उत्तराखंड

CSD शराब के नाम पर फर्जीवाड़ा, 10 पेटियां बरामद

Rajeshwari Nishad
14 Oct 2026 3:01 PM IST
CSD शराब के नाम पर फर्जीवाड़ा, 10 पेटियां बरामद
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देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शराब की कथित तस्करी का मामला सामने आया है। आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने गढ़ी श्यामपुर के पास एक हुंडई क्रेटा कार से शराब की 10 पेटियां बरामद की हैं। बताया जा रहा है कि शराब की इस खेप को सीएसडी कैंटीन की शराब बताकर आम लोगों को बेचने के लिए ले जाया जा रहा था। कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शराब कहां से लाई गई थी और इसे कहां बेचा जाना था, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
इस कार्रवाई को शराब की अवैध बिक्री पर अंकुश लगाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। सीएसडी कैंटीन से संबंधित शराब और अन्य उत्पादों की बिक्री निर्धारित नियमों के तहत होती है। ऐसे में यदि किसी खेप को कैंटीन की शराब बताकर सामान्य बाजार में बेचा जा रहा था, तो इसकी जांच जरूरी है। हालांकि, शराब की वास्तविक खरीद, उसके स्रोत और बिक्री से संबंधित तथ्यों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
गढ़ी श्यामपुर के पास पकड़ी गई शराब की खेप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने गढ़ी श्यामपुर के पास कार्रवाई करते हुए हुंडई क्रेटा कार से शराब की 10 पेटियां बरामद कीं। टीम को शराब की खेप के परिवहन और बिक्री से संबंधित जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
वाहन से शराब बरामद होने के बाद विभाग की ओर से मामले की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि शराब किस स्थान से लाई गई थी और इसे किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था।
शराब की खेप को सीएसडी कैंटीन की शराब बताकर आम लोगों को बेचने की बात भी सामने आई है। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो संबंधित नियमों के उल्लंघन की आशंका की जांच की जाएगी। फिलहाल, इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी और विभाग की अंतिम पुष्टि का इंतजार है।
सीएसडी कैंटीन की शराब बताकर बिक्री की आशंका
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू शराब को सीएसडी कैंटीन की बताकर बेचे जाने की आशंका है। सीएसडी यानी कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट के माध्यम से सशस्त्र बलों के पात्र लाभार्थियों को निर्धारित नियमों के तहत सामान उपलब्ध कराया जाता है। इसकी बिक्री और वितरण की व्यवस्था सामान्य बाजार से अलग होती है।
यदि किसी शराब की खेप को सीएसडी कैंटीन से जुड़ी बताकर आम लोगों के बीच बेचा जाता है, तो यह जांच का विषय बन सकता है। ऐसे मामलों में शराब के स्रोत, खरीद के दस्तावेज, परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड और बिक्री के उद्देश्य की जांच महत्वपूर्ण होती है।
हालांकि, केवल सीएसडी कैंटीन की शराब बताने से यह साबित नहीं होता कि बरामद शराब वास्तव में वहीं से लाई गई थी। इसकी पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच जरूरी होगी।
आबकारी विभाग की कार्रवाई से मचा हड़कंप
शराब की खेप पकड़े जाने के बाद क्षेत्र में इस मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई। आबकारी विभाग की संयुक्त टीम की कार्रवाई से अवैध शराब के परिवहन और बिक्री से जुड़े मामलों पर एक बार फिर ध्यान गया है।
आबकारी विभाग की जिम्मेदारी शराब के उत्पादन, परिवहन, भंडारण और बिक्री से संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। निर्धारित अनुमति के बिना शराब का परिवहन या बिक्री किए जाने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इस मामले में भी विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर सकता है कि बरामद शराब के परिवहन के लिए आवश्यक दस्तावेज मौजूद थे या नहीं। इसके अलावा, शराब की पेटियों पर लगे लेबल और अन्य पहचान संबंधी विवरणों की जांच से उसके स्रोत के बारे में जानकारी मिल सकती है।
हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि वाहन में शराब ले जा रहे व्यक्ति के खिलाफ कौन-कौन सी धाराओं में कार्रवाई की गई है। इस संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
शराब के स्रोत और नेटवर्क की जांच जरूरी
शराब की 10 पेटियां बरामद होने के बाद जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। यदि शराब को निर्धारित व्यवस्था से हटकर बाजार में बेचने की योजना बनाई गई थी, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि खेप की आपूर्ति किसने की और इसके खरीदार कौन थे।
जांच के दौरान वाहन के दस्तावेज, शराब की खरीद से संबंधित रसीदें और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जा सकती है। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि शराब वैध माध्यम से खरीदी गई थी या उसके परिवहन और बिक्री में नियमों का उल्लंघन हुआ।
इसके अलावा, यह भी जांच का विषय होगा कि शराब की खेप को किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। यदि मामले में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
अवैध शराब की बिक्री पर निगरानी जरूरी
शराब की अवैध बिक्री से सरकार को राजस्व का नुकसान होने की आशंका रहती है। इसके अलावा, नियमों के विरुद्ध शराब की बिक्री होने पर उपभोक्ताओं के सामने भी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए शराब की आपूर्ति और बिक्री से संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में शराब के परिवहन पर निगरानी रखने के लिए आबकारी विभाग समय-समय पर जांच अभियान चलाता है। इस तरह की कार्रवाई से नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान करने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर
गढ़ी श्यामपुर के पास हुंडई क्रेटा कार से 10 पेटी शराब बरामद होने के मामले में अब आबकारी विभाग की जांच महत्वपूर्ण होगी। विभाग को शराब के स्रोत, परिवहन के उद्देश्य और कथित बिक्री से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करनी होगी।
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