उत्तराखंड

Uttarakhand के डॉ. सुशील उपाध्याय बढ़ाएंगे हिंदी का प्रसार

Ratna Netam
23 July 2026 8:41 PM IST
Uttarakhand  के डॉ. सुशील उपाध्याय बढ़ाएंगे हिंदी का प्रसार
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देहरादून। चमन लाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य और प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. सुशील उपाध्याय का चयन भारत सरकार के केंद्रीय हिंदी निदेशालय की प्रतिष्ठित ‘प्राध्यापक व्याख्यानमाला’ योजना के लिए किया गया है। इस चयन को उत्तराखंड के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। डॉ. उपाध्याय अब देश के गैर-हिंदी भाषी राज्यों में जाकर हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए व्याख्यान देंगे और विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा हिंदी विद्वानों से संवाद स्थापित करेंगे।

केंद्रीय हिंदी निदेशालय के निदेशक प्रो. हितेंद्र कुमार मिश्र की ओर से जारी पत्र में डॉ. सुशील उपाध्याय के चयन की आधिकारिक जानकारी दी गई है। इस योजना के तहत देशभर से कुल आठ हिंदी विद्वानों का चयन किया गया है। इनमें चार विद्वान हिंदी भाषी क्षेत्रों से और चार विद्वान गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों से चुने गए हैं। उत्तराखंड से इस प्रतिष्ठित योजना के लिए चयनित होने वाले डॉ. सुशील उपाध्याय एकमात्र प्राध्यापक हैं।

‘प्राध्यापक व्याख्यानमाला’ योजना का उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में हिंदी भाषा के प्रति रुचि बढ़ाना और हिंदी साहित्य एवं भाषा के क्षेत्र में हो रहे शोध और कार्यों को व्यापक स्तर पर पहुंचाना है। इस योजना के अंतर्गत चयनित विद्वान विभिन्न राज्यों के शिक्षण संस्थानों में जाकर हिंदी से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा करते हैं। साथ ही विद्यार्थियों और शोधार्थियों को हिंदी अध्ययन के नए आयामों से परिचित कराते हैं।

डॉ. सुशील उपाध्याय शिक्षा और हिंदी साहित्य के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्होंने अपने शैक्षणिक जीवन में हिंदी भाषा के विकास, शिक्षण पद्धति और साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके चयन से महाविद्यालय परिवार और शिक्षा जगत में खुशी का माहौल है।

महाविद्यालय से जुड़े शिक्षकों और कर्मचारियों ने डॉ. उपाध्याय को इस उपलब्धि पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल डॉ. सुशील उपाध्याय की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे उत्तराखंड के शिक्षा जगत के लिए गौरव का विषय है। उनके माध्यम से राज्य की हिंदी प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।

डॉ. उपाध्याय ने चयन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और विद्यार्थियों के साथ संवाद करने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है और ऐसे कार्यक्रम भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाने की बात कही।

शिक्षाविदों का मानना है कि डॉ. सुशील उपाध्याय का चयन हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता है। इस उपलब्धि से उत्तराखंड के शिक्षा क्षेत्र को भी नई पहचान मिलेगी और हिंदी के प्रचार-प्रसार को मजबूती मिलेगी।

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