उत्तराखंड

जानिए क्यों खास है देहरादून का ग्राउंड वाटर, इसका 'अमृत्व' खत्म कर रहा RO

Gulabi Jagat
29 May 2022 2:51 PM GMT
जानिए क्यों खास है देहरादून का ग्राउंड वाटर, इसका अमृत्व खत्म कर रहा RO
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देहरादून का ग्राउंड वाटर
देहरादून: अगर आप देहरादून में रहते हैं और अपने घर में आरओ का इस्तेमाल करते हैं तो ये खबर आपके लिए खास है. घर में लगा आरओ पैसों के साथ-साथ पानी से मिलने वाले शरीर के पोषक तत्व भी आप से छीन रहा है. ऐसा हम नहीं जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है. देहरादून के ग्राउंड वाटर को लेकर जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि देहरादून में मिलने वाला ग्राउंड वाटर बेहद खास तरह का है जो पूरे देश में मिलने वाले ग्राउंड वाटर से काफी अलग है. देहरादून के ग्राउंड वाटर में क्या है खास आइये आपको बताते हैं.
देहरादून का ग्राउंड वाटर क्यों है खास: देहरादून के ग्राउंड वाटर को लेकर सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (CGWB) के रीजनल डायरेक्टर प्रशांत कुमार राय ने कहा कि देश के अन्य राज्यों के ग्राउंड वाटर की तुलना में देहरादून का ग्राउंड वाटर काफी शुद्ध और प्राकृतिक तत्व से भरपूर है.
विभागीय शोध के अनुसार अन्य सभी राज्यों के ग्राउंड वाटर में लवणता यानी सलिनिटी जिससे की आम भाषा में सिल्ट भी कहा जाता है वह 14 हजार से 15 हजार के मानक पर पायी जाती है. इसकी तुलना में देहरादून के ग्राउंड वाटर में स्वीट बेहद नगर मानक पर 400 से 500 पर पाया जाता है, जो कि बेहद अच्छी श्रेणी का माना जाता है. इसके अलावा ग्राउंड वाटर में आयरन की मौजूदगी भी शरीर के लिए हानिकारक होती है. यह भी देहरादून के ग्राउंड वाटर में सबसे कम पाई जाती है. इसके अलावा क्लोराइड और आर्सेनिक भी देहरादून के ग्राउंड वाटर में बेहद कम मात्रा में पाया जाता है.
देहरादून में RO की नहीं जरूरत: ग्राउंड वाटर बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि देहरादून में आरओ सिस्टम लगाने की जरूरत नहीं है. यहां घरों में केवल सामान्य फिल्टर ही काफी है. देहरादून में मौजूद सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के रीजनल डायरेक्टर प्रशांत कुमार राय ने बताया कि आजकल आरओ सिस्टम लगाने का फैशन चला हुआ है. लोग पानी की बारीकियों को समझे बिना ही इसका इस्तेमाल करते हैं.
ग्राउंड वाटर बोर्ड के अधिकारी के अनुसार देहरादून में आरओ सिस्टम की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है. उनके अनुसार आरओ सिस्टम पानी को इतना कमजोर बना देता है कि उसमें से जो प्राकृतिक लाभदायक और उपयोगी तत्व होते हैं वो भी खत्म हो जाते हैं. अधिकारियों ने देहरादून के लोगों को घरों में आरओ न लगाने का सुझाव दिया है. उन्होंने बताया अगर आरओ लगाया भी गया है तो उसका टीडीएस कम से कम 150 निर्धारित किया जाना चाहिए.
पानी का कैल्शियम नहीं शरीर के लिए नुकसानदायक: इसके अलावा सामान्य तौर पर है यह भी कहा जाता है कि देहरादून में मिलने वाले ग्राउंड वाटर में कैल्शियम यानी कि चूने की काफी अधिक मात्रा मिलती है. केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार देहरादून के ग्राउंड वाटर में मिलने वाला कैल्शियम शरीर के लिए उतना ज्यादा नुकसानदायक नहीं देता.
RO सिस्टम की कहां है जरुरत: सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के शोध के अनुसार देहरादून में मिलने वाला ग्राउंड वाटर देवभूमि जैसा ही पवित्र है. इस पानी में विषैले तत्व बिल्कुल भी नहीं हैं. हालांकि, कैल्शियम को लेकर के जरूर कुछ बातें कही जाती है, मगर इससे कुछ ज्यादा नुकसान नहीं होता है. अधिकारियों के अनुसार पानी में सिल्क, आर्सेनिक और फ्लोराइड की मौजूदगी शरीर के लिए बेहद हानिकारक होती है. इन सभी से बचने के लिए आरओ सिस्टम लगाया जाता है. देहरादून के इलाकों में पाये जाने वाले ग्राउंड वाटर में इन तत्वों की मौजूदगी बेहद कम है. लिहाजा देहरादून जैसे शहर में आरओ सिस्टम लगाने की जरूरत नहीं है. आप एक सामान्य फिल्टर का उपयोग करके भी यहां के पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं.
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