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Haridwar हरिद्वार: बागेश्वर धाम के प्रमुख एवं कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के तिरंगा वाले बयान पर धार्मिक और राजनीतिक बयानबाजी तेज है। इसे लेकर संतों ने मंगलवार को शास्त्री के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उत्तराखंड के ऋषिकेश से जगन्नाथ आश्रम के महंत लोकेश दास महाराज ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी बात है कि जब हम बटेंगे, तब कटेंगे। राजनीतिक पार्टियों ने हमें बहुत सी जातियों में बांट दिया है, लेकिन जब मैं मुसलमानों की तरफ देखता हूं तो उनकी कोई जाति नहीं होती।
उन्होंने कहा, "काशी में जब मस्जिद को तोड़ा जा रहा था तो उस समय मात्र तीन ईटें गिरी थीं, जिसके बाद 10,000 मुसलमान वहां इकट्ठे हो गए थे, लेकिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ कैसा व्यवहार हुआ। उन्हें कैसे घसीटा गया, उसको लेकर कोई आवाज नहीं उठाता। ऐसा इसलिए क्योंकि हम एक नहीं हैं। मुझे लगता है कि हम सभी को एक होना चाहिए। किसी भी धर्माचार्य के ऊपर कोई आपत्ति आए, सभी को एकजुट होना चाहिए। शंकराचार्य हमारे भारत और सनातन के रीढ़ की हड्डी हैं। ऐसे में हम सभी को इकट्ठा होकर उनका समर्थन करना चाहिए।
लोकेश दास महाराज ने कहा, "जो ब्राह्मणों के नेता बनते हैं, आज वे कहां गए। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए व्यवहार पर किसी ने भी आवाज नहीं उठाई, जिस पर मेरी आपत्ति है। कुछ लोग जातिवाद पर वोट मांगते हैं, लेकिन जब आपत्ति आई तो किसी ने भी आवाज नहीं उठाई। अगर हम जातिवाद में बटेंगे तो उसका फायदा मुसलमानों को होगा। आज तिरंगे पर चांद की बात हो रही है, लेकिन अगर हम किसी दिन बटेंगे, तो ऐसा हो भी सकता है।
बड़ा अखाड़ा उदासी महामंडलेश्वर हरि चेतानंद ने कहा, "बांग्लादेश में हो रही घटनाएं हमारे देश, हमारे लोगों और लाखों हिंदुओं के लिए चिंता का विषय हैं। जिस तरह से वहां हिंदुओं को घसीटा जा रहा है, पीटा जा रहा है और जलाया जा रहा है, वह बहुत दुखद है। इसी संदर्भ में धीरेंद्र शास्त्री ने एक बयान दिया है। चूंकि, धीरेंद्र शास्त्री एक अच्छे प्रवक्ता और कथावाचक हैं, इसलिए उन्होंने यह बयान सोच-समझकर ही दिया होगा, और यह मानने का कोई कारण नहीं है कि यह गलत है। बता दें कि बांदा में एक कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि अगर जिस दिन तिरंगे में चांद आ गया तो उस दिन न शर्मा और न वर्मा बचेगा, इसलिए हिंदुओं की पहचान जाति से नहीं, धर्म से होनी चाहिए।
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