उत्तराखंड
हाईवे पर हाथियों ने दो कारों को मारी टक्कर, मचा हड़कंप, वन विभाग ने संभाले हालात
Rajeshwari Nishad
4 Nov 2026 8:19 PM IST

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अल्मोड़ा। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में मरचूला हाईवे पर हाथियों की आवाजाही से वाहन चालकों में दहशत फैल गई। बुधवार शाम भकराकोट नाले के पास जंगल से सड़क पर पहुंचे हाथियों ने वहां से गुजर रही दो कारों को बारी-बारी से टक्कर मार दी। अचानक सामने आए विशालकाय हाथियों को देखकर कार सवार घबरा गए। बताया जा रहा है कि एक वयस्क हाथी चिंघाड़ते हुए सड़क पर पहुंचा और काले रंग की कार को सूंड से धकेलने लगा। इसके बाद उसने दूसरी कार को भी टक्कर मारी। घटना के दौरान हाईवे पर कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, मरचूला हाईवे पर बुधवार शाम वाहनों की सामान्य आवाजाही जारी थी। इसी दौरान भकराकोट नाले के आसपास जंगल में हाथियों का झुंड दिखाई दिया। कुछ ही देर में एक वयस्क हाथी जंगल से निकलकर सड़क तक पहुंच गया। हाथी को अपनी ओर आते देखकर वाहन चालकों ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी।प्रत्यक्षदर्शियों के विवरण के मुताबिक, हाथी ने सड़क पर पहुंचते ही चिंघाड़ना शुरू कर दिया। इसके बाद वह एक काले रंग की कार के पास पहुंचा और उसे धकेलने लगा। अचानक हुई इस घटना से कार में मौजूद लोग घबरा गए। आसपास मौजूद वाहन चालक भी सुरक्षित दूरी बनाकर स्थिति सामान्य होने का इंतजार करने लगे।
पहले काली कार को धकेला, फिर दूसरी कार को मारी टक्कर
बताया जा रहा है कि हाथी ने सबसे पहले काले रंग की कार को निशाना बनाया। वह कुछ देर तक कार के आसपास घूमता रहा और फिर उसे धक्का देने लगा। इसके बाद उसने वहां मौजूद दूसरी कार की ओर रुख किया।दोनों वाहनों को टक्कर मारने की घटना से आसपास मौजूद लोगों में भय का माहौल बन गया। हालांकि, उपलब्ध विवरण के अनुसार हाथी का व्यवहार अत्यधिक आक्रामक नहीं था। वह चिंघाड़ते हुए सड़क पर घूम रहा था और वाहनों को धकेल रहा था।वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों का ऐसा व्यवहार कई कारणों से हो सकता है। किसी वाहन का रास्ते में खड़ा होना, अत्यधिक शोर या अचानक पास पहुंच जाना भी हाथियों को असहज कर सकता है। इसलिए हाथियों के व्यवहार को सामान्य या खेल समझकर उनके करीब जाना खतरनाक हो सकता है।
हाईवे पर थम गई वाहनों की रफ्तार
हाथियों के सड़क पर आने के बाद हाईवे पर यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन गई। वाहन चालकों को आगे बढ़ने के बजाय रुककर हाथियों के रास्ता छोड़ने का इंतजार करना पड़ा।मरचूला और आसपास का इलाका घने जंगलों तथा वन्यजीवों की आवाजाही के लिए जाना जाता है। यहां सड़क मार्ग जंगल के कई संवेदनशील हिस्सों से होकर गुजरता है।ऐसे में हाथियों का सड़क पार करना असामान्य नहीं है, लेकिन वाहनों और हाथियों का अचानक आमना-सामना जोखिम पैदा कर सकता है।विशेष रूप से शाम और रात के समय जंगल के रास्तों पर दृश्यता कम होने से वाहन चालकों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
वन विभाग के लिए चुनौती बने वन्यजीवों के रास्ते
मरचूला क्षेत्र में हाथियों और वाहनों के बीच टकराव की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। अक्टूबर 2026 में मोहान के पास एक नर हाथी ने कार और जीप को क्षतिग्रस्त कर दिया था। उस घटना में कार का अगला शीशा और टायर क्षतिग्रस्त हुआ था, जबकि जीप के दरवाजे को भी नुकसान पहुंचा था।उस समय मंदाल रेंज के वन कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर हाथी को सड़क से हटाया था, जिसके बाद यातायात सामान्य हुआ था।इससे पहले सितंबर 2026 में भी रामनगर-मरचूला राष्ट्रीय राजमार्ग पर चिमटाखाल के पास हाथी ने एक कार को नुकसान पहुंचाया था। उस घटना में वाहन चालक सुरक्षित बच निकला था।लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं बताती हैं कि जंगलों से गुजरने वाली सड़कों पर वाहन चालकों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानी आवश्यक है।हाथियों के सामने वाहन रोकना भी हो सकता है खतरनाक
वन्यजीवों की आवाजाही वाले इलाकों में वाहन चलाते समय कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं। यदि सड़क पर हाथियों का झुंड दिखाई दे तो चालक को सुरक्षित दूरी पर रुक जाना चाहिए।हाथियों के बेहद करीब जाकर फोटो या वीडियो बनाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। तेज हॉर्न बजाना, हेडलाइट से बार-बार संकेत देना या जानवर को डराकर हटाने की कोशिश करना भी खतरनाक साबित हो सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों के झुंड में बच्चे मौजूद हों तो वयस्क हाथी अधिक सतर्क हो सकते हैं। ऐसे में उनके रास्ते में बाधा डालने से स्थिति बिगड़ सकती है।वन विभाग की ओर से जारी स्थानीय दिशा-निर्देशों का पालन करना और सड़क पर वन्यजीव दिखाई देने पर उन्हें सुरक्षित रास्ता देना सबसे उचित उपाय माना जाता है।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए सतर्कता जरूरी
उत्तराखंड के पर्वतीय और वन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। मरचूला मार्ग भी प्राकृतिक सुंदरता और जंगलों के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र रहता है।हालांकि, जंगल से गुजरने वाले रास्तों पर वन्यजीवों की मौजूदगी को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है।पर्यटकों को विशेष रूप से सलाह दी जाती है कि वे वन क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से वाहन न रोकें। वन्यजीव दिखाई देने पर कार से बाहर निकलने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखें।स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के बीच जागरूकता बढ़ाने से भी ऐसी घटनाओं के दौरान जोखिम कम किया जा सकता है।
सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना बड़ी प्राथमिकता
भकराकोट नाले के पास दो कारों को हाथियों द्वारा टक्कर मारने की सूचना ने एक बार फिर वन क्षेत्रों से गुजरने वाले राजमार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता को सामने रखा है।वन्यजीवों के प्राकृतिक रास्तों की पहचान, संवेदनशील क्षेत्रों में चेतावनी संकेतक और वाहन चालकों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराना ऐसे उपाय हैं, जो मानव-वन्यजीव टकराव को कम करने में मदद कर सकते हैं।
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