उत्तराखंड

उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में लोक पर्व 'फूलदेई' की धूम, प्रकृति प्रेम और संस्कृति की अनूठी मिसाल

Gulabi Jagat
16 March 2025 10:36 PM IST
उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में लोक पर्व फूलदेई की धूम, प्रकृति प्रेम और संस्कृति की अनूठी मिसाल
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Uttarakhand: उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति और प्रकृति प्रेम को दर्शाने वाला लोक पर्व 'फूलदेई' पूरे राज्य में धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है। खासतौर पर गढ़वाल और कुमाऊं में बच्चे सुबह-सुबह फूलों से घरों की देहरी सजाकर मंगलकामना करते हैं।
क्या है 'फूलदेई' पर्व?
'फूलदेई' उत्तराखंड का पारंपरिक त्योहार है, जो चैत्र मास के पहले दिन मनाया जाता है। इस दिन गांवों और कस्बों में छोटे बच्चे बुरांश, फ्योंली, गुलाब और अन्य जंगली फूलों को एकत्र कर घरों की देहरी पर सजाते हैं। इस दौरान वे "फूलदेई, छम्मा देई" का पारंपरिक गीत गाते हैं और घर-घर जाकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा पर्व
इस पर्व का खास संदेश प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है। फूलदेई के जरिए बच्चों को प्रकृति से जोड़ने और वनों के महत्व को समझाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इसे उत्तराखंड की हरियाली और प्राकृतिक समृद्धि का उत्सव भी माना जाता है।
राज्यभर में उत्सव का माहौल
उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में फूलदेई को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। गांवों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इसे मनाया जा रहा है, वहीं शहरों में भी इसे लेकर जागरूकता बढ़ रही है। स्कूलों और सांस्कृतिक संस्थानों में फूलदेई के महत्व पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
मुख्य बिंदु:
उत्तराखंड में पारंपरिक लोक पर्व 'फूलदेई' हर्षोल्लास से मनाया गया।
बच्चे घर-घर जाकर फूल चढ़ाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
यह त्योहार पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति प्रेम का संदेश देता है।
गांवों और शहरों में उत्सव का माहौल, स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम।
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