केरल
10 महीने बाद कोच्चि लौटा INS सुदर्शिनी, नौसेना ने किया शानदार स्वागत
Ratna Netam
2 Nov 2026 10:04 PM IST

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कोच्चि। भारतीय नौसेना के प्रतिष्ठित नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी (INS Sudarshini) ने अपने महत्वाकांक्षी समुद्री अभियान 'लोकायन 26' को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। करीब 10 महीने तक दुनिया के विभिन्न महासागरों में यात्रा करने के बाद सोमवार, 2 नवंबर 2026 को यह जहाज केरल के कोच्चि स्थित नौसैनिक अड्डे पर वापस पहुंचा। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर भारतीय नौसेना ने जहाज और उसके चालक दल का भव्य स्वागत किया। इस दौरान जहाज को वाटर कैनन सैल्यूट दिया गया और नौसेना के बैंड ने विशेष धुनों के साथ स्वागत समारोह को यादगार बनाया।आईएनएस सुदर्शिनी ने इस अभियान के दौरान 22 हजार से अधिक समुद्री मील की यात्रा की। जहाज ने एशिया, यूरोप, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के चार महाद्वीपों में स्थित 11 देशों के 17 बंदरगाहों का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना के युवा अधिकारियों को लंबी समुद्री यात्राओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना, भारत की समृद्ध समुद्री विरासत का प्रदर्शन करना और मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ सहयोग को मजबूत करना था।
वाटर कैनन सैल्यूट के साथ हुआ स्वागत
कोच्चि नौसैनिक अड्डे पर आईएनएस सुदर्शिनी के पहुंचते ही स्वागत का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहाज के सम्मान में पानी की बौछारों से सलामी दी गई। नौसेना बैंड की प्रस्तुति के बीच अधिकारियों और जवानों ने अभियान पूरा कर लौटे चालक दल का स्वागत किया।इस दौरान नौसैनिकों के परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। लंबे समय बाद अपने परिजनों से मिलने का अवसर चालक दल के सदस्यों के लिए विशेष रहा। स्वागत समारोह में दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने मुख्य भूमिका निभाई।वाइस एडमिरल सक्सेना ने चालक दल के साहस, अनुशासन, पेशेवर दक्षता और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस कठिन अभियान की सफलता भारतीय नौसेना के उत्कृष्ट समुद्री प्रशिक्षण, नाविक कौशल और परिचालन तैयारियों को प्रदर्शित करती है।
20 जनवरी को शुरू हुआ था लोकायन 26 अभियान
भारतीय नौसेना ने 20 जनवरी 2026 को कोच्चि से लोकायन 26 अभियान की शुरुआत की थी। उस समय वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने जहाज को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस अभियान के तहत आईएनएस सुदर्शिनी को लंबी अंतरमहाद्वीपीय यात्रा पर भेजा गया था।शुरुआती योजना के अनुसार जहाज को लगभग 22 हजार समुद्री मील की यात्रा करते हुए 13 देशों के 18 बंदरगाहों तक पहुंचना था। हालांकि, अभियान की समाप्ति पर जारी जानकारी के अनुसार जहाज ने 11 देशों के 17 बंदरगाहों का दौरा किया।यात्रा के दौरान जहाज ने अरब सागर, भूमध्य सागर और अटलांटिक महासागर सहित विभिन्न समुद्री क्षेत्रों में नौकायन किया। अलग-अलग मौसम और समुद्री परिस्थितियों ने चालक दल के सदस्यों को कठिन परिस्थितियों में जहाज संचालन का अनुभव प्रदान किया।
अटलांटिक महासागर को दो बार किया पार
लोकायन 26 अभियान की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में अटलांटिक महासागर को दो बार पार करना शामिल रहा। यह लंबी दूरी की समुद्री यात्रा चालक दल के लिए चुनौतीपूर्ण थी।अभियान के एक विशेष चरण में जहाज ने 18 दिनों में करीब 2,200 समुद्री मील की दूरी पूरी तरह पालों की सहायता से तय की। इस दौरान चुनौतीपूर्ण मौसम और समुद्री परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।इस उपलब्धि ने चालक दल की सहनशक्ति, टीमवर्क और समुद्री संचालन क्षमता को प्रदर्शित किया। पालों से चलने वाले जहाज में हवा की दिशा, समुद्री धाराओं और मौसम की स्थिति का विशेष महत्व होता है। ऐसे में लंबे समय तक समुद्र में सफल नौकायन करना अधिकारियों और प्रशिक्षुओं के लिए महत्वपूर्ण अनुभव रहा।
