उत्तराखंड

Kedarnath: यात्रा मार्ग पर घोड़ों और खच्चरों की आवाजाही पर प्रतिबंध जारी

Sarita
8 May 2025 8:36 AM IST
Kedarnath: यात्रा मार्ग पर घोड़ों और खच्चरों की आवाजाही पर प्रतिबंध जारी
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Kedarnath केदारनाथ: बीमारी से घोड़े-खच्चरों की मौत के बाद केदारनाथ यात्रा मार्ग पर इनके आवागमन पर लगाया गया प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेगा। राज्य के पशुपालन सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने बुधवार को बताया कि केदार घाटी में घोड़े-खच्चरों में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए स्थानीय लोगों, घोड़े-खच्चर व्यापारियों और अन्य संगठनों ने यात्रा मार्ग पर इनके आवागमन पर प्रतिबंध को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है, ताकि पशुओं में संक्रमण बढ़ने की स्थिति उत्पन्न न हो। राज्य के पशुपालन सचिव ने बताया कि यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों के पुनः संचालन के लिए जिला प्रशासन स्थानीय स्तर पर निर्णय लेगा।
पुरुषोत्तम ने बताया कि रविवार और सोमवार को यात्रा के दौरान 13 घोड़े-खच्चरों की मौत की जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि इनमें से आठ घोड़ों की मौत ‘डायरिया’ और पांच घोड़ों की मौत ‘एक्यूट कॉलिक’ के कारण हुई है। उन्होंने बताया कि इन घोड़ों के नमूने विस्तृत रिपोर्ट के लिए उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) भेजे गए हैं। अधिकारी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए यात्रा मार्ग पर 22 से अधिक डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है। उन्होंने बताया कि अस्वस्थ घोड़ों और खच्चरों को यात्रा मार्ग पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जबकि स्वस्थ घोड़ों को यात्रा मार्ग पर चलने की अनुमति तभी दी जाएगी, जब उनके नमूनों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आएगी।
वहीं, पुरुषोत्तम ने आगे बताया कि एक माह पहले रुद्रप्रयाग जिले के दो गांवों में घोड़ों और खच्चरों के नमूने लिए गए थे। इनमें से कुछ घोड़ों में इक्वाइन इंफ्लूएंजा के लक्षण मिले थे। उन्होंने बताया कि इसके बाद 30 अप्रैल तक 26 दिनों में रिकॉर्ड 16 हजार घोड़ों की जांच की गई। उन्होंने बताया कि इनमें से 152 घोड़ों और खच्चरों के सीरो नमूनों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई, लेकिन इनकी आरटीपीसीआर जांच निगेटिव पाई गई। साढ़े ग्यारह हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ धाम पहुंचने के लिए करीब 16 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। इस चढ़ाई वाले रास्ते को तय करने के लिए कुछ भक्तों को कुलियों, पालकियों या घोड़ों और खच्चरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
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