उत्तराखंड
चारधाम यात्रा में हेली सेवाएं बंद, दो पायलट रखने के नियम पर अड़े ऑपरेटर
Rajeshwari Nishad
2 Nov 2026 10:27 PM IST

x
देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 30 अक्टूबर को हुए दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे में पायलट समेत छह लोगों की मौत के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की ओर से पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन के लिए लागू किए गए ट्विन पायलट नियम का हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने विरोध शुरू कर दिया है। नए सुरक्षा नियमों को लेकर ऑपरेटरों और विमानन नियामक के बीच मतभेद सामने आए हैं। इसी विरोध के चलते सोमवार को चारधाम यात्रा के लिए संचालित हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद रहीं। इससे हवाई मार्ग से यात्रा करने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।
हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने डीजीसीए और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के नए नियमों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन की व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियम बनाए जाने चाहिए। दूसरी ओर, हालिया दुर्घटना के बाद यात्रियों और पायलटों की सुरक्षा सुनिश्चित करना विमानन नियामक के सामने बड़ी चुनौती है।
30 अक्टूबर के हेलीकॉप्टर हादसे के बाद सख्ती
उत्तराखंड में 30 अक्टूबर को हुए हेलीकॉप्टर हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। इस दुर्घटना में पायलट समेत छह लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे।उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन सामान्य मैदानी इलाकों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां मौसम तेजी से बदलता है। ऊंचे पहाड़ों, गहरी घाटियों, सीमित दृश्यता और तेज हवाओं के कारण उड़ान के दौरान पायलटों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है।
ऐसे में किसी भी हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद सुरक्षा मानकों की समीक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। हालिया हादसे के बाद डीजीसीए की ओर से उड़ान संचालन से संबंधित नियमों में सख्ती किए जाने की जानकारी सामने आई है।
ट्विन पायलट नियम को लेकर बढ़ा विवाद
हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों की आपत्ति का मुख्य कारण ट्विन पायलट नियम बताया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत संबंधित हेलीकॉप्टर उड़ानों में दो पायलटों की तैनाती आवश्यक होती है। इसका उद्देश्य उड़ान के दौरान कार्यभार साझा करना और आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षा को मजबूत करना है।हालांकि, हेलीकॉप्टर ऑपरेटर इस नियम को लागू करने की व्यावहारिक चुनौतियों का हवाला दे रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में संचालित होने वाले कुछ हेलीकॉप्टरों की क्षमता सीमित होती है। ऐसे में अतिरिक्त पायलट की तैनाती से यात्रियों की उपलब्ध सीटों और संचालन लागत पर प्रभाव पड़ सकता है।
इसके अलावा प्रशिक्षित और योग्य पायलटों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। ऑपरेटरों का विरोध इस बात को लेकर है कि नए नियमों को लागू करने से पहले संचालन से जुड़ी वास्तविक परिस्थितियों पर विचार किया जाना चाहिए।फिलहाल यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि डीजीसीए का संबंधित आदेश किन श्रेणियों के हेलीकॉप्टरों और किन मार्गों पर लागू किया गया है। इसकी पुष्टि आधिकारिक आदेश से ही की जा सकती है।
सोमवार को बंद रहीं चारधाम की हेलीकॉप्टर सेवाएं
नए नियमों के विरोध में सोमवार को हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने चारधाम यात्रा के लिए अपनी सेवाएं बंद रखीं। इसके चलते हेलीकॉप्टर से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु हेलीकॉप्टर सेवाओं का उपयोग करते हैं। विशेष रूप से बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और शारीरिक रूप से कठिन पैदल यात्रा करने में असमर्थ यात्रियों के लिए हवाई सेवाएं महत्वपूर्ण होती हैं।
हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद होने से पहले से यात्रा की योजना बना चुके श्रद्धालुओं के कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, सोमवार को कितनी उड़ानें रद्द हुईं और कितने यात्रियों की बुकिंग प्रभावित हुई, इसका पुष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
DGCA और UCADA के नियमों पर ऑपरेटरों की आपत्ति
डीजीसीए देश में नागरिक विमानन सुरक्षा और उड़ान संचालन से संबंधित नियमों की निगरानी करता है। वहीं उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण राज्य में विमानन सुविधाओं और हेलीकॉप्टर सेवाओं से संबंधित व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने दोनों संस्थाओं के नियमों को लेकर विरोध जताया है। हालांकि, ऑपरेटरों की ओर से किन-किन प्रावधानों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई गई है, इसका विस्तृत विवरण अभी स्पष्ट नहीं है।
विमानन सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा के लिए आवश्यक होता है। ऐसे में ऑपरेटरों की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान भी नियामकीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए।
पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भरना चुनौतीपूर्ण
उत्तराखंड में केदारनाथ, बद्रीनाथ और अन्य धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बादल छाने, बारिश, बर्फबारी और तेज हवाओं के कारण उड़ान संचालन प्रभावित हो सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षित हेलीकॉप्टर संचालन के लिए मौसम की सटीक जानकारी, पायलटों का पर्याप्त प्रशिक्षण, तकनीकी जांच और उड़ान से पहले जोखिम का आकलन बेहद जरूरी है।दो पायलटों की व्यवस्था कुछ परिस्थितियों में सुरक्षा बढ़ाने में मदद कर सकती है, लेकिन हेलीकॉप्टर की प्रमाणित क्षमता, उड़ान संबंधी स्वीकृतियों और परिचालन सीमाओं का ध्यान रखना भी आवश्यक है।
यात्रियों की सुरक्षा और सेवाओं के संचालन के बीच चुनौती
हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों और विमानन नियामक के बीच उत्पन्न विवाद ने चारधाम यात्रा की हवाई सेवाओं के संचालन को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।एक ओर हालिया हादसे के बाद सुरक्षा नियमों को मजबूत करने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर हेलीकॉप्टर सेवाओं के अचानक बंद होने से श्रद्धालुओं को असुविधा हो रही है।इस स्थिति में डीजीसीए, यूकाडा और हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों के बीच संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना संचालन से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान निकालना आवश्यक होगा।
फिलहाल सोमवार को हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद रहने से चारधाम यात्रा की हवाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। अब यात्रियों और ऑपरेटरों की नजर इस बात पर रहेगी कि नियमों को लेकर जारी विवाद का समाधान कब निकलता है और हेलीकॉप्टर सेवाएं सामान्य रूप से कब बहाल होती हैं।
Next Story