फ्रांस और अमेरिका में दिखाई भारत की समुद्री ताकत
अभियान के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी ने कई अंतरराष्ट्रीय समुद्री कार्यक्रमों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। फ्रांस में आयोजित प्रतिष्ठित 'एस्केल आ सेटे' (Escale à Sète) समुद्री विरासत महोत्सव में जहाज ने भाग लिया।इस आयोजन में विभिन्न देशों के पारंपरिक पाल वाले जहाजों और समुद्री समुदायों ने हिस्सा लिया। आईएनएस सुदर्शिनी की भागीदारी के माध्यम से भारत की प्राचीन समुद्री परंपराओं और आधुनिक नौसैनिक प्रशिक्षण क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया गया।इसके अतिरिक्त जहाज ने अमेरिका में आयोजित SAIL 250 समारोह और अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक समीक्षा में भी भाग लिया। ये कार्यक्रम अमेरिका की स्वतंत्रता के 250 वर्ष पूरे होने से जुड़े आयोजनों का हिस्सा थे।
पांच देशों की नौसेनाओं के साथ प्रशिक्षण और सहयोग
लोकायन 26 केवल समुद्री यात्रा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक सहयोग को भी नई दिशा दी।अभियान के दौरान भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने मोरक्को, पुर्तगाल, इटली, मिस्र और स्पेन की नौसेनाओं के साथ पेशेवर संवाद और प्रशिक्षण गतिविधियों में हिस्सा लिया।इन गतिविधियों के माध्यम से समुद्री संचालन, प्रशिक्षण पद्धतियों और नौसैनिक अनुभवों का आदान-प्रदान किया गया। विभिन्न बंदरगाहों पर आयोजित कार्यक्रमों में स्थानीय नागरिकों और भारतीय समुदाय के सदस्यों ने भी जहाज का दौरा किया।इस प्रकार आईएनएस सुदर्शिनी ने एक तैरते हुए सांस्कृतिक दूत के रूप में भारत की समुद्री विरासत, मित्रता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का संदेश पहुंचाया।
युवा नौसैनिक अधिकारियों को मिला विशेष प्रशिक्षण
आईएनएस सुदर्शिनी का मुख्य उद्देश्य नौसेना के युवा अधिकारियों और प्रशिक्षुओं को समुद्री परिस्थितियों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।लोकायन 26 अभियान के दौरान प्रशिक्षुओं ने समुद्री नेविगेशन, जहाज की निगरानी, पालों का संचालन, रस्सियों और उपकरणों का प्रबंधन, मौसम का आकलन तथा जहाज से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों का प्रशिक्षण प्राप्त किया।इस तरह का प्रशिक्षण नौसेना के अधिकारियों में नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता, अनुशासन और टीमवर्क विकसित करने में सहायक होता है। लंबी समुद्री यात्राओं के दौरान सीमित संसाधनों के बीच कार्य करना और बदलती परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेना भी प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।आईएनएस सुदर्शिनी का निर्माण स्वदेशी स्तर पर गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है। लगभग 54 मीटर लंबे इस जहाज में तीन मस्तूल और 20 पाल लगे हैं। इसके पालों का कुल क्षेत्रफल एक हजार वर्ग मीटर से अधिक है।
भारत की महासागर नीति को मिली मजबूती
भारतीय नौसेना के अनुसार लोकायन 26 अभियान भारत की 'महासागर' (MAHASAGAR) दृष्टि और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना को भी आगे बढ़ाता है।महासागर नीति का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा, विकास और समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना है। इस अभियान के माध्यम से भारत ने मित्र देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और समुद्री क्षेत्र में आपसी विश्वास बढ़ाने का प्रयास किया।आईएनएस सुदर्शिनी की सफल वापसी भारतीय नौसेना के लिए प्रशिक्षण और समुद्री कूटनीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। करीब 10 महीने तक चले इस अभियान ने न केवल युवा नौसैनिकों को व्यापक अनुभव दिया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की समुद्री विरासत और सहयोग की भावना को भी प्रदर्शित किया।
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