उत्तराखंड
तेंदुए के हमले में मासूम की मौत, सड़कों पर फूटा गुस्सा
Rajeshwari Nishad
5 Nov 2026 2:19 PM IST

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पौड़ी। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में गुलदार के हमले में मासूम बच्ची की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। वजली गांव में बच्ची की दर्दनाक मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने बुधवार को पौड़ी-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर खांड्यूसैंण के समीप करीब पांच घंटे तक जाम लगाकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार का खतरा बना हुआ है, लेकिन इसे रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। प्रदर्शन के दौरान जिलाधिकारी और संयुक्त मजिस्ट्रेट के मौके पर नहीं पहुंचने से ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ गई। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों को भी लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार 3 नवंबर की शाम खांड्यूसैंण क्षेत्र के वजली गांव में गुलदार ने घर के आंगन में खेल रही मासूम आरुषि पर हमला कर दिया था। हमले में बच्ची की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में मातम छा गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, आसपास के गांवों में भी भय और आक्रोश का माहौल बन गया।
घर के पास खेल रही मासूम पर गुलदार ने किया हमला
बताया जा रहा है कि मंगलवार शाम करीब छह बजे मासूम बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी। इसी दौरान अचानक गुलदार ने उस पर हमला कर दिया। घटना इतनी तेजी से हुई कि बच्ची को बचाने का मौका नहीं मिल सका।इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि आबादी वाले क्षेत्रों में गुलदार की गतिविधियां बढ़ने से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।घटना के बाद आसपास के गांवों में लोग अपने बच्चों को अकेले घर से बाहर भेजने से डर रहे हैं। विशेष रूप से शाम के समय ग्रामीणों में भय का माहौल है।
पांच घंटे तक जाम रहा पौड़ी-देवप्रयाग मार्ग
बच्ची की मौत से नाराज ग्रामीण बुधवार सुबह बड़ी संख्या में खांड्यूसैंण के पास एकत्रित हुए। इसके बाद उन्होंने पौड़ी-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर जाम लगा दिया।प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर वन विभाग और जिला प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। करीब पांच घंटे तक चले इस प्रदर्शन से मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ।ग्रामीणों ने मांग की कि क्षेत्र में सक्रिय गुलदार को जल्द पकड़ा जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था की जाए।प्रदर्शनकारियों का कहना था कि केवल आश्वासन देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्हें क्षेत्र में ठोस कार्रवाई चाहिए, ताकि किसी अन्य परिवार को ऐसी दुखद घटना का सामना न करना पड़े।
डीएम के नहीं पहुंचने पर बढ़ी नाराजगी
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और संयुक्त मजिस्ट्रेट के मौके पर नहीं पहुंचने को लेकर कड़ी नाराजगी जताई।ग्रामीणों का कहना था कि इतनी गंभीर घटना होने के बावजूद वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को स्वयं मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों की समस्याएं सुननी चाहिए थीं।प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वन्यजीवों के हमलों को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जा रही है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग दोहराई।
वन विभाग के अधिकारियों का किया घेराव
ग्रामीणों का आक्रोश उस समय और बढ़ गया, जब वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ महातिम यादव का घेराव किया। वहीं, तहसीलदार और वन विभाग के एसडीओ को कुछ समय के लिए रोककर रखे जाने की घटना भी सामने आई।इस दौरान अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कुछ स्थानों पर धक्का-मुक्की की भी जानकारी सामने आई है।बाद में अधिकारियों के आश्वासन पर रोके गए कर्मचारियों को छोड़ा गया।
गुलदार से सुरक्षा की मांग पर अड़े ग्रामीण
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग क्षेत्र में सक्रिय गुलदार को पकड़ने और आबादी वाले क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने की थी।ग्रामीणों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में गुलदार की बढ़ती गतिविधियां लोगों के सामान्य जीवन को प्रभावित कर रही हैं।ग्रामीणों ने वन विभाग से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, गश्त की व्यवस्था मजबूत करने और वन्यजीवों की गतिविधियों की जानकारी समय पर उपलब्ध कराने की मांग की।स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों के स्कूल जाने, महिलाओं के खेतों में काम करने और ग्रामीणों के रोजमर्रा के आवागमन के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
विधायक को भी झेलना पड़ा विरोध
घटना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा।पौड़ी विधायक राजकुमार पोरी के घटनास्थल पर पहुंचने के दौरान नाराज ग्रामीणों ने उनका घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने विधायक के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए गुलदार के खतरे से स्थायी राहत दिलाने की मांग की।इस दौरान विधायक के वाहन के आसपास बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा इंतजाम मजबूत कराने की मांग की।
पहाड़ी क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष गंभीर चुनौती
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष लगातार चिंता का विषय बना हुआ है।जंगलों से सटे गांवों में गुलदार की मौजूदगी के कारण लोगों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। कई स्थानों पर घर जंगलों और झाड़ियों के नजदीक होने के कारण वन्यजीवों का आबादी तक पहुंचना संभव होता है।विशेषज्ञों के अनुसार, वन्यजीवों के हमलों को रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, नियमित निगरानी, जागरूकता और त्वरित बचाव व्यवस्था महत्वपूर्ण है।हालांकि, वजली गांव की घटना में गुलदार के आबादी तक पहुंचने की वास्तविक परिस्थितियों के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
अधिकारियों से अभद्रता के आरोप में मामला दर्ज
इसी बीच प्रदर्शन के दौरान वन विभाग के अधिकारियों के साथ कथित मारपीट और अभद्रता का मामला भी सामने आया है।रिपोर्ट के अनुसार, डीएफओ के साथ कथित मारपीट तथा एसडीओ और तहसीलदार को रोककर रखने के आरोपों में कांग्रेस नेता विनोद दनौसी सहित अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।बताया गया है कि कथित मारपीट में घायल डीएफओ का जिला अस्पताल में उपचार कराया गया। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम सत्यता जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।मासूम की मौत के बाद पूरे क्षेत्र में दहशतवजली गांव में मासूम आरुषि की मौत ने ग्रामीणों को गहरे सदमे में डाल दिया है। घटना के बाद लोग अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग केवल घटना के बाद कार्रवाई करने तक सीमित न रहे, बल्कि भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए प्रभावी योजना तैयार करे।
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