
x
गणेश मूर्तियों पर महंगाई
देहरादून : गणेश चतुर्थी की तैयारियों के बीच इस बार महंगाई का असर भगवान गणेश की मूर्तियों पर भी दिखाई दे रहा है। उत्तराखंड में गणपति बप्पा की मूर्तियों की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। मूर्ति बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, रंग, सजावटी सामान और परिवहन की लागत बढ़ने को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है। गणेश उत्सव को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। छोटी मूर्तियों से लेकर सार्वजनिक पंडालों में स्थापित की जाने वाली बड़ी प्रतिमाओं तक की मांग है। हालांकि इस बार श्रद्धालुओं को बप्पा को घर लाने के लिए पहले से ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ सकती है।
25 प्रतिशत तक बढ़े मूर्तियों के दाम
मूर्ति कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, कच्चे माल और सजावट के सामान की कीमत बढ़ने का सीधा असर गणेश प्रतिमाओं की लागत पर पड़ा है। अलग-अलग आकार और डिजाइन की मूर्तियों के दाम में अंतर है, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में कई प्रतिमाएं करीब 20 से 25 प्रतिशत तक महंगी बताई जा रही हैं। मूर्तिकारों का कहना है कि प्रतिमा तैयार करने में कई दिनों की मेहनत लगती है। मिट्टी से लेकर रंग और सजावट तक की लागत बढ़ने के कारण उन्हें भी कीमतों में बदलाव करना पड़ा है।
बाजारों में बढ़ने लगी रौनक
गणेश चतुर्थी नजदीक आने के साथ ही बाजारों में गणपति प्रतिमाओं की दुकानें सजने लगी हैं। श्रद्धालु अपने घर, प्रतिष्ठान और पंडाल के हिसाब से अलग-अलग आकार की मूर्तियां पसंद कर रहे हैं। कोई छोटी और सादगीपूर्ण प्रतिमा खरीद रहा है तो कोई आकर्षक सजावट वाली बड़ी मूर्ति की बुकिंग करा रहा है। महंगाई के बावजूद गणेश उत्सव को लेकर लोगों के उत्साह में कमी नजर नहीं आ रही है। कई श्रद्धालुओं ने पहले से ही अपनी पसंद की प्रतिमा बुक करा ली है।
कच्चे माल की बढ़ती कीमत बनी वजह
मूर्तियों की कीमत बढ़ने के पीछे कच्चे माल की महंगाई को महत्वपूर्ण कारण बताया जा रहा है। प्रतिमा बनाने में मिट्टी, रंग, कपड़ा और विभिन्न सजावटी सामग्रियों का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा एक स्थान से दूसरे स्थान तक मूर्तियां पहुंचाने में परिवहन का खर्च भी जुड़ता है। इन सभी खर्चों में बढ़ोतरी होने से मूर्तिकारों की उत्पादन लागत बढ़ी है। इसका असर आखिरकार बाजार में बिकने वाली मूर्तियों की कीमत पर दिखाई दे रहा है।
ईको फ्रेंडली मूर्तियों की भी मांग
पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच ईको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं की मांग भी देखने को मिल रही है। प्राकृतिक मिट्टी और पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से तैयार मूर्तियों को कई श्रद्धालु प्राथमिकता दे रहे हैं। इन प्रतिमाओं का उद्देश्य विसर्जन के बाद जल स्रोतों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है। कई आयोजक भी अब सजावट से लेकर प्रतिमा तक पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।
महंगाई पर भारी आस्था
मूर्तियों की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद गणेश भक्त बप्पा के स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं। घरों और सार्वजनिक पंडालों में सजावट की योजना बनाई जा रही है। बाजार में पूजा सामग्री और सजावटी सामान की खरीदारी भी तेज होने लगी है। गणेश उत्सव के दौरान श्रद्धालु भगवान गणेश को सुख-समृद्धि और विघ्नों को दूर करने वाले देवता के रूप में पूजते हैं। ऐसे में महंगाई के बावजूद लोगों की आस्था और उत्साह बरकरार है। इस बार बप्पा का स्वागत जेब पर थोड़ा भारी जरूर पड़ सकता है, लेकिन बाजारों में बढ़ती भीड़ बता रही है कि त्योहार को लेकर उत्साह कम नहीं हुआ है।
Next Story





