हैं।

स्थानीय राजनीति में उनका अनुभव विधानसभा से लेकर नगर पालिका स्तर तक फैला हुआ है। इसी कारण भाजपा से उनका इस्तीफा पौड़ी जिले की राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बोले- जल्द करूंगा अगले कदम का ऐलान

भाजपा से इस्तीफा देने के बाद यशपाल बेनाम ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं की है।

उन्होंने कहा कि वह जल्द ही अपने अगले राजनीतिक कदम के संबंध में फैसला लेंगे और इसकी सार्वजनिक घोषणा करेंगे।

उनके इस बयान के बाद यह चर्चा शुरू हो गई है कि वह किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होंगे या स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक गतिविधियां जारी रखेंगे।

हालांकि, बेनाम ने अभी किसी अन्य पार्टी में जाने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर सामने आ रही संभावनाओं को फिलहाल अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल

उत्तराखंड में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के भीतर संगठनात्मक बदलाव और नेताओं के दल बदलने की घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

राज्य में भाजपा लगातार दो विधानसभा चुनाव जीत चुकी है। दूसरी ओर कांग्रेस सहित विपक्षी दल आगामी चुनाव के लिए संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।

ऐसे राजनीतिक माहौल में पौड़ी के पूर्व विधायक का भाजपा से अलग होना जिले की राजनीति में नया घटनाक्रम है।

हालांकि, किसी नेता के इस्तीफे का चुनावी परिणामों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों और मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगा।

पौड़ी की स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं बेनाम

पौड़ी जिले में यशपाल बेनाम की पहचान लंबे समय से स्थानीय जनप्रतिनिधि के रूप में रही है।

विधायक और नगर पालिका अध्यक्ष के तौर पर काम करने के अनुभव के कारण वह स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं।

नगर पालिका की राजनीति में उनकी सक्रियता और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने का अनुभव उनके राजनीतिक सफर के महत्वपूर्ण पहलू रहे हैं।

भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने पार्टी के साथ अपनी राजनीतिक गतिविधियां जारी रखीं, लेकिन अब आठ साल बाद अलग रास्ता चुनने का फैसला किया है।

उनके इस्तीफे के बाद स्थानीय भाजपा संगठन की प्रतिक्रिया और उनके समर्थकों का अगला रुख महत्वपूर्ण होगा।

उत्तराखंड में दल बदल को लेकर भी चर्चा

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड में नेताओं की राजनीतिक सक्रियता बढ़ रही है।

पौड़ी में यशपाल बेनाम के इस्तीफे के साथ ही रुद्रप्रयाग जिले में जिला पंचायत सदस्य ग्यालू लाल के राजनीतिक फैसले की भी चर्चा सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, ग्यालू लाल ने भाजपा में शामिल होने के कुछ ही समय बाद कांग्रेस में लौटने की घोषणा की।

हालांकि, दोनों घटनाएं अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ी हैं और इन्हें एक ही कारण का परिणाम नहीं माना जा सकता।

इन घटनाक्रमों ने विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की स्थानीय राजनीति में नेतृत्व और दलों के बीच बदलते संबंधों को चर्चा में ला दिया है।

भाजपा संगठन की प्रतिक्रिया पर नजर

यशपाल बेनाम के इस्तीफे के बाद भाजपा संगठन की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर भी नजर बनी हुई है।

उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से पार्टी छोड़ने की बात कही है, लेकिन संगठन में अपनी भूमिका को लेकर असंतोष भी व्यक्त किया है।

ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा नेतृत्व उनके बयान और इस्तीफे को लेकर क्या रुख अपनाता है।

फिलहाल इस संबंध में पार्टी की ओर से किसी बड़े संगठनात्मक बदलाव की पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीतिक भविष्य को लेकर बनी उत्सुकता

यशपाल बेनाम के इस्तीफे ने पौड़ी की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर उन्होंने भाजपा के साथ आठ साल पुराने संबंध समाप्त कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर अपने अगले कदम को लेकर उत्सुकता बनाए रखी है।

उनके सामने किसी राजनीतिक दल के साथ नई शुरुआत करने या स्वतंत्र राजनीतिक भूमिका अपनाने जैसे विकल्प मौजूद हैं। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय उन्हें ही लेना है।

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले उनका अगला राजनीतिक फैसला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 18 अक्टूबर 2018 को भाजपा में शामिल होने वाले यशपाल बेनाम ने 18 अक्टूबर 2026 को पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया। अब उनके समर्थकों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर उनकी अगली घोषणा पर है।

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